राजस्थान के रामगढ़ कस्बे में बंदरों का आतंक गंभीर समस्या बन गया है। श्रीकृष्णा मेमोरियल स्कूल में गुरुवार को बंदरों की एक टोली ने स्कूल परिसर में घुसकर छात्रों में अफरा-तफरी मचा दी। इस दौरान एक बंदर ने सातवीं कक्षा के छात्र का कान काट लिया, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
स्कूल के अनुसार, घटना उस समय हुई जब बच्चे अपनी कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे। अचानक कई बंदर खिड़की और दरवाजों से कक्षा में घुस आए। बच्चों के शोर मचाने पर कक्षा में अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान एक खूंखार बंदर ने सातवीं कक्षा के छात्र पर हमला कर दिया। घायल छात्र खून से लथपथ होकर रोने लगा, जिससे अन्य बच्चे दहशत में आ गए।
स्कूल स्टाफ और अन्य बच्चों ने तुरंत बच्चे को पकड़कर प्राथमिक उपचार के लिए स्कूल के नज़दीकी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने घायल छात्र का इलाज किया और उसका स्वास्थ्य अब सामान्य बताया जा रहा है, लेकिन घटना ने छात्रों और अभिभावकों में गहरा डर और चिंता पैदा कर दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है। रामगढ़ कस्बे और आसपास के क्षेत्रों में खूंखार बंदरों का आतंक कई महीनों से बढ़ता जा रहा है। बंदर अक्सर गांवों और कस्बों में घुसकर लोगों की सुरक्षा और जीवनशैली को खतरे में डाल रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द बंदरों के नियंत्रण और सुरक्षा उपायों को लागू किया जाए।
पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और कहा कि स्कूल परिसर में बंदरों की मौजूदगी के पीछे आसपास के जंगल और कचरा ढेर जिम्मेदार हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि वन विभाग की टीम जल्द ही राहत और नियंत्रण कार्रवाई करेगी ताकि बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बंदरों के बढ़ते आतंक का मुख्य कारण मानव गतिविधियों, भोजन के स्रोत और जंगलों के नष्ट होना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय पर उपाय नहीं किए गए, तो ऐसे हमले बढ़ सकते हैं और मानव-वन्यजीव संघर्ष और हादसों की संभावना और अधिक बढ़ जाएगी।
अभिभावकों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल के गेट पर सुरक्षा व्यवस्था और बंदरों की रोकथाम को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन और वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
रामगढ़ के इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि खूंखार बंदरों का आतंक अब केवल मनोरंजन या छोटे नुकसान का मामला नहीं रह गया है। यह बच्चों और आम लोगों की जीवन रक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

