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म्यांमार के साइबर फ्रॉड जाल से अलवर के युवक ने लौटकर सुनाई दर्दनाक कहानी — नौकरी का झांसा चमकी नींद

म्यांमार के साइबर फ्रॉड जाल से अलवर के युवक ने लौटकर सुनाई दर्दनाक कहानी — नौकरी का झांसा चमकी नींद

राजस्थान के अलवर जिले का एक युवक तीन महीने तक म्यांमार में साइबर फ्रॉड के एक बड़े जाल में फंसने के बाद सुरक्षित भारत लौट आया है। अमन (नाम बदलकर) नामक इस युवक की कहानी न सिर्फ उसके परिवार के लिए बल्कि उन हजारों बेरोज़गार युवाओं के लिए चेतावनी बनी है जो विदेश में नौकरी का सपना देख रहे हैं।

नौकरी का लालच और फँसने का जाल

अमन को पिछले साल 5 सितंबर को सोशल मीडिया पर 70,000 रुपये प्रति माह सैलेरी और शानदार नौकरी का लालच देकर म्यांमार भेजा गया था। शुरुआत में उसे डाटा एंट्री की नौकरी का झांसा दिया गया, लेकिन जैसे ही वह वहां पहुँचा, उसके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उसे ज़बरन साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर में काम करने के लिए मजबूर किया गया।

म्यांमार के इन फ्रॉड सेंटर्स में बड़ी संख्या में भारतीयों के साथ-साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों के युवा भी फंसे हैं। धोखेबाज़ों ने अमन से कहा कि वह सोशल मीडिया पर सुंदर मॉडल्स की नकली प्रोफाइल तैयार करेगा और विदेशी निवेशकों को फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स से निवेश करने के लिए फँसाएगा, जिससे उनके बैंक खाते खाली कर दिए जाते थे।

जबरन ठगी और असली चेहरा

अमन ने बताया कि वहां काम करने वाले युवाओं को प्रतिदिन कम से कम तीन लोगों को धोखा देने का टारगेट दिया जाता था। टारगेट पूरा होने पर उन्हें पार्टी और नशे का इनाम मिलता था, लेकिन टारगेट पूरा न करने पर सज़ा और धमकियाँ दी जाती थीं।

अमन ने यह भी बताया कि फ्रॉड कंपनी टेलीग्राम, व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके विदेशी नागरिकों से संपर्क करती थी और फर्जी ऑफ़र देकर पैसे निकालती थी।

बचाव और वापसी

हालांकि अमन वहां तीन महीने फंसा रहा, लेकिन म्यांमार फोर्स की छापेमारी और भारतीय दूतावास की मदद से कुल लगभग 270 भारतीय नागरिकों को सकुशल बचाया गया और विशेष विमान के जरिए भारत भेजा गया। अमन के मुताबिक, चीनी संचालक भागने में सफल रहे, लेकिन युवाओं ने दूतावास को मदद के लिए ईमेल भेजा जिससे उन्हें बचाया जा सका।

एजेंटों का नेटवर्क सक्रिय

इस मामले के सामने आने के बाद अलवर साइबर थाना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है, जो विदेश नौकरी के असली एजेंट हैं और युवाओं को धोखे में देकर साइबर फ्रॉड में फँसाते थे। इनमें से एक आरोपी अभी फरार है और उसकी तलाश जारी है।

चेतावनी और सलाह

विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के फ्रॉड नेटवर्क विशेष रूप से शे वे कोक्को जैसे म्यांमार के साइबर फ्रॉड हब पर निर्भर होते हैं, जहाँ बेरोज़गार युवाओं को नौकरी का प्रलोभन देकर फँसाया जाता है और फिर उन्हें धोखाधड़ी के कामों में शामिल किया जाता है।

राजस्थान के अलवर से लेकर देश के अन्य हिस्सों तक, यह घटना युवाओं के बीच विदेशी नौकरी के प्रस्तावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी विदेश नौकरी ऑफ़र को कबूल करने से पहले आधिकारिक स्रोतों और सरकारी विभागों से उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

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