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Allahbad अतीत को वर्तमान से जोड़ती हैं पांडुलिपियां
 

Allahbad अतीत को वर्तमान से जोड़ती हैं पांडुलिपियां


उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क  सीएमपी डिग्री कॉलेज के प्राचीन इतिहास और राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय संस्कृति विभाग की ओर से  प्यारेलाल सभागार में दुर्लभ पांडुलिपि प्रदर्शनी लगाई गई. मुख्य अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि यदि लीडरशिप करनी है तो सकारात्मकता के साथ की जाए, जैसे गांव को गोद लेकर समाज में परिवर्तन लाने की कोशिश करें. पांडुलिपियां धार्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत से रूबरू कराती हैं. अतीत को वर्तमान से जोड़ती हैं.
उन्होंने कहा कि सबसे पहले पिक्टोरियल भाषा थी और उसका प्रयोग हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में किया गया. शिक्षा की ऑटोनॉमी जरूरी है.

शासी निकाय के अध्यक्ष चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया. प्राचार्य प्रो. अजय प्रकाश खरे ने बताया कि पांडुलिपियों की अपनी दुनिया होती है. मनुष्य ने सबसे पहले लेखन की शुरुआत ताम्रपत्र, गुफाओं तथा खालो पर गया. उन्होंने यह भी कहा कि महाविद्यालय में कुछ नए कार्यक्रम शुरू किए गए हैं. तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के बच्चों की सेल्फ फाइनेंस फीस में 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की गई है. डीन सीडीसी प्रो. पंकज कुमार ने कहा कि कुलपति के रहते हुए यह विश्वविद्यालय नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. एडीजी प्रेम प्रकाश ने कहा कि इविवि का योगदान समाज के सभी क्षेत्रों में देखा जा सकता है. इस अवसर पर डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, डॉ. भूपेंद्र कुमार, वंदना माथुर, नीता सिन्हा, डॉ. सरोज सिंह, डॉ. एसपी सिंह, डॉ. सत्यमवदा सिंह, डॉ. भावना चौहान, राघवेंद्र नाथ सिंह, डॉ. आनंद कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य प्रो. आनंद शंकर सिंह आदि मौजूद रहे.


इलाहाबाद न्यूज़ डेस्क
 

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