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वीडियो में देखें धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान, हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने चाहिए, बेटियां IAS-IPS बनें, इंस्टाग्राम पर नाचने वाली नहीं

वीडियो में देखें धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान, हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने चाहिए, बेटियां IAS-IPS बनें, इंस्टाग्राम पर नाचने वाली नहीं

राजस्थान के अजमेर जिले के पुष्कर में कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदू समाज, जनसंख्या और धर्म को लेकर बड़ा बयान दिया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने चाहिए और अपनी बेटियों को आईएएस, आईपीएस और देश की सेवा करने योग्य बनाना चाहिए, न कि उन्हें सोशल मीडिया पर नाचने-गाने तक सीमित रखना चाहिए।

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “हिंदुओं को अपने धर्म पर गर्व करना चाहिए। बेटियां आईएएस, आईपीएस, काली और दुर्गा बनें, लेकिन इंस्टाग्राम की नाचने वाली मत बनो।” उन्होंने कहा कि समाज को अपनी परंपराओं और संस्कारों के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने जनसंख्या और धर्म के मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि घटती हिंदू आबादी और बढ़ते मजहबी प्रभाव से देश बर्बादी की स्थिति की ओर जा सकता है। उन्होंने इसे केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है और समाज को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

धर्मांतरण के मुद्दे पर बोलते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि इसके पीछे मुख्य कारण आर्थिक तंगी, अशिक्षा और अंधविश्वास हैं। उन्होंने कहा कि जब तक इन समस्याओं को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक धर्मांतरण जैसी घटनाएं होती रहेंगी।

उन्होंने समाज के संपन्न वर्ग से गरीबों की मदद करने की अपील करते हुए कहा कि आर्थिक तंगी दूर करने के लिए अमीर लोगों को गरीबों का सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि गरीबों को आर्थिक सहारा मिलेगा, तो वे मजबूरी में गलत रास्ता नहीं अपनाएंगे।

अंधविश्वास के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसे खत्म करने के लिए भक्ति जरूरी है। वहीं अशिक्षा को धर्मांतरण का बड़ा कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा ही इसका स्थायी समाधान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज के हर वर्ग तक शिक्षा पहुंचाना बेहद जरूरी है।

धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म में भगवानों की कोई कमी नहीं है और सनातनियों को अपने धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है और सनातन धर्म के अनुयायियों को अपनी आस्था और परंपराओं पर गर्व होना चाहिए।

उनके इस बयान के बाद सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पुष्कर में दिए गए इस बयान को लेकर विभिन्न वर्गों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल, उनका यह बयान एक बार फिर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना दिया है।

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