बागेश्वर धाम के पं. धीरेन्द्र शास्त्री ने पुष्कर में मठ बनाने की इच्छा जताई, वीडियो में जाने सनातन धर्म की महत्ता पर दिया संदेश
बागेश्वर धाम के प्रसिद्ध साधु धीरेन्द्र शास्त्री ने पुष्कर के नए मेला मैदान में मंगलवार को कथा के दौरान अपनी इच्छा जताई कि यहां एक नया मठ बनाया जाए। उन्होंने कहा कि यह मठ विशेष रूप से इसलिए जरूरी है क्योंकि वे चाहते हैं कि हिंदू श्रद्धालु अजमेर के मठों में जाएँ, चादर चढ़ाने जैसी रस्मों के लिए। धीरेन्द्र शास्त्री ने बताया कि उन्हें इस प्रक्रिया में दिक्कत महसूस होती है और इसलिए एक अलग स्थल पर मठ की स्थापना जरूरी है।
कथा में उन्होंने सनातन धर्म की महानता पर भी प्रकाश डाला। पं. धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि अगर किसी अन्य धर्म में जन्म लिया होता तो पूजा बिना फोटो के होती, लेकिन सनातन धर्म अद्भुत है। उन्होंने महिलाओं के सम्मान और उनके पूज्य होने पर जोर देते हुए कहा कि हमारे यहां राम-सीता को ‘सीताराम’ के नाम से पुकारा जाता है।
धीरेन्द्र शास्त्री ने अपने वक्तव्य में सामाजिक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा, “अपने बाप को बाप कहो, दूसरों के बाप को क्यों बाप बना रहे हो।” उनके अनुसार, यह संदेश परिवार और समाज में सही पहचान और सम्मान को स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
कथा में स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा कई संत और धार्मिक विद्वान भी मौजूद थे। समारोह में उन्होंने कहा कि अजमेर के हिंदुओं को अपने ‘ग्रैंड फादर’ के यहां पुष्कर आकर धार्मिक कृत्यों में भाग लेना चाहिए। उनके अनुसार, यह परंपरा न केवल धार्मिक अनुशासन बनाए रखती है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को भी मजबूत करती है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी आमंत्रित किया गया। धीरेन्द्र शास्त्री ने उन्हें कथा के दौरान हल भेंट किया। इससे मेला और धार्मिक उत्सव में औपचारिकता और गरिमा बढ़ गई।
स्थानीय लोग और श्रद्धालु इस अवसर पर बड़ी संख्या में पहुंचे। उन्होंने धीरेन्द्र शास्त्री की बातों और धार्मिक संदेशों को गौर से सुना। इसके साथ ही पुष्कर मेला मैदान में धार्मिक आयोजन का वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बना रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार, धीरेन्द्र शास्त्री का यह संदेश न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह लोगों में धार्मिक जागरूकता बढ़ाने और सनातन धर्म की परंपराओं को संरक्षित करने का प्रयास है।
कुल मिलाकर, पुष्कर में इस दूसरे मंगलवार की कथा ने धार्मिक अनुशासन, महिलाओं के सम्मान और सनातन धर्म की महत्ता पर ध्यान खींचा। साथ ही, नए मठ की योजना से आगामी वर्षों में पुष्कर में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को और विस्तार मिलने की उम्मीद है।

