केकड़ी में हेड कॉन्स्टेबल सस्पेंशन पर गरमाई सियासत, फुटेज में देखें डोटासरा बोले पुलिस वर्दी रौंदी जा रही और सरकार मूकदर्शक
राजस्थान के अजमेर जिले के केकड़ी सदर थाने में तैनात हेड कॉन्स्टेबल को सस्पेंड किए जाने का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार और भाजपा नेताओं पर तीखा हमला बोला है। वहीं, केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम ने इन आरोपों को अपनी छवि खराब करने की साजिश बताया है।
दरअसल, केकड़ी सदर थाने में तैनात एएसआई राजेश मीणा को हाल ही में सस्पेंड किया गया है। आरोप है कि उन्होंने क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन को रोकने का प्रयास किया था, जिसके बाद उनके साथ मारपीट की गई। इसके बावजूद विभागीय कार्रवाई के तहत उन्हें निलंबित कर दिया गया। इसी फैसले को लेकर अब विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा कि पुलिस थाना केकड़ी सदर (अजमेर) में तैनात एएसआई राजेश मीणा को अवैध खनन रोकने पर बुरी तरह पीटा गया, लेकिन इनाम के तौर पर उन्हें विभाग से सस्पेंशन मिला। डोटासरा ने आरोप लगाया कि अवैध खनन भाजपा नेताओं के संरक्षण में चल रहा है और इसी वजह से ईमानदारी से कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मी को दंडित किया गया।
डोटासरा ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि यह सिर्फ एक पुलिसकर्मी पर हमला नहीं है, बल्कि कानून के राज पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि जब कानून की रक्षा करने वाले ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की क्या गारंटी है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने राज्य सरकार से इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इधर, केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम ने डोटासरा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। विधायक ने कहा कि यह पूरा मामला उनकी और पार्टी की छवि खराब करने का प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध खनन के किसी भी तरह के संरक्षण का आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है। विधायक का कहना है कि मामले को राजनीतिक रंग देकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है।
विधायक शत्रुघ्न गौतम ने यह भी कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और विभागीय जांच के आधार पर ही कार्रवाई की गई है। उन्होंने मांग की कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
इस पूरे प्रकरण ने राज्य में कानून-व्यवस्था और अवैध खनन के मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विपक्ष जहां इसे सरकार की विफलता और अवैध खनन को संरक्षण देने का मामला बता रहा है, वहीं सत्तापक्ष इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रहा है।
फिलहाल हेड कॉन्स्टेबल के निलंबन और अवैध खनन से जुड़े इस मामले की जांच को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। लेकिन जिस तरह से यह मामला सियासी बहस का रूप ले चुका है, उससे आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाजी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

