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अजमेर JLN अस्पताल में घायल को खून के लिए 3 घंटे करना पड़ा इंतजार, ब्लड बैंक के कमरों पर मिले ताले; साथी ने बनाया वीडियो

अजमेर JLN अस्पताल में घायल को खून के लिए 3 घंटे करना पड़ा इंतजार, ब्लड बैंक के कमरों पर मिले ताले; साथी ने बनाया वीडियो

अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में एक घायल युवक को इलाज के दौरान खून के लिए करीब तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा। ट्रेन की चपेट में आने से 24 वर्षीय शिवराज के दोनों पैर कट गए थे। गंभीर हालत में उसे जेएलएन अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने तत्काल ब्लड चढ़ाने की जरूरत बताई। डॉक्टरों ने खून के लिए पर्ची बनाकर उसके साथी सागर को ब्लड बैंक भेजा, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उसे काफी देर तक स्टाफ नहीं मिला।घटना मंगलवार देर रात की बताई जा रही है। सागर के अनुसार, वह रात करीब 3 बजे ब्लड बैंक पहुंचा। वहां कई कमरों पर ताले लगे हुए थे। एक कमरा अंदर से बंद था। उसने अंदर मौजूद स्टाफ को आवाज लगाई और कई बार दरवाजा खटखटाया, लेकिन काफी देर तक कोई बाहर नहीं आया।

वार्ड से ब्लड बैंक तक लगाता रहा चक्कर

सागर ने बताया कि घायल शिवराज की हालत गंभीर थी और डॉक्टरों ने जल्द से जल्द खून चढ़ाने की बात कही थी। ऐसे में वह ब्लड की व्यवस्था के लिए वार्ड और ब्लड बैंक के बीच चक्कर लगाता रहा। लेकिन उसे समय पर कोई कर्मचारी नहीं मिला।करीब तीन घंटे तक इंतजार करने के बाद सागर ने ब्लड बैंक के बंद कमरों और खाली पड़े कॉरिडोर का वीडियो भी बनाया। इसके बाद उसने अस्पताल की हेल्प डेस्क पर मामले की शिकायत की। शिकायत के बाद भी कुछ समय तक स्थिति में बदलाव नहीं हुआ। आखिरकार सुबह करीब 6 बजे ब्लड बैंक का स्टाफ बाहर आया और घायल के लिए ब्लड उपलब्ध कराया गया।

ड्यूटी रूम अंदर से बंद होने पर उठे सवाल

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल ब्लड बैंक में ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ की उपलब्धता को लेकर उठ रहा है। गंभीर हालत में भर्ती मरीज के लिए डॉक्टरों ने तत्काल ब्लड की जरूरत बताई थी, लेकिन उसका साथी करीब तीन घंटे तक स्टाफ को तलाशता रहा।सागर ने जिस कमरे में स्टाफ मौजूद होने की बात कही, वह अंदर से बंद था। कई बार आवाज लगाने और दरवाजा खटखटाने के बावजूद दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद उसने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाया और शिकायत दर्ज कराई।

अस्पताल अधीक्षक ने जांच का दिया भरोसा

मामले को लेकर जेएलएन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे ने कहा कि वे फिलहाल अस्पताल से बाहर हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की बात कही है। अधीक्षक के अनुसार, जांच में जो भी कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था और रात के समय ब्लड बैंक में स्टाफ की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मरीज के परिजनों और साथियों का कहना है कि इमरजेंसी स्थिति में ब्लड जैसी जरूरी सुविधा के लिए उन्हें घंटों इंतजार नहीं करना पड़े, इसके लिए अस्पताल प्रशासन को व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।

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