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अजमेर मेयर चुनाव में निर्दलीयों ने पलटा पूरा गणित, 37 सीटों वाली कांग्रेस हारी; वीडियो में जाने 32 सीटों वाली भाजपा की अनामिका शर्मा बनीं मेयर

अजमेर मेयर चुनाव में निर्दलीयों ने पलटा पूरा गणित, 37 सीटों वाली कांग्रेस हारी; वीडियो में जाने 32 सीटों वाली भाजपा की अनामिका शर्मा बनीं मेयर

अजमेर नगर निगम के मेयर चुनाव में निर्दलीय पार्षदों ने पूरा सियासी गणित बदल दिया। वार्ड चुनाव में कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि भाजपा के खाते में 32 सीटें आई थीं। इसके बावजूद मेयर की कुर्सी भाजपा के खाते में गई। भाजपा की अनामिका शर्मा ने 43 वोट हासिल कर कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 6 वोटों से हराया। कांग्रेस प्रत्याशी को 37 वोट मिले।

80 सदस्यीय निगम में निर्दलीय बने निर्णायक

अजमेर नगर निगम में कुल 80 पार्षद हैं। वार्ड चुनाव के बाद कांग्रेस के 37, भाजपा के 32 और निर्दलीय पार्षदों की संख्या 11 थी। ऐसे में मेयर चुनाव में बहुमत के लिए निर्दलीयों का समर्थन निर्णायक माना जा रहा था। मतदान के बाद भाजपा प्रत्याशी को 43 वोट मिले, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भाजपा को अपने 32 पार्षदों के अलावा 11 निर्दलीयों का समर्थन मिला।

कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होकर भी नहीं बना सकी मेयर

वार्ड चुनाव के परिणामों में कांग्रेस भाजपा से पांच सीट आगे थी। इसके बावजूद पार्टी मेयर चुनाव में अपने पार्षदों की संख्या से आगे नहीं बढ़ सकी। कांग्रेस प्रत्याशी को 37 वोट मिले, यानी कांग्रेस के वार्ड स्तर के आंकड़े के बराबर ही वोट हासिल हुए।दूसरी ओर भाजपा ने अपने 32 पार्षदों के आंकड़े में 11 निर्दलीय जोड़कर 43 वोट हासिल किए। इस तरह निर्दलीय पार्षदों का रुख मेयर चुनाव में निर्णायक साबित हुआ।

निर्दलीयों के रुख पर टिकी थी नजर

वार्ड चुनाव के बाद से ही अजमेर में 11 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। दोनों प्रमुख दलों की नजर इन पार्षदों पर थी। मतदान के बाद सामने आए आंकड़ों से पता चला कि सभी 11 निर्दलीयों का समर्थन भाजपा उम्मीदवार को मिला।

कांग्रेस के सामने अब कई सवाल

मेयर चुनाव के नतीजे के बाद कांग्रेस के भीतर रणनीति और निर्दलीय पार्षदों के साथ तालमेल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस के पास 37 पार्षद होने के बावजूद उसके उम्मीदवार को इससे अधिक वोट नहीं मिलना पार्टी के लिए चर्चा का विषय बन गया है।वहीं भाजपा के 32 पार्षदों के साथ 11 निर्दलीयों का समर्थन जुड़ने से उसका आंकड़ा 43 तक पहुंच गया। इस परिणाम ने यह भी दिखाया कि अजमेर जैसे विभाजित जनादेश वाले नगर निगम में निर्दलीय पार्षद मेयर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

अब मेयर चुनाव के बाद अजमेर नगर निगम में बोर्ड गठन और आगे की राजनीतिक रणनीति पर निगाहें रहेंगी। वार्ड चुनाव में सबसे अधिक सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस और मेयर पद अपने नाम करने वाली भाजपा के बीच निगम की राजनीति में आगे भी मुकाबला देखने को मिलेगा।

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