धीरेंद्र शास्त्री का बयान, सोशल मीडिया से रिश्तों में दरार, वीडियो में देंखे मर्यादा और संयम जरूरी
कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने कहा है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण पति-पत्नी के रिश्तों में दरार आ रही है और आजकल कई शादियां टिक नहीं पा रही हैं। उन्होंने लोगों को संयम, मर्यादा और गंभीरता के साथ जीवन जीने की सलाह दी।
अजमेर के पुष्कर मेला ग्राउंड में आयोजित हनुमंत कथा के अंतिम दिन बुधवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा के समापन अवसर पर धीरेंद्र शास्त्री ने पारिवारिक जीवन, सामाजिक आचरण और आध्यात्मिक मूल्यों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर ‘नाइस’ और ‘ब्यूटीफुल’ जैसे कमेंट करने वाले लोग अक्सर सभी के साथ ऐसा ही व्यवहार करते हैं, इसलिए ऐसे आभासी आकर्षण के जाल में फंसने से बचना चाहिए। उनके अनुसार, इन आभासी रिश्तों के कारण दांपत्य जीवन प्रभावित हो रहा है और आपसी विश्वास कमजोर पड़ रहा है।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में लोग बाहरी दिखावे और प्रशंसा के पीछे भाग रहे हैं, जिससे वास्तविक संबंधों की मजबूती कम हो रही है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे सोशल मीडिया के उपयोग में सावधानी बरतें और अपने पारिवारिक रिश्तों को प्राथमिकता दें।
कथावाचक ने आध्यात्मिक दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि यदि व्यक्ति परमात्मा से प्रेम करेगा तो वह कभी दुखी नहीं रहेगा। उनका कहना था कि भौतिक सुख-सुविधाएं क्षणिक हैं, लेकिन ईश्वर भक्ति स्थायी शांति देती है।
अपने प्रवचन में उन्होंने अहंकार से बचने की भी सीख दी। उन्होंने कहा, “जो मिला है, उस पर घमंड मत करो। चाहे रूप हो, धन हो, भवन हो, यश हो या जीवन—सबको प्रसाद समझकर स्वीकार करो।” उन्होंने कहा कि मनुष्य को विनम्र रहना चाहिए और सफलता मिलने पर भी संयम बनाए रखना चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री ने आलोचना और निंदा को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि समाज में निंदा होना स्वाभाविक है और इससे घबराना नहीं चाहिए। “जिसकी निंदा होगी, वही जिंदा है,” कहते हुए उन्होंने लोगों को सकारात्मक सोच बनाए रखने की सलाह दी।
हनुमंत कथा के समापन पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। कथा स्थल पर भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में लोग आशीर्वाद लेने पहुंचे।
धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान पर विभिन्न वर्गों में चर्चा शुरू हो गई है। जहां उनके समर्थक इसे सामाजिक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे आधुनिक जीवनशैली पर पारंपरिक दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति मान रहे हैं।

