Ajmer में अत्याधुनिक जिला न्यायालय परिसर का लोकार्पण, मुख्य न्यायाधीश श्रीवास्तव ने किया उद्घाटन
राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव ने रविवार को अजमेर जिले में नवनिर्मित अत्याधुनिक जिला न्यायालय परिसर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति इन्द्रजीत सिंह और न्यायमूर्ति महेन्द्र कुमार गोयल भी उपस्थित थे।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश श्रीवास्तव ने कहा कि किसी भी आधुनिक एवं विकसित समाज के लिए निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं निडर न्यायिक प्रणाली आवश्यक है। उन्होंने भवन को तकनीकी रूप से उन्नत, पर्यावरण अनुकूल और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित बताते हुए इसे अजमेर के न्यायिक इतिहास में मील का पत्थर बताया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि देश में लंबित मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है और न्यायिक बुनियादी ढांचे का विकास उसी गति से नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि वे बुनियादी ढांचे के विकास के लिए राज्य सरकार के साथ समन्वय में काम कर रहे हैं और यह भवन उसी दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल वकीलों और न्यायाधीशों को एक ही परिसर में पर्याप्त सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि वादियों को न्याय सुलभ कराने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ई-फाइलिंग, रिकॉर्ड डिजिटलीकरण जैसी प्रौद्योगिकी के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें से अधिकांश आपराधिक मामले हैं। उन्होंने बताया कि न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए वे स्वयं समन एवं वारंट प्रणाली का निरीक्षण करेंगे। उन्होंने वकीलों से पुराने मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए सहयोग करने की अपील की। मुख्य न्यायाधीश ने राष्ट्रीय मध्यस्थता अधिनियम के तहत प्री-लिटिगेशन केंद्रों की स्थापना की जानकारी दी और कहा कि वकीलों को मध्यस्थ के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।
न्यायमूर्ति महेन्द्र गोयल ने कहा कि इस परिसर से अजमेर जिले के करीब 30 लाख निवासियों को लाभ मिलेगा। जहां पहले 41 न्यायिक अधिकारी अलग-अलग स्थानों पर काम करते थे, अब वे एक एकीकृत परिसर में काम करेंगे। उन्होंने अजमेर के न्यायिक इतिहास का उल्लेख किया तथा इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला।

