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‘बादशाह’ की अंतिम यात्रा में लुटाई खर्ची, बीरबल ने किया पारंपरिक नृत्य

‘बादशाह’ की अंतिम यात्रा में लुटाई खर्ची, बीरबल ने किया पारंपरिक नृत्य

राजस्थान के Jaisalmer में गुरुवार को ‘बादशाह’ की अंतिम यात्रा के दौरान अनोखी और पारंपरिक रस्में देखने को मिलीं। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और पूरे शहर में शोक के साथ-साथ परंपराओं की झलक भी देखने को मिली। इस दौरान श्रद्धांजलि स्वरूप खर्ची लुटाई गई और ‘बीरबल’ द्वारा पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

स्थानीय परंपरा के अनुसार अंतिम यात्रा के दौरान खर्ची लुटाने की प्रथा निभाई गई। श्रद्धालुओं और परिजनों ने रास्ते में लोगों के बीच सिक्के और खर्ची बांटकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान लोगों ने नम आंखों से ‘बादशाह’ को अंतिम विदाई दी।

अंतिम यात्रा में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से लोग शामिल हुए। जुलूस के रूप में निकली इस यात्रा में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और धार्मिक मंत्रोच्चार के बीच लोग श्रद्धांजलि अर्पित करते नजर आए।

इस दौरान ‘बीरबल’ ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य प्रस्तुत किया। यह नृत्य स्थानीय परंपरा का हिस्सा माना जाता है, जिसे विशेष अवसरों पर किया जाता है। नृत्य के माध्यम से दिवंगत आत्मा को सम्मान देने की परंपरा निभाई गई।

शहरवासियों ने बताया कि यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है और समाज के लोग इसे श्रद्धा और सम्मान के साथ निभाते हैं। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

इस प्रकार ‘बादशाह’ की अंतिम यात्रा में शोक और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने यह दर्शाया कि दिवंगत व्यक्ति समाज में सम्मानित स्थान रखते थे और लोग उन्हें श्रद्धापूर्वक अंतिम विदाई देने पहुंचे।

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