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Agra  सावधान, वायरल जाने में ले रहा दोगुना समय, कोरोना काल में ली गई स्टेरायड व गलत दवाओं का दुष्प्रभाव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ा
 

Agra  सावधान, वायरल जाने में ले रहा दोगुना समय, कोरोना काल में ली गई स्टेरायड व गलत दवाओं का दुष्प्रभाव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ा


उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क  कोविड के दौरान अनाप-शनाप दवाओं ने लगभग हर रोग को बिगाड़ दिया है. वायरल को ही लीजिए. अमूमन पांच-छह दिन में ठीक होने वाला वायरल बुखार ठीक होने में अब 10 से 12 दिन ले रहा है. एसएन मेडिकल कालेज की ओपीडी में इन दिनों पांच सालों में सबसे ज्यादा वायरल के मरीज आ रहे हैं.
एसएनएमसी में मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि  अब तक के सबसे ज्यादा 607 मरीज आए. इनमें वायरल, सर्दी, खांसी, जुकाम, गले और पेट में दर्द, अपच और गैस के मरीज थे. वायरल को लेकर बड़ी दिक्कत है. बुखार न उतरने पर पुराने मरीज दोबारा लौट रहे हैं. पांच-छह दिन में ठीक होने वाला बुखार 10-12 दिन ले रहा है. इसके पीछे कोविड काल में अनाप-शनाप एंटीबायोटिक, स्टेरायड और केमिस्ट से अपने आप ली गई दवाएं हैं. संक्रमण से बचने के लिए भी लोगों ने सरकारी इलाज के प्रोटोकाल में शामिल दवाओं को बिना संक्रमित हुए खाया. इनसे प्रतिरोधक क्षमता कम हुई है. यही कारण है कि वायरल अधिक ताकतवर साबित हो रहा है.
स्ट्रेचर न मिला तो चारपाई पर मरीज
एसएन मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा सुविधा राम भरोसे हैं. कई जरूरी सुविधाएं यहां नहीं हैं. यहां तक कि स्ट्रैचर का अभाव है. तीमारदार अपने मरीजों को वार्ड तक पलंग या चारपाई पर ले जाने को मजबूर हैं. यह नजारा सिर्फ  ही नहीं था बल्कि मरीजों व उनके तीमारदारों का रोज ही इससे सामना होता है.

ऐसे करें बचाव
● सुबह और शाम शरीर को पूरा ढंकने वाले कपड़े पहनें
● मच्छरों से बचाव को दरवाजे, खिड़कियों में जाली लगवाएं
● बुखार आने पर सिर्फ पैरासिटामोल 650 एमजी ही लेनी है
● चार-पांच दिनों में बुखार न उतरे तो फिजीशियन को दिखाएं
● ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम का सेवन बंद कर दें
● ठंडे पानी से नहाना खतरनाक हो सकता है, गुनगुने से नहाएं
● रात में अगर पंखा चलाएं तो कंबल या रजाई का प्रयोग करें
● देर रात या सुबह बिस्तर से उठकर सीधे बाथरूम न जाएं
● त्वचा पर नहाने के बाद नारियल तेल, माश्चराइजर लगाएं
● दाने, खराश, एलर्जी होने पर तत्काल डॉक्टरी सलाह लें
ओपीडी में रिकार्ड 3013 मरीज आए
कालेज की ओपीडी में  रिकार्ड 3013 मरीज आए. यह भी सीजन का रिकार्ड है. बीते पांच सालों में इतने मरीज कभी दर्ज नहीं किए गए. मौसम बदलने, वायरल बिगड़ने के साथ बीते दिनों रहा प्रदूषण का कहर भी इसका बड़ा कारण है. हड्डी रोग विभाग में भी दूसरे नंबर पर 398 मरीजों को देखा गया. इनमें जोड़ों के दर्द वाले मरीज अधिक हैं.
जिला अस्पताल में बच्चों के लिए जुटे सभी डॉक्टर
जिला अस्पताल की ओपीडी में 2420 नए और दो हजार पुराने मरीजों के पर्चे बने. कुल 4420 मरीजों में 470 बच्चे थे. इन्हें देखने के लिए प्रमुख अधीक्षक डॉ. एके अग्रवाल ने सभी विभागों के डॉक्टर बाल रोग विभाग में लगा दिए. बच्चों को भी बुखार और पेट का संक्रमण सबसे ज्यादा था. हेल्दी सीजन शुरू होने के बाद भी इतने मरीज आश्चर्य में डाल रहे हैं.
त्वचा और सांस संबंधी दिक्कतें बढ़ रही हैं
बदलते मौसम में एलर्जी की शिकायत बहुत बढ़ गई है. त्वचा विभाग में आए 357 मरीजों को यही दिक्कत थी. साथ में खराश, लाल-काले दाने, छोटे फफोलों की शिकायतें भी आ रही हैं. जबकि टीबी और वक्ष रोग विभाग में सांस के मरीज स्थिर हैं. वार्ड फुल चल रहा है. सड़कों पर उड़ने वाली धूल के साथ कार्बन से सांस खींचने में परेशानी आ रही है.


आगरा न्यूज़ डेस्क
 

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