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PhysicsWallah के शेयरों में अचानक क्यों आई तेज़ी? घाटे के बावजूद निवेशक क्यों हैं इस स्टॉक पर मेहरबान

PhysicsWallah के शेयरों में अचानक क्यों आई तेज़ी? घाटे के बावजूद निवेशक क्यों हैं इस स्टॉक पर मेहरबान

अलख पांडेय की एडटेक कंपनी PhysicsWallah के शेयरों में बुधवार को एक बार फिर जोरदार तेजी देखने को मिली। कंपनी का शेयर 5.39 फीसदी चढ़कर 127.90 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। दोपहर करीब 1:25 बजे स्टॉक 128 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं, इस दौरान BSE सेंसेक्स करीब 0.08 फीसदी की गिरावट के साथ 77,594 के स्तर पर था।

6 महीने में करीब 43 फीसदी बढ़ा शेयर

PhysicsWallah के शेयर ने पिछले छह महीनों में करीब 42.9 फीसदी का रिटर्न दिया है। बुधवार की तेजी के पीछे दो बड़ी ब्लॉक डील को प्रमुख वजह माना जा रहा है। इन दोनों डील में कुल 4.67 करोड़ PhysicsWallah शेयरों का लेनदेन हुआ, जो कंपनी की कुल इक्विटी का करीब 1.6 फीसदी है।

यह गतिविधि कंपनी के Q1FY27 के नतीजे जारी करने के कुछ दिनों बाद हुई। जून तिमाही में कंपनी ने रेवेन्यू में मजबूत बढ़ोतरी के साथ नेट लॉस में भी कमी दर्ज की थी।

जून तिमाही में भी घाटे में रही कंपनी

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में PhysicsWallah का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 24.4 फीसदी बढ़कर 1,054 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 847 करोड़ रुपये था। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट लॉस भी 36 फीसदी घटकर 77.6 करोड़ रुपये रह गया, जबकि Q1FY26 में यह 120.5 करोड़ रुपये था। हालांकि, सुधार के बावजूद कंपनी अभी भी कंसोलिडेटेड स्तर पर घाटे में है। कंपनी का EBITDA लॉस भी घटकर 56.9 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 76.3 करोड़ रुपये था। इससे कंपनी की ऑपरेशनल परफॉर्मेंस में सुधार का संकेत मिलता है।

ऑनलाइन बिजनेस से मिल रहा बड़ा योगदान

PhysicsWallah के प्रदर्शन में ऑनलाइन सेगमेंट की अहम भूमिका रही। जून तिमाही में ऑनलाइन रेवेन्यू 548.79 करोड़ रुपये रहा, जो ऑफलाइन ऑपरेशंस के 489.90 करोड़ रुपये के रेवेन्यू से अधिक था। ऑनलाइन बिजनेस ने 75.90 करोड़ रुपये का सेगमेंट रिजल्ट दर्ज किया, जबकि ऑफलाइन सेगमेंट को 27.17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अन्य सेगमेंट में भी 4.50 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया। मई 2026 तक कंपनी के देशभर में 353 सेंटर हो चुके थे। इस दौरान ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करने वाले यूजर्स की संख्या 48.7 लाख तक पहुंच गई, जबकि ऑफलाइन एनरोलमेंट 4.7 लाख रहा।

बढ़ी लागत बनी चुनौती

रेवेन्यू और EBITDA लॉस में सुधार के बावजूद कंपनी पर लागत का दबाव बना हुआ है। जून तिमाही में डेप्रिसिएशन, डिप्लीशन और अमॉर्टाइजेशन बढ़कर 110.67 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, फाइनेंस कॉस्ट 25.50 करोड़ रुपये रही। कंपनी ने 108.86 करोड़ रुपये की अन्य आय दर्ज की। इसमें फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स की फेयर वैल्यू के दोबारा मूल्यांकन से हुआ 44.35 करोड़ रुपये का नुकसान भी शामिल है। इन सभी खर्चों और आय को मिलाने के बाद टैक्स के बाद कंपनी को 84.32 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

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