थोक महंगाई अप्रैल में 8.30%, एक महीने में दोगुनी, वीडियो में समझें रोजाना जरूरत के सामान और गैस बिजली के कितने बढ गए दाम
देश में महंगाई ने एक बार फिर तेज रफ्तार पकड़ ली है। अप्रैल महीने में थोक महंगाई दर (WPI) दोगुने से अधिक बढ़कर 8.30 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह पिछले 42 महीनों में सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। इससे पहले मार्च में थोक महंगाई 3.88 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को यह आंकड़े जारी किए।
आंकड़ों के अनुसार, थोक महंगाई में यह तेज उछाल मुख्य रूप से रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण देखने को मिला है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से भी कीमतों पर दबाव बढ़ा है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है।
यह स्तर अक्टूबर 2022 के बाद सबसे ऊंचा है, जब थोक महंगाई 8.39 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती लागत से उत्पादन और सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है, जिससे थोक स्तर पर कीमतों में तेजी बनी हुई है।
इसी बीच खुदरा महंगाई (CPI) में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि मार्च में यह 3.40 प्रतिशत थी। हालांकि वृद्धि मामूली है, लेकिन लगातार बढ़ते रुझान ने आर्थिक चिंताओं को बढ़ा दिया है।
महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल बताया जा रहा है। अप्रैल में फूड इन्फ्लेशन बढ़कर 4.20 प्रतिशत हो गया, जो मार्च में 3.87 प्रतिशत था। खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति संबंधी दिक्कतें आने वाले महीनों में भी महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

