UPI MDR Charge: 2000 रुपये से ज्यादा के कुछ UPI पेमेंट पर लगेगा MDR, जानें ग्राहक पर क्या होगा असर
UPI पेमेंट से जुड़े नियमों में एक अहम बदलाव की जानकारी सामने आई है. इसके तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी Merchant Discount Rate यानी MDR लागू होगा. हालांकि इस चार्ज का बोझ सीधे ग्राहक पर नहीं डाला जाएगा. यानी UPI से भुगतान करने वाले ग्राहक को अपनी जेब से अतिरिक्त फीस नहीं देनी होगी.
MDR से मिलने वाली रकम UPI इकोसिस्टम से जुड़े अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच बांटी जाएगी. इसमें ग्राहक का बैंक, मर्चेंट का बैंक, UPI ऐप और पेमेंट सर्विस से जुड़े बैंक शामिल होंगे. इसके अलावा MDR की एक तय राशि UPI Fund में भी जाएगी.
UPI MDR क्या होता है?
Merchant Discount Rate (MDR) वह फीस है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले मर्चेंट से ली जाती है. नए ढांचे के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कुछ पात्र P2M UPI पेमेंट पर 0.4 फीसदी MDR लागू होगा.
हालांकि, हर ट्रांजैक्शन पर इसकी कोई असीमित फीस नहीं होगी. 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है.
वहीं Person-to-Person यानी P2P पेमेंट इस व्यवस्था के दायरे में नहीं आएंगे. इसी तरह 2,000 रुपये तक के पात्र P2M ट्रांजैक्शन पर भी MDR लागू नहीं होगा.
5,000 रुपये के UPI पेमेंट पर कितना MDR?
इसे एक उदाहरण से समझें. अगर कोई ग्राहक किसी मर्चेंट को UPI के जरिए 5,000 रुपये का भुगतान करता है और उस ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR लागू है, तो कुल MDR 20 रुपये होगा.
इस 20 रुपये को UPI सिस्टम के अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच तय अनुपात के अनुसार बांटा जाएगा. इसमें 1 रुपये यानी कुल MDR का 5 फीसदी UPI Fund में जाएगा.
बाकी 19 रुपये ग्राहक के बैंक, मर्चेंट के बैंक, UPI ऐप और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर से जुड़े हिस्सेदारों के बीच वितरित किए जाएंगे.
किस हिस्सेदार को कितनी रकम मिलेगी?
5,000 रुपये के इस उदाहरण में 20 रुपये MDR को इस तरह बांटा जाएगा:
• Issuing Bank: 7.60 रुपये
• Acquiring Bank: 5.70 रुपये
• TPAP/App Provider: 3.80 रुपये
• Payer PSP: 1.90 रुपये
• UPI Fund: 1 रुपये
Issuing Bank वह बैंक है, जिसमें ग्राहक का बैंक अकाउंट होता है और जहां से पेमेंट की रकम डेबिट होती है. वहीं Acquiring Bank मर्चेंट की ओर से पेमेंट प्राप्त करता है.
TPAP यानी Third Party Application Provider उस UPI ऐप से जुड़ा होता है, जिसके जरिए ग्राहक भुगतान करता है. उदाहरण के तौर पर Google Pay, PhonePe या Paytm जैसे ऐप UPI पेमेंट की सुविधा उपलब्ध कराते हैं.
MDR लगाने का उद्देश्य क्या है?
इस व्यवस्था का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम से जुड़े खर्चों और इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करना बताया गया है. MDR से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल साइबर सिक्योरिटी, तकनीकी विकास, पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्राहक सेवाओं को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है.
UPI पर बड़ी संख्या में डिजिटल ट्रांजैक्शन होते हैं. ऐसे में सिस्टम की क्षमता बढ़ाने, सुरक्षा मजबूत करने और नई तकनीक में निवेश के लिए लगातार संसाधनों की जरूरत होती है.
कुछ सेक्टर के लिए अलग फीस स्ट्रक्चर
सभी पात्र ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR एक समान तरीके से लागू नहीं होगा. कुछ खास सेक्टरों के लिए अलग फ्लैट फीस का प्रावधान रखा गया है.
रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसे सेक्टरों में 2,000 रुपये से अधिक के संबंधित पेमेंट पर 5 रुपये की फ्लैट MDR लागू होगी. इसके अलावा पब्लिक यूटिलिटी पेमेंट और एजुकेशन फीस कलेक्शन के लिए भी अलग फ्लैट-फीस स्ट्रक्चर रखा गया है.
ग्राहक को कितने पैसे देने होंगे?
इस बदलाव में ग्राहकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि MDR सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा. उदाहरण के तौर पर अगर किसी ग्राहक को 5,000 रुपये का UPI पेमेंट करना है, तो उसे 5,000 रुपये ही भुगतान करने होंगे.
इस ट्रांजैक्शन पर बनने वाली 20 रुपये की MDR फीस मर्चेंट-साइड पर लागू होगी और इसे UPI इकोसिस्टम से जुड़े अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच बांटा जाएगा.
यानी इस व्यवस्था का असर मुख्य रूप से मर्चेंट और UPI पेमेंट इकोसिस्टम की फीस संरचना पर पड़ेगा, जबकि ग्राहक के लिए पात्र UPI पेमेंट पर अलग से MDR चार्ज लगाने का प्रावधान नहीं है.

