Samachar Nama
×

UPI MDR Charge: 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर लगेगा 0.4% चार्ज, जानें किसे देना होगा पैसा
 

UPI MDR Charge: 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर लगेगा 0.4% चार्ज, जानें किसे देना होगा पैसा

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI का इस्तेमाल आज करोड़ों लोग रोजाना करते हैं. अब 15 अक्टूबर 2026 से कुछ बड़े मर्चेंट पेमेंट्स के लिए इसकी व्यवस्था में बदलाव होने जा रहा है. तय श्रेणी के 2,000 रुपये से ज्यादा के Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू होगा. हालांकि यह चार्ज सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा और Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के ट्रांसफर पर इसका असर नहीं पड़ेगा.
इस व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई है. 28 सितंबर को कोर्ट ने फिलहाल MDR पर रोक लगाने से इनकार किया और केंद्र सरकार, RBI तथा NPCI से जवाब मांगा है. सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि MDR टैक्स या सरकारी राजस्व के तौर पर वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है.
क्या हर UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज?
नहीं. नए नियम सभी UPI ट्रांजैक्शन पर लागू नहीं होंगे. P2P ट्रांसफर पूरी तरह निशुल्क रहेगा, जबकि 2,000 रुपये तक के P2M पेमेंट पर भी MDR नहीं लगेगा. नए नियम मुख्य रूप से तय पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होंगे.
इसके अलावा छोटे मर्चेंट्स के लिए भी छूट रखी गई है. QR के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक UPI कलेक्शन करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों को MDR से बाहर रखा गया है.
0.4% MDR का मतलब कितना चार्ज?
2,000 रुपये से ज्यादा के पात्र ट्रांजैक्शन पर MDR की दर 0.4% रखी गई है. उदाहरण के लिए 10,000 रुपये के पेमेंट पर MDR 40 रुपये होगा. हालांकि इसकी अधिकतम सीमा भी तय की गई है.
75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन रहेगा. यानी इससे ज्यादा रकम के पेमेंट पर भी सामान्य 0.4% के हिसाब से 300 रुपये से अधिक MDR नहीं लिया जाएगा.


यह पैसा सरकार को मिलेगा या नहीं?
MDR को सरकारी टैक्स या सेस की तरह नहीं माना गया है. यह पेमेंट इकोसिस्टम में काम करने वाले अलग-अलग संस्थानों के बीच बांटा जाने वाला शुल्क है. इसमें बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI ऐप से जुड़े हिस्सेदार शामिल हैं.
यही मुद्दा सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में भी उठा है, जहां कोर्ट ने सरकार और संबंधित संस्थाओं से इस शुल्क की प्रकृति और इससे होने वाली कमाई को लेकर जवाब मांगा है. मामले पर अंतिम कानूनी स्थिति अभी तय नहीं हुई है.
ग्राहकों की जेब पर क्या असर पड़ेगा?
मौजूदा नियमों के मुताबिक MDR मर्चेंट पर लागू होगा, ग्राहक पर सीधे नहीं. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस शुल्क को ग्राहकों से वसूलने की व्यवस्था नहीं है. P2P पेमेंट भी पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेगा.
कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था
कुछ कैटेगरी में सामान्य 0.4% MDR के बजाय अलग फ्लैट चार्ज तय किया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक रेलवे, फ्यूल और टेलीकॉम जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़े पात्र ट्रांजैक्शन में 5 रुपये का फ्लैट MDR लागू होगा.
इसलिए 15 अक्टूबर से UPI पूरी तरह पेड सिस्टम नहीं बनने जा रहा है. आम लोगों के P2P ट्रांसफर और छोटे मूल्य के पेमेंट जारी रहेंगे, जबकि कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR की नई व्यवस्था लागू होगी.
 

Share this story

Tags