Samachar Nama
×

आज का सोना-चांदी का भाव: क्यों थमी सोने की चाल और चांदी पर क्यों बढ़ा दबाव? समझें अमेरिकी डॉलर का खेल!

आज का सोना-चांदी का भाव: क्यों थमी सोने की चाल और चांदी पर क्यों बढ़ा दबाव? समझें अमेरिकी डॉलर का खेल!

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मंगलवार को ज्यादा हलचल नहीं दिखाई दी, जबकि चांदी के भाव में मामूली गिरावट दर्ज की गई। निवेशक अमेरिका में ब्याज दरों की दिशा को लेकर नए संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी तरफ मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची US Treasury Yield ने कीमती धातुओं की तेजी पर दबाव बनाया हुआ है।हालांकि, हाल के उतार-चढ़ाव के बाद सोने की कीमत में ठहराव भी नजर आ रहा है। बाजार की नजर अब अमेरिका के आगामी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के संकेतों पर है।

COMEX पर सोना-चांदी का क्या भाव?

6 अक्टूबर के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, COMEX पर गोल्ड फ्यूचर्स करीब $4,159.40 प्रति औंस पर कारोबार कर रहे थे। इसमें करीब $2.60 यानी 0.06% की तेजी रही।

वहीं सिल्वर फ्यूचर्स करीब $61.10 प्रति औंस पर रहे। चांदी में लगभग $0.20 यानी 0.33% की गिरावट दर्ज की गई।

स्पॉट गोल्ड की कीमत भी लगभग स्थिर रही और यह करीब $4,141.31 प्रति औंस के आसपास रही।

यानी हाल की तेजी और गिरावट के बाद फिलहाल सोने में एक तरह का ठहराव देखने को मिल रहा है, जबकि चांदी पर थोड़ा ज्यादा दबाव नजर आया।

सोने-चांदी की कीमतों पर क्यों है दबाव?

कीमती धातुओं के लिए इस समय सबसे महत्वपूर्ण संकेत अमेरिका से आ रहे हैं। खासतौर पर US Treasury Yield, डॉलर और Federal Reserve की ब्याज दर नीति बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो सोने जैसे ऐसे निवेश जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता, उन्हें रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है। इससे निवेशकों का एक हिस्सा बॉन्ड जैसे ब्याज देने वाले विकल्पों की ओर आकर्षित हो सकता है।

इसके अलावा मजबूत डॉलर भी सोने और चांदी के लिए दबाव बढ़ा सकता है। डॉलर में कीमत तय होने के कारण अन्य मुद्राओं में खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए कीमती धातुएं महंगी हो जाती हैं।

कमजोर जॉब्स डेटा से सोने को मिली थोड़ी राहत

अमेरिका के अपेक्षा से कमजोर रोजगार आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित किया है।

अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कमजोरी के संकेत बढ़ते हैं, तो बाजार फेड की भविष्य की नीति को ज्यादा नरम मान सकता है। ऐसी स्थिति में सोने को सपोर्ट मिल सकता है।

इसी वजह से निवेशक अमेरिका के आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर खास नजर बनाए हुए हैं।

महंगाई और सरकारी कर्ज भी बड़ा फैक्टर

अमेरिका में महंगाई और सरकारी कर्ज को लेकर चिंता के बीच Treasury Yield ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।

महंगाई के खिलाफ फेड की नीति, सरकारी बॉन्ड की यील्ड और अमेरिकी डॉलर की दिशा—इन तीनों का असर आने वाले दिनों में सोने और चांदी पर देखने को मिल सकता है।

इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण हैं। तेल महंगा होने पर महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हो सकती है, जिससे केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति प्रभावित हो सकती है।

Gold Price: आगे सोने का क्या होगा?

रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी के मुताबिक, हाल की कमजोरी के पीछे मजबूत डॉलर, ऊंची Treasury Yield और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर चिंता प्रमुख कारण हैं।

उन्होंने सोने के लिए करीब $4,110 प्रति औंस को अहम सपोर्ट बताया है। इसके नीचे करीब $4,000 प्रति औंस का मनोवैज्ञानिक स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अगर सोना इन स्तरों के ऊपर मजबूती बनाए रखता है, तो बाजार में दोबारा खरीदारी लौट सकती है। वहीं सपोर्ट टूटने पर और कमजोरी का जोखिम बना रह सकता है।

त्योहारों से घरेलू सोने की मांग को मिल सकता है सपोर्ट

आने वाले दिनों में भारत का फेस्टिव सीजन भी सोने की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

मोनार्क PMS के असिस्टेंट फंड मैनेजर ध्रुव जोगलेकर के मुताबिक, अक्टूबर में सोने को सपोर्ट मिल सकता है। इसकी एक वजह त्योहारों के दौरान भारत में फिजिकल गोल्ड की मांग बढ़ने की संभावना है।

इसके अलावा केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी भी सोने के लिए एक सकारात्मक फैक्टर बनी हुई है।

हालांकि, बाजार की दिशा तय करने में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और महंगाई के आउटलुक की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।

भारत में सोने-चांदी का क्या भाव रहा?

घरेलू बाजार में सोमवार यानी 5 अक्टूबर को 99.9% शुद्धता वाले सोने की कीमत में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ।

नई दिल्ली में टैक्स सहित सोने का भाव करीब ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रहा।

वहीं चांदी की कीमत करीब ₹2.27 लाख प्रति किलोग्राम पर बनी रही।

घरेलू बाजार में ज्वेलर्स और रिटेल ग्राहकों की मांग सीमित रहने के कारण कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं आया।

मंगलवार को घरेलू कीमतों पर किन चीजों का असर होगा?

6 अक्टूबर को भारत में सोने और चांदी के भाव मुख्य रूप से इन फैक्टर्स से प्रभावित हो सकते हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में Gold और Silver की चाल

  • अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी

  • रुपये और डॉलर का एक्सचेंज रेट

  • US Treasury Yield

  • Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें

  • भारत में फेस्टिव सीजन की मांग

  • ज्वेलर्स और रिटेल बाजार की खरीदारी

  • कच्चे तेल की कीमतें

  • वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम

यानी घरेलू बाजार में सोने का भाव केवल अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्भर नहीं करता। डॉलर-रुपया विनिमय दर और स्थानीय मांग भी इसकी कीमत को प्रभावित करती है।

RBI की बैठक पर भी नजर

बाजार की नजर 7 अक्टूबर के RBI मॉनेटरी पॉलिसी फैसले पर भी है। RBI के ब्याज दरों से जुड़े फैसले का असर रुपये, बॉन्ड यील्ड और व्यापक निवेश सेंटीमेंट पर पड़ सकता है।

अगर रुपये में ज्यादा कमजोरी या मजबूती आती है, तो उसका असर घरेलू सोने की कीमत पर भी पड़ सकता है।

Gold Price Outlook: अभी निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

फिलहाल सोने में तेजी के बाद कुछ ठहराव दिखाई दे रहा है। एक तरफ मजबूत डॉलर और ऊंची Treasury Yield दबाव बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, फेस्टिव डिमांड और वैश्विक अनिश्चितता सोने को सपोर्ट देने वाले फैक्टर हैं।इसलिए आने वाले दिनों में US आर्थिक आंकड़े, Fed की नीति, डॉलर इंडेक्स और RBI का फैसला सोने की दिशा के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे।

निष्कर्ष

अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिलहाल सोना लगभग स्थिर है, जबकि चांदी में मामूली कमजोरी देखने को मिली है। मजबूत डॉलर और ऊंची अमेरिकी Treasury Yield की वजह से कीमती धातुओं पर दबाव है, लेकिन कमजोर अमेरिकी रोजगार संकेत, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और भारत का फेस्टिव सीजन सोने को सहारा दे सकते हैं।सोने के लिए $4,110 प्रति औंस अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि $4,000 का स्तर एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक सपोर्ट है। घरेलू बाजार में आगे की चाल अंतरराष्ट्रीय भाव के साथ-साथ रुपये की चाल और फिजिकल डिमांड पर भी निर्भर करेगी।

Share this story

Tags