नई कार खरीदने वालों की बढ़ेगी जेब पर मार! सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इंश्योरेंस को लेकर बदले नियम
अगर आप जल्द ही नई कार या बाइक खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए इंश्योरेंस से जुड़ी यह खबर बेहद अहम है। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क पर बिना वैध बीमा के चल रहे वाहनों और सड़क हादसों के पीड़ितों को समय पर मुआवजा न मिलने की समस्या को गंभीरता से लेते हुए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस को लेकर बड़ा निर्देश दिया है। नए वाहन खरीदने वालों को अब पहले की तुलना में लंबी अवधि का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना पड़ सकता है, जिससे नई गाड़ी की ऑन-रोड कीमत पर भी असर पड़ सकता है।
कार और दोपहिया के इंश्योरेंस में क्या बदलाव?
फैसले के मुताबिक नई कार खरीदने पर 3 साल के बजाय 4 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कवर लेना अनिवार्य होगा। वहीं नए टू-व्हीलर के मामले में यह अवधि 5 साल से बढ़ाकर 6 साल की जा रही है।
इसका सीधा असर नई गाड़ी खरीदते समय चुकाई जाने वाली शुरुआती रकम पर पड़ेगा, क्योंकि अतिरिक्त एक साल के थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस का प्रीमियम भी ग्राहक को देना होगा।
बिना इंश्योरेंस चल रहे करोड़ों वाहन चिंता की वजह
सुप्रीम कोर्ट के सामने देश में बिना वैध इंश्योरेंस के चल रहे वाहनों की समस्या भी अहम रही। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 30 करोड़ से ज्यादा वाहन हैं और इनमें बड़ी संख्या में वाहनों के पास वैध बीमा नहीं है।
बिना बीमा वाला वाहन सड़क हादसे में शामिल होने पर पीड़ित या मृतक के परिवार के लिए मुआवजा हासिल करना मुश्किल बना सकता है। ऐसी परिस्थितियों में लोगों को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
अदालत ने माना कि सड़क हादसे के पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता मिलना बेहद जरूरी है और वाहन बीमा की व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
नई गाड़ी की ऑन-रोड कीमत क्यों बढ़ सकती है?
पहले नई कार खरीदते समय ग्राहक को निर्धारित अवधि का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना पड़ता था। अब इसमें एक साल की अतिरिक्त अवधि जुड़ने से शुरुआती इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ सकता है।
इसी तरह बाइक और स्कूटर खरीदने वालों को भी पहले की तुलना में एक साल अतिरिक्त थर्ड-पार्टी कवर का भुगतान करना होगा। हालांकि, यह बदलाव मुख्य रूप से नए वाहनों की खरीद से जुड़ा है। पहले से सड़क पर चल रही पुरानी गाड़ियों पर इसे उसी तरह लागू नहीं किया जाएगा।
कैमरों से पकड़े जाएंगे बिना बीमा वाले वाहन
बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों पर कार्रवाई को आसान बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है। नेशनल और स्टेट हाईवे पर लगाए जा रहे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन कैमरों को वाहन और इंश्योरेंस डेटाबेस से जोड़ने की व्यवस्था की जा रही है।
अगर कोई वाहन बिना वैध बीमा के सड़क पर चलता पाया जाता है, तो उसके नंबर के आधार पर कार्रवाई और ई-चालान की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। ट्रैफिक पुलिस भी आधुनिक उपकरणों की मदद से मौके पर ही वाहन के इंश्योरेंस की जानकारी जांच सकेगी।
बिना इंश्योरेंस वाहन को पेट्रोल-डीजल देने पर भी लग सकती है रोक
बिना बीमा वाले वाहनों पर लगाम कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों और बीमा नियामक से ऐसे पायलट प्रोजेक्ट पर विचार करने को कहा है, जिसमें बिना वैध इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से रोकने की संभावना देखी जा सकती है।
अगर ऐसी व्यवस्था लागू होती है तो वाहन मालिक को पहले इंश्योरेंस रिन्यू कराना होगा और उसके बाद ही ईंधन लेने की अनुमति मिल सकती है।
वाहन खरीदते समय इंश्योरेंस पर दें खास ध्यान
नई कार या बाइक खरीदते समय सिर्फ एक्स-शोरूम और ऑन-रोड कीमत ही नहीं, बल्कि इंश्योरेंस की अवधि और प्रीमियम को भी ध्यान से देखना जरूरी होगा। थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस सड़क हादसे में दूसरे पक्ष को होने वाले नुकसान के लिए कानूनी रूप से महत्वपूर्ण कवर है।
इसलिए नई गाड़ी खरीदने से पहले डीलर द्वारा दिए जा रहे इंश्योरेंस विकल्पों, प्रीमियम और कवर की अवधि को अच्छी तरह समझ लें। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम का उद्देश्य सिर्फ इंश्योरेंस की लागत बढ़ाना नहीं, बल्कि सड़क हादसों के पीड़ितों को समय पर मुआवजा सुनिश्चित करना और बिना बीमा वाहनों की संख्या कम करना है।

