UPI पेमेंट पर फीस को लेकर सरकार ने किया साफ, 2000 रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर नहीं लगेगा कोई चार्ज
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI के जरिए भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए सरकार ने सोमवार को बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि 2,000 रुपये तक के UPI पेमेंट पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर किसी भी तरह की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष फीस नहीं लगा सकते। इसके अलावा रुपे डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान को भी इस व्यवस्था के दायरे में रखा गया है।
सरकार का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब पिछले कुछ समय से UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाए जाने को लेकर चर्चाएं तेज थीं। खासकर 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतान पर संभावित चार्ज को लेकर कई तरह की अटकलें सामने आ रही थीं। वित्त मंत्रालय की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद फिलहाल 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान करने वाले यूजर्स को किसी नए शुल्क की चिंता नहीं करनी होगी।
दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत अगस्त में संसद से पारित हुए टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 से हुई। इस कानून के जरिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10ए में बदलाव किया गया। संशोधन के बाद केंद्र सरकार को यह तय करने का अधिकार मिला कि डिजिटल भुगतान के किन माध्यमों या ट्रांजैक्शन पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
कानून में हुए इस बदलाव के बाद डिजिटल पेमेंट को लेकर बाजार और यूजर्स के बीच कई तरह के सवाल उठने लगे थे। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर थी कि क्या सरकार भविष्य में 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने की अनुमति दे सकती है। इसी वजह से सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर भी UPI चार्ज को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
अब वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर किसी भी प्रकार का डायरेक्ट या इनडायरेक्ट शुल्क नहीं लगाया जा सकता। इसका मतलब है कि ग्राहक से सीधे चार्ज लेने के अलावा किसी अप्रत्यक्ष तरीके से भी इस तरह के भुगतान पर फीस नहीं वसूली जा सकती।
रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। इससे छोटे डिजिटल लेनदेन करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। देश में UPI का इस्तेमाल रोजमर्रा की खरीदारी, बिल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं और छोटे कारोबारों में बड़े स्तर पर किया जाता है।
UPI की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसका तेज, आसान और कम लागत वाला भुगतान सिस्टम होना है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारी और आम ग्राहक तक इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में शुल्क को लेकर किसी भी बदलाव का सीधा असर डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर पड़ सकता है।
फिलहाल वित्त मंत्रालय के स्पष्टीकरण से 2,000 रुपये तक के UPI पेमेंट पर चार्ज लगाए जाने की आशंका दूर हो गई है। हालांकि, 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन को लेकर आगे क्या व्यवस्था होगी, इसे लेकर लोगों की नजर सरकार की आगामी नीतियों और दिशा-निर्देशों पर बनी रहेगी।

