Tax Audit Deadline Alert: 30 सितंबर से पहले निपटा लें टैक्स ऑडिट की रिपोर्ट, चूक गए तो देना होगा ₹1.5 लाख का भारी जुर्माना
असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर 2026 अब बेहद करीब है। ऐसे कारोबारी, टैक्सपेयर्स और प्रोफेशनल्स जिनके लिए इनकम टैक्स नियमों के तहत अकाउंट्स का ऑडिट कराना जरूरी है, उन्हें समय रहते अपनी टैक्स ऑडिट रिपोर्ट तैयार कराकर जमा कर देनी चाहिए।
डेडलाइन तक रिपोर्ट दाखिल नहीं करने पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 271B के तहत पेनल्टी लग सकती है। यह पेनल्टी आम तौर पर कुल टर्नओवर या ग्रॉस रिसीट्स का 0.5 फीसदी या अधिकतम 1.5 लाख रुपये, जो भी कम हो, तक हो सकती है। हालांकि, उचित कारण होने पर कुछ परिस्थितियों में पेनल्टी से राहत के प्रावधान भी मौजूद हैं।
क्या 30 सितंबर की डेडलाइन बढ़ेगी?
टैक्स ऑडिट की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग कई चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और टैक्स प्रोफेशनल्स की ओर से की जा रही है। उनका कहना है कि ऑडिट, डेटा रिकंसिलिएशन और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन जैसे कामों में काफी समय लग रहा है।
कुछ प्रोफेशनल संगठनों ने डेडलाइन को 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की मांग भी की है। हालांकि, जब तक CBDT की ओर से डेडलाइन बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक अधिसूचना या घोषणा नहीं आती, तब तक मौजूदा 30 सितंबर की तारीख को ही अंतिम मानकर चलना सुरक्षित है।
इसलिए आखिरी समय में किसी घोषणा का इंतजार करने के बजाय टैक्स ऑडिट का काम समय पर पूरा करना बेहतर रहेगा।
आखिरी दिनों में पोर्टल पर बढ़ सकता है दबाव
टैक्स फाइलिंग की डेडलाइन नजदीक आते ही बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स और प्रोफेशनल्स एक साथ इनकम टैक्स पोर्टल का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में आखिरी दिनों में पोर्टल पर ट्रैफिक बढ़ने से तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
OTP में देरी, डॉक्यूमेंट अपलोड होने में परेशानी या सर्वर स्लो होने जैसी समस्याएं फाइलिंग को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए अगर आपका टैक्स ऑडिट होना है, तो आखिरी एक-दो दिन का इंतजार करने के बजाय CA के साथ मिलकर प्रक्रिया पहले ही पूरी कर लेना बेहतर है।
Tax Audit और ITR की डेडलाइन अलग-अलग है
कई टैक्सपेयर्स को टैक्स ऑडिट और ITR की तारीख को लेकर भ्रम रहता है। दोनों की डेडलाइन अलग है।
ऑडिट वाले टैक्सपेयर्स के लिए:
- टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की डेडलाइन — 30 सितंबर 2026
- संबंधित ITR दाखिल करने की डेडलाइन — 31 अक्टूबर 2026
यानी सिर्फ ऑडिट रिपोर्ट जमा करना ही पर्याप्त नहीं है। रिपोर्ट जमा होने के बाद टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स पोर्टल पर जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। रिपोर्ट को स्वीकार करना और जहां लागू हो वहां CA का UDIN अपडेट होना भी सुनिश्चित करना चाहिए।
रिपोर्ट फाइल करने से पहले इन 5 चीजों को जरूर चेक करें
1. TDS और TCS का मिलान करें
Form 26AS, AIS और TIS में दिखाई दे रहे TDS और TCS क्रेडिट को अपने रिकॉर्ड से जरूर मिलाएं। टर्नओवर और टैक्स क्रेडिट में अंतर है तो ITR दाखिल करने से पहले उसे जांच लें।
2. टैक्स में जोड़े जाने वाले खर्चों की जांच करें
ऐसे खर्चों को ध्यान से चेक करें जिन्हें टैक्स कैलकुलेशन के दौरान वापस आय में जोड़ा जाना पड़ सकता है। TDS से जुड़ी गलतियां, निर्धारित सीमा से ज्यादा कैश पेमेंट और MSME से जुड़े भुगतान जैसी जानकारी की सही रिपोर्टिंग जरूरी है।
3. पुराने लॉस और डेप्रिसिएशन का मिलान करें
पिछले वर्षों से आगे लाए गए बिजनेस लॉस और अनएब्जॉर्ब्ड डेप्रिसिएशन की रकम पुराने रिकॉर्ड से मिलाएं। आंकड़ों में गलती होने पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट और ITR में अंतर आ सकता है।
4. टर्नओवर का क्रॉस-चेक करें
बिजनेस के टर्नओवर को GST रिटर्न, 26AS और AIS/TIS जैसे रिकॉर्ड से मिलाना जरूरी है। साथ ही बिजनेस कोड, HSN/SAC और लोन-डिपॉजिट से जुड़ी रिपोर्टिंग भी सही तरीके से चेक करें।
5. महत्वपूर्ण क्लॉज की जानकारी जांचें
टैक्स ऑडिट रिपोर्ट में MSME और Section 43B(h) से जुड़ी जानकारी, लोन और डिपॉजिट की डिटेल तथा जहां लागू हो वहां शेयर बायबैक से संबंधित रिपोर्टिंग को ध्यान से देखें। GST, PF और ESI जैसे भुगतान की तारीखों की भी सही जांच करें।
UDIN और रिपोर्ट एक्सेप्ट करना न भूलें
CA की ओर से रिपोर्ट अपलोड किए जाने के बाद टैक्सपेयर्स की ओर से पोर्टल पर आवश्यक कार्रवाई करना भी महत्वपूर्ण है। जहां लागू हो, UDIN अपडेट होना और रिपोर्ट को टैक्सपेयर्स की ओर से स्वीकार किया जाना सुनिश्चित करें।
सिर्फ यह मान लेना कि CA ने रिपोर्ट अपलोड कर दी है, पर्याप्त नहीं हो सकता। इसलिए फाइलिंग पूरी होने के बाद पोर्टल पर स्टेटस जरूर चेक करें।
गलती होने पर क्या रिवाइज्ड रिपोर्ट दाखिल हो सकती है?
अगर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने के बाद कोई वास्तविक गलती सामने आती है, तो लागू नियमों के तहत रिवाइज्ड रिपोर्ट दाखिल करने का विकल्प हो सकता है। उदाहरण के तौर पर कुछ क्लेरिकल गलतियां, नाम-पता संबंधी सुधार, UDIN से जुड़ी समस्या या छूटे हुए बैंक अकाउंट की जानकारी जैसी वास्तविक त्रुटियों को नियमों के अनुसार ठीक किया जा सकता है।
लेकिन रिवाइज्ड रिपोर्ट का इस्तेमाल मनमाने तरीके से बड़े बदलाव करने के लिए नहीं किया जा सकता। इसलिए किसी महत्वपूर्ण बदलाव की जरूरत हो तो CA या टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी है।
अब क्या करें?
अगर आप टैक्स ऑडिट के दायरे में आते हैं, तो 30 सितंबर 2026 की डेडलाइन को ध्यान में रखते हुए अभी से अपनी फाइलिंग पूरी करने की तैयारी करें। सभी अकाउंटिंग रिकॉर्ड, GST डेटा, TDS/TCS रिकॉर्ड, पुराने टैक्स रिकॉर्ड और जरूरी डॉक्यूमेंट CA को उपलब्ध करा दें।
सबसे जरूरी बात यह है कि आखिरी तारीख बढ़ने की उम्मीद में फाइलिंग को टालने के बजाय मौजूदा डेडलाइन के हिसाब से काम पूरा करें। समय पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने से आखिरी वक्त की तकनीकी परेशानियों और संभावित पेनल्टी के जोखिम को कम किया जा सकता है।

