Sugarcane Price: तमिलनाडु के गन्ना किसानों को बड़ा तोहफा, अब प्रति टन मिलेंगे 4,000 रुपये; सरकार ने मंजूर किए 603 करोड़
तमिलनाडु के गन्ना किसानों को दिवाली से पहले आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने 2025-26 के पेराई सीजन के लिए किसानों को 709.50 रुपये प्रति टन अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए 603.34 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इस राशि के मिलने के बाद पात्र किसानों को केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) समेत कुल 4,000 रुपये प्रति टन मिलेंगे।
FRP और प्रोत्साहन राशि मिलाकर बनेंगे 4,000 रुपये
केंद्र सरकार ने 2025-26 के पेराई सीजन के लिए गन्ने का FRP 3,290.50 रुपये प्रति टन तय किया है। इसके अलावा तमिलनाडु सरकार किसानों को 709.50 रुपये प्रति टन अतिरिक्त प्रोत्साहन देगी। दोनों रकम मिलाकर किसानों को कुल 4,000 रुपये प्रति टन मिलेंगे।
राज्य सरकार ने इस बार प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी की है। इससे पहले डीएमके सरकार के कार्यकाल में किसानों को 349 रुपये प्रति टन अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाता था।
करीब 9 हजार किसानों को मिलेगा लाभ
सरकार के इस फैसले से 2025-26 के पेराई सीजन में गन्ना बेचने वाले करीब 9 हजार पंजीकृत किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इस सीजन में तमिलनाडु की 29 चीनी मिलों में गन्ने की पेराई हुई। इनमें 12 सहकारी, 2 सरकारी और करीब 15 निजी चीनी मिलें शामिल थीं।
इस दौरान राज्य में चीनी की औसत रिकवरी लगभग 9 प्रतिशत रही। रिकवरी का मतलब है कि एक निश्चित मात्रा में गन्ने से कितनी चीनी तैयार होती है। धर्मपुरी की सुब्रमणिया शिवा सहकारी चीनी मिल में सबसे अधिक रिकवरी दर्ज की गई।
क्या होता है गन्ने का FRP?
FRP यानी उचित एवं लाभकारी मूल्य वह न्यूनतम कीमत है, जो चीनी मिलों को किसानों से खरीदे गए गन्ने के बदले चुकानी होती है। केंद्र सरकार हर पेराई सीजन से पहले इसे निर्धारित करती है। इसके लिए कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों और गन्ने की उत्पादन लागत समेत कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। गन्ने से चीनी की रिकवरी के आधार पर भी FRP तय करने में भूमिका होती है।
दिवाली से पहले भुगतान की मांग
किसान संगठनों ने राज्य सरकार से अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दिवाली से पहले किसानों के बैंक खातों में भेजने की मांग की है। किसानों का कहना है कि इस साल कम बारिश के कारण उन्हें आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में त्योहार से पहले रकम मिलने से खेती से जुड़े खर्चों और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
अब किसानों की नजर सरकार पर है कि मंजूर किए गए 603.34 करोड़ रुपये कब तक उनके खातों में पहुंचाए जाते हैं।

