Stock Market: सेंसेक्स 1,500 अंक उछला, निफ्टी 24,400 के पार; ट्रम्प की पार्टी की हार से बाजार में छठे दिन तेजी
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगने के बाद गुरुवार, 5 नवंबर को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 1,500 अंक (1.90%) चढ़कर 78,800 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी में 400 अंकों से ज्यादा की तेजी रही और यह 24,400 के पार कारोबार करता नजर आया।
शेयर बाजार में लगातार छठे कारोबारी सत्र में बढ़त जारी रही। 28 अक्टूबर को सेंसेक्स 73,246 के स्तर पर था, जो 5 नवंबर को बढ़कर करीब 79,000 तक पहुंच गया। इस दौरान सेंसेक्स में करीब 5,700 अंकों की तेजी आई।
इस साल की बड़ी तेजी में शामिल हुई बाजार की बढ़त
इससे पहले 15 अक्टूबर को सेंसेक्स 1,533 अंक चढ़कर बंद हुआ था। वहीं, 8 अप्रैल को इसमें 2,946 अंकों की तेजी दर्ज की गई थी, जो इस साल की सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त बताई गई है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को सहारा
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को हुए नुकसान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। माना जा रहा है कि चुनावी नतीजों से ट्रम्प पर अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष खत्म करने का दबाव बढ़ सकता है।
इस बीच ब्रेंट क्रूड करीब 94 डॉलर और अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एविएशन सेक्टर को राहत मिलने की उम्मीद है। इसी वजह से इंडिगो के शेयर बाजार के टॉप गेनर्स में शामिल रहे।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
गुरुवार को एशियाई बाजारों में अलग-अलग रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.70% और जापान का निक्केई 0.44% गिरा, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग 3.33% चढ़ा।
अमेरिकी बाजार में भी रही तेजी
4 नवंबर को अमेरिकी शेयर बाजार में भी मजबूती दर्ज की गई। डाउ जोन्स 3.03%, नैस्डैक 1.44% और S&P 500 में 1.58% की बढ़त रही।
विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में खरीदे ₹20,834 करोड़ के शेयर
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) ने पिछले सात दिनों में भारतीय शेयर बाजार में 20,834 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने इसी अवधि में 8,601 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की।
बाजार की तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत अहम कारण माने जा रहे हैं।

