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Smart Investment Tips: शेयर बाजार गिर रहा है तो न लें रिस्क, SBI की ये योजनाएं कराएंगी तगड़ी कमाई!

Smart Investment Tips: शेयर बाजार गिर रहा है तो न लें रिस्क, SBI की ये योजनाएं कराएंगी तगड़ी कमाई!

शेयर बाजार में जब गिरावट या करेक्शन का दौर चलता है, तो निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इस समय पैसा कहां लगाया जाए। खासकर उन लोगों के लिए यह फैसला मुश्किल हो जाता है, जिनका निवेश का नजरिया केवल 1 से 2 साल का है। बाजार में गिरावट देखकर कुछ निवेशक घबरा जाते हैं, जबकि कुछ लोग ज्यादा रिटर्न की उम्मीद में जल्दबाजी में जोखिम वाले स्मॉलकैप फंड्स में बड़ी रकम लगा देते हैं।हालांकि, कम अवधि के निवेश में केवल ज्यादा रिटर्न के पीछे भागना जोखिम भरा हो सकता है। 1-2 साल का लक्ष्य रखने वाले निवेशकों के लिए पूंजी की सुरक्षा और पोर्टफोलियो में विविधता ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। यही वजह है कि ऐसे समय में डायवर्सिफाइड एसेट एलोकेशन और हाइब्रिड फंड जैसी रणनीतियों पर विचार किया जा सकता है।

1-2 साल के निवेश में क्यों सावधानी जरूरी?

इक्विटी मार्केट में गिरावट के बाद रिकवरी कब और कितनी तेजी से आएगी, इसका अनुमान लगाना आसान नहीं है। किसी कंपनी या पूरे सेक्टर के शेयर सस्ते दिखने के बावजूद उनकी कीमतों में और गिरावट आ सकती है।

स्मॉलकैप शेयरों और स्मॉलकैप फंड्स में यह उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है। इसलिए अगर आपको 12 से 24 महीने के भीतर पैसे की जरूरत पड़ सकती है, तो पूरा पैसा किसी एक जोखिम वाली इक्विटी कैटेगरी में लगाना समझदारी नहीं माना जाता।

1. SBI Multi Asset Allocation Fund

कम से मध्यम जोखिम वाले निवेशकों के लिए Multi Asset Allocation कैटेगरी एक विकल्प हो सकती है। इस तरह के फंड आम तौर पर पैसा अलग-अलग एसेट क्लास जैसे इक्विटी, डेट और कमोडिटी/गोल्ड आदि में बांटकर निवेश करते हैं।

इसका सबसे बड़ा फायदा डायवर्सिफिकेशन है। अगर किसी एक एसेट क्लास में कमजोरी आती है, तो दूसरे एसेट से पोर्टफोलियो को कुछ संतुलन मिल सकता है।

हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि मल्टी-एसेट फंड भी बाजार से पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते और इनमें रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।

2. SBI Equity Hybrid Fund

जो निवेशक इक्विटी में कुछ हिस्सा रखना चाहते हैं लेकिन पूरा पैसा शेयर बाजार में लगाने का जोखिम नहीं लेना चाहते, उनके लिए Equity Hybrid Fund कैटेगरी पर विचार किया जा सकता है।

इन फंड्स में इक्विटी के साथ डेट इंस्ट्रूमेंट्स का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य पोर्टफोलियो को केवल शेयर बाजार की चाल पर निर्भर रहने से बचाना होता है।

अगर बाजार में गिरावट आती है तो डेट वाला हिस्सा कुछ स्थिरता दे सकता है, जबकि बाजार में तेजी आने पर इक्विटी हिस्सा संभावित ग्रोथ में योगदान कर सकता है।

लेकिन यहां भी 1-2 साल की अवधि को पूरी तरह सुरक्षित मानना सही नहीं होगा, क्योंकि इक्विटी एक्सपोजर होने के कारण वैल्यू में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

3. SBI Arbitrage Opportunities Fund

अगर निवेशक का लक्ष्य इक्विटी मार्केट में सीधे बड़ा जोखिम लेने के बजाय अपेक्षाकृत कम उतार-चढ़ाव वाला विकल्प तलाशना है, तो Arbitrage Fund कैटेगरी पर भी विचार किया जा सकता है।

ऐसे फंड कैश और फ्यूचर्स मार्केट के बीच उपलब्ध प्राइस डिफरेंस का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। इस वजह से इनका व्यवहार सामान्य इक्विटी फंड की तुलना में अलग होता है।

फिर भी इसे FD जैसा पूरी तरह सुरक्षित या “जीरो रिस्क” निवेश नहीं समझना चाहिए। म्यूचुअल फंड में रिटर्न बाजार की परिस्थितियों और फंड की रणनीति पर निर्भर करता है।

एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय STP का विकल्प

अगर आपके पास बड़ी रकम है और आप बाजार की गिरावट का फायदा उठाना चाहते हैं, तो पूरी रकम एक ही दिन इक्विटी फंड में लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश पर विचार किया जा सकता है।

इसके लिए STP यानी Systematic Transfer Plan का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें निवेशक पहले रकम को किसी उपयुक्त डेट/लिक्विड या अन्य फंड में रख सकता है और फिर तय अंतराल पर एक निश्चित रकम इक्विटी फंड में ट्रांसफर कर सकता है।

उदाहरण के तौर पर, कोई निवेशक अपनी पूरी रकम एक साथ बाजार में लगाने के बजाय 12 महीनों में धीरे-धीरे निवेश कर सकता है। इससे बाजार के अलग-अलग स्तरों पर खरीदारी होती है और गलत समय पर पूरी रकम लगाने का जोखिम कम हो सकता है।

हालांकि, STP भी नुकसान से बचने की गारंटी नहीं देता।

किन फंड्स में 1-2 साल के लिए ज्यादा सावधानी बरतें?

SBI Small Cap Fund

स्मॉलकैप फंड लंबी अवधि में ज्यादा ग्रोथ की संभावना दे सकते हैं, लेकिन इनके साथ उतार-चढ़ाव भी अधिक हो सकता है। इसलिए केवल 1-2 साल के लक्ष्य के लिए इनमें बड़ी रकम लगाना जोखिम भरा हो सकता है।

SBI Contra Fund

Contra फंड्स बाजार में अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय या विपरीत दिशा में चल रही कंपनियों/वैल्यूएशन में निवेश की रणनीति अपना सकते हैं। ऐसी रणनीति को काम करने में समय लग सकता है। इसलिए इनका आकलन केवल 12-24 महीने में करना उचित नहीं हो सकता।

SBI Focused Equity Fund

Focused Equity फंड सीमित संख्या में चुनी गई कंपनियों पर अपेक्षाकृत ज्यादा निर्भर हो सकते हैं। इससे पोर्टफोलियो में concentration risk बढ़ सकता है। ऐसे फंड आमतौर पर लंबी अवधि के निवेश नजरिए के साथ ज्यादा उपयुक्त माने जाते हैं।

1-2 साल के निवेश में सबसे जरूरी बात

अगर आपका लक्ष्य अगले 12 से 24 महीनों में पैसा इस्तेमाल करना है, तो सिर्फ इस उम्मीद में पूरा पैसा इक्विटी में लगाना कि बाजार जल्द ही तेजी से ऊपर जाएगा, जोखिम भरा फैसला हो सकता है।निवेशक को अपनी जरूरत, जोखिम लेने की क्षमता, आय, मौजूदा निवेश और पैसे की जरूरत की तारीख को ध्यान में रखकर एसेट एलोकेशन तय करना चाहिए।

म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिम के अधीन हैं। पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं है। किसी भी फंड में निवेश करने से पहले उसका पोर्टफोलियो, खर्च, जोखिम स्तर, एग्जिट लोड, टैक्स और अपनी निवेश अवधि जरूर जांचें।

निष्कर्ष

शेयर बाजार में गिरावट को केवल डर के रूप में देखने के बजाय इसे निवेश रणनीति की समीक्षा का मौका भी माना जा सकता है। लेकिन 1-2 साल की छोटी अवधि में आक्रामक स्मॉलकैप निवेश के बजाय डायवर्सिफाइड या हाइब्रिड रणनीति पर विचार करना ज्यादा संतुलित तरीका हो सकता है।वहीं, जिन निवेशकों के पास लंबी अवधि का नजरिया है, वे चरणबद्ध तरीके से इक्विटी में निवेश करने की रणनीति पर विचार कर सकते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि रिटर्न के लालच में अपनी जरूरत के पैसे को जरूरत से ज्यादा जोखिम में न डालें।

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