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क्या वोलेटाइल मार्केट में SIP बंद कर देनी चाहिए? जानें इस दौर में कैसे करें निवेश और किन फंड्स में दांव लगाना है समझदारी

क्या वोलेटाइल मार्केट में SIP बंद कर देनी चाहिए? जानें इस दौर में कैसे करें निवेश और किन फंड्स में दांव लगाना है समझदारी

शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों के सामने एक बड़ा सवाल है—नई SIP किस फंड में शुरू की जाए? क्या बाजार में गिरावट का फायदा उठाकर Mid-Cap और Small-Cap फंड्स में निवेश बढ़ाना चाहिए या फिर Flexi-Cap और Index Funds जैसे विकल्पों के साथ शुरुआत करना बेहतर हो सकता है?SIP यानी Systematic Investment Plan के जरिए निवेशक हर महीने एक निश्चित रकम म्यूचुअल फंड में लगाते हैं। इससे बाजार के अलग-अलग स्तरों पर यूनिट खरीदने का मौका मिलता है। इसे रुपये की लागत का औसत यानी Rupee Cost Averaging कहा जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि SIP में नुकसान नहीं हो सकता या हर गिरावट के बाद बाजार जरूर ऊपर जाएगा।

Small-Cap और Large-Cap फंड्स के रिटर्न में कितना अंतर?

दिए गए Value Research के आंकड़ों के अनुसार, संबंधित एक साल की अवधि में Small-Cap फंड्स ने करीब 9.61% रिटर्न दिया, जबकि Large-Cap फंड्स में लगभग 5.74% की गिरावट दर्ज की गई।इन आंकड़ों से दोनों कैटेगरी के प्रदर्शन में अंतर जरूर दिखाई देता है, लेकिन सिर्फ पिछले एक साल का रिटर्न देखकर निवेश का फैसला करना सही रणनीति नहीं है। म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन बाजार की परिस्थितियों के साथ बदलता रहता है और पिछला रिटर्न भविष्य के मुनाफे की गारंटी नहीं देता।

क्या अभी Mid-Cap और Small-Cap फंड्स में SIP शुरू करनी चाहिए?

Mid-Cap और Small-Cap कंपनियों में भविष्य में तेजी से बढ़ने की क्षमता हो सकती है, लेकिन इनके शेयरों में उतार-चढ़ाव भी ज्यादा हो सकता है। इसलिए इन फंड्स में निवेश करने से पहले अपने जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को समझना जरूरी है।

Trust Mutual Fund के CEO संदीप बगला के विचारों के मुताबिक, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए Mid-Cap और Small-Cap फंड्स पर विचार किया जा सकता है। नियमित SIP से अलग-अलग बाजार स्तरों पर निवेश करने का अवसर मिलता है।वहीं, Godrej Wealth के संदीप झा ने Small-Cap फंड्स में सावधानी बरतने की बात कही है। उनके मुताबिक, बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ कंपनियों का मूल्यांकन महंगा हो सकता है। कमाई की संभावनाओं और शेयरों की लिक्विडिटी को लेकर भी जोखिम बने रह सकते हैं।Stocktick Capital के संस्थापक विजय माहेश्वरी की राय भी यही है कि केवल बाजार गिरने की वजह से Small-Cap और Mid-Cap में ज्यादा पैसा नहीं लगाना चाहिए। इन कैटेगरी में निवेश सीमित और सोच-समझकर करना बेहतर हो सकता है।

नए निवेशकों के लिए Flexi-Cap और Index Funds क्यों हैं विकल्प?

अगर आप पहली बार SIP शुरू कर रहे हैं, तो आपके लिए ऐसे फंड्स पर विचार करना उपयोगी हो सकता है जिनमें निवेश किसी एक छोटे बाजार सेगमेंट तक सीमित न हो।

Flexi-Cap Funds: इन फंड्स के मैनेजर बाजार की परिस्थितियों और उपलब्ध अवसरों के अनुसार Large-Cap, Mid-Cap और Small-Cap कंपनियों में निवेश का अनुपात बदल सकते हैं। हालांकि, इनका जोखिम फंड की रणनीति और उसके वास्तविक निवेश पर निर्भर करता है।

Large-Cap Index Funds: ये किसी प्रमुख शेयर बाजार इंडेक्स को ट्रैक करते हैं। इनका पोर्टफोलियो आमतौर पर बड़ी कंपनियों पर केंद्रित होता है। इनसे बाजार के जोखिम खत्म नहीं होते, लेकिन निवेशक को एक ही कंपनी पर निर्भर रहने के बजाय कई कंपनियों में एक्सपोजर मिलता है।

Multi-Cap Funds: इन फंड्स में अलग-अलग मार्केट कैप वाली कंपनियों में निवेश किया जाता है। हालांकि, इनमें Mid-Cap और Small-Cap का एक्सपोजर भी होने के कारण जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।

Balanced Advantage Funds: ये बाजार की परिस्थितियों के अनुसार इक्विटी और डेट निवेश का अनुपात बदल सकते हैं। इससे पोर्टफोलियो के जोखिम को संभालने में मदद मिल सकती है, लेकिन इनमें भी नुकसान की संभावना रहती है।Wise Finserv के ग्रुप CEO अजय कुमार यादव ने Flexi-Cap Funds को प्राथमिकता देने की बात कही है। वहीं, विजय माहेश्वरी ने Large-Cap Index Funds, Flexi-Cap Funds और Balanced Advantage Funds पर विचार करने का सुझाव दिया है।

5, 7 और 10 साल की SIP के लिए क्या हो सकती है रणनीति?

निवेश का समय यानी Time Horizon फंड चुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, केवल अवधि के आधार पर सही फंड तय नहीं किया जा सकता। आपके लक्ष्य, पैसों की जरूरत और जोखिम उठाने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी हैं।

  • 5 साल के लिए: अगर तय समय पर पैसे की जरूरत है, तो केवल इक्विटी फंड्स पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। Multi-Asset या Hybrid Funds पर विचार किया जा सकता है। लक्ष्य नजदीक आने पर जोखिम कम करना भी जरूरी हो सकता है।

  • 7 साल के लिए: Flexi-Cap Fund या व्यापक बाजार इंडेक्स पर आधारित फंड विकल्प हो सकते हैं। लेकिन निवेशक को बीच में बड़ी गिरावट सहने की क्षमता रखनी चाहिए।

  • 10 साल या उससे अधिक के लिए: Diversified Equity Funds के साथ लंबी अवधि का निवेश किया जा सकता है। जोखिम क्षमता और अनुभव के आधार पर सीमित Mid-Cap या Small-Cap एक्सपोजर पर भी विचार किया जा सकता है।

ध्यान रखें कि इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में पांच या दस साल तक निवेश करने के बाद भी मुनाफे की गारंटी नहीं होती।

₹2,000 से ₹5,000 की SIP में कितने फंड्स चुनें?

अगर आप हर महीने ₹2,000 से ₹5,000 निवेश करना चाहते हैं, तो शुरुआत में कई फंड्स खरीदना जरूरी नहीं है। चार-पांच स्कीमों में पैसा बांटने से पोर्टफोलियो अपने आप ज्यादा सुरक्षित या बेहतर डाइवर्सिफाइड नहीं हो जाता।कई फंड्स के पास एक जैसी कंपनियों के शेयर हो सकते हैं। इसे Portfolio Overlap कहा जाता है। इसलिए फंड्स की संख्या बढ़ाने के बजाय यह देखना जरूरी है कि हर फंड आपके निवेश लक्ष्य में अलग भूमिका निभा रहा है या नहीं।शुरुआती निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार एक व्यापक बाजार Index Fund या Flexi-Cap Fund से शुरुआत करने पर विचार कर सकते हैं। अतिरिक्त फंड तभी जोड़ें, जब उसका स्पष्ट उद्देश्य हो और वह आपके जोखिम स्तर के अनुकूल हो।

SIP शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

  • पहले तय करें कि निवेश किस लक्ष्य के लिए कर रहे हैं।

  • अपनी आपातकालीन जरूरतों के लिए पर्याप्त रकम अलग रखें।

  • केवल हालिया रिटर्न देखकर किसी फंड का चुनाव न करें।

  • बाजार गिरने पर घबराकर जल्दबाजी में SIP बंद करने से बचें, लेकिन अपनी आर्थिक स्थिति और जोखिम की समीक्षा जरूर करें।

  • फंड का खर्च अनुपात, निवेश रणनीति, जोखिम स्तर और पोर्टफोलियो देखें।

  • जरूरत पड़ने पर SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें।

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