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त्योहारी सीजन में झटका! अक्टूबर से महंगी होने वाली हैं ये चीजें, एक्सपर्ट्स ने बताई 4 बड़ी वजहें

त्योहारी सीजन में झटका! अक्टूबर से महंगी होने वाली हैं ये चीजें, एक्सपर्ट्स ने बताई 4 बड़ी वजहें

भारत में महंगाई एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही है। अगस्त 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 फीसदी थी। यानी एक महीने में महंगाई दर में 0.37 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में खाद्य महंगाई भी बढ़कर 5.95 फीसदी पहुंच गई।

महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा असर आम लोगों के रोजमर्रा के बजट पर पड़ता है। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के साथ परिवारों का मासिक खर्च बढ़ सकता है। इसके अलावा पेट्रोलियम और दूसरी इनपुट लागत में बदलाव का असर परिवहन, लॉजिस्टिक्स और कई दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमत बनी बड़ी चिंता

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया तेजी भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। सितंबर के आखिरी दिनों में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा और 29 सितंबर को करीब 107 डॉलर तक पहुंच गया। इससे रुपये और आयात लागत पर भी दबाव बढ़ा है।

अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है, तो इसका असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहता। परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से कई वस्तुओं की कीमतों पर अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है।

रुपये की कमजोरी भी बढ़ा सकती है दबाव

सितंबर के अंत में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर के आसपास पहुंच गया। 29 सितंबर को रुपया 96.1450 प्रति डॉलर तक कमजोर हुआ था। महंगा कच्चा तेल और वैश्विक बाजार की अनिश्चितता रुपये पर दबाव डालने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहे।

रुपया कमजोर होने पर आयात की लागत बढ़ सकती है। इसका असर खास तौर पर उन वस्तुओं और कच्चे माल पर पड़ता है जिनके लिए भारत विदेशी बाजार पर निर्भर है।

खाने-पीने की चीजों की कीमतें अहम कारण

अगस्त में खाद्य महंगाई 5.95 फीसदी रही, जो जुलाई के 5.52 फीसदी से ज्यादा है। यानी महंगाई में बढ़ोतरी के पीछे खाने-पीने की कीमतों की भूमिका अहम रही है।

अब आगे महंगाई की दिशा काफी हद तक खाद्य कीमतों, कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दाम, रुपये की चाल और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। अगर इन मोर्चों पर दबाव कम होता है तो महंगाई में राहत मिल सकती है, जबकि तेल और खाद्य कीमतों में तेजी जारी रहने पर घरेलू महंगाई पर दबाव बना रह सकता है।फिलहाल अगस्त के आंकड़े यह बताते हैं कि जुलाई के मुकाबले महंगाई में बढ़ोतरी हुई है और आम लोगों के लिए खाने-पीने की कीमतों पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

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