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SCSS Interest Rate: वरिष्ठ नागरिकों को 30 सितंबर का इंतजार, 8.2% ब्याज दर में बदलाव पर टिकी नजर
 

SCSS Interest Rate: वरिष्ठ नागरिकों को 30 सितंबर का इंतजार, 8.2% ब्याज दर में बदलाव पर टिकी नजर

वरिष्ठ नागरिकों के लिए पोस्ट ऑफिस की Senior Citizen Savings Scheme (SCSS) लंबे समय से नियमित ब्याज आय का एक विकल्प रही है। फिलहाल इस योजना पर 8.2% सालाना ब्याज मिल रहा है। अब निवेशकों की नजर सरकार की ओर से होने वाले अगले ऐलान पर है, क्योंकि 30 सितंबर को अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की घोषणा होनी है।
SCSS की ब्याज दर 1 अप्रैल 2023 से 8.2% पर बनी हुई है। ऐसे में अगर अगली तिमाही में भी इसमें बदलाव नहीं होता है तो यह लगातार 14वीं तिमाही होगी, जब दर 8.2% पर बरकरार रहेगी।
किस आधार पर तय होती है SCSS की ब्याज दर?
SCSS समेत छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर तय करने के लिए सरकार एक निर्धारित फॉर्मूले को आधार बनाती है। 2011 में श्यामला गोपीनाथ समिति ने छोटी बचत योजनाओं की दरों को बाजार से जोड़ने की सिफारिश की थी।
2016 से इन योजनाओं की ब्याज दरों की तिमाही समीक्षा की व्यवस्था लागू है। SCSS की दर का संबंध सरकारी प्रतिभूतियों यानी G-Sec की यील्ड से होता है।
नियम के मुताबिक SCSS के लिए 5 साल की सरकारी प्रतिभूतियों की यील्ड के ऊपर 100 बेसिस पॉइंट यानी 1% अतिरिक्त ब्याज का प्रावधान है। हालांकि, फॉर्मूले से निकलने वाली दर के बावजूद अंतिम दर का ऐलान सरकार ही करती है।


फॉर्मूले के हिसाब से क्या बनती है दर?
जुलाई-सितंबर 2026 की अवधि में 5-year G-Sec yield औसतन करीब 6.5% रहने का अनुमान बताया गया है। इसमें 1% जोड़ने पर फॉर्मूले के हिसाब से SCSS की दर करीब 7.5% बनती है।
यह मौजूदा 8.2% की दर से करीब 70 बेसिस पॉइंट कम है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि सरकार अगली तिमाही के लिए SCSS की ब्याज दर घटा ही देगी।
वहीं 10-year G-Sec yield हाल में करीब 7.1% के आसपास रही है। सरकारी बॉन्ड यील्ड में बदलाव छोटी बचत योजनाओं की दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकता है।
SCSS में कौन कर सकता है निवेश?
SCSS मुख्य रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाई गई बचत योजना है। सामान्य तौर पर 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग इसमें खाता खोल सकते हैं।
इसके अलावा कुछ शर्तों के तहत 55 वर्ष या उससे अधिक उम्र में रिटायर हुए सिविलियन कर्मचारी और 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के रक्षा कर्मचारी भी इस योजना में निवेश कर सकते हैं।
योजना में न्यूनतम ₹1,000 और अधिकतम ₹30 लाख तक निवेश किया जा सकता है। इसकी शुरुआती अवधि पांच साल होती है। पात्र पति-पत्नी अलग-अलग खाते खोलकर कुल ₹60 लाख तक निवेश कर सकते हैं।
मैच्योरिटी के बाद निर्धारित नियमों के तहत खाते को तीन साल की अवधि के लिए बढ़ाने का विकल्प भी मिलता है।
हर तीन महीने में मिलता है ब्याज
SCSS में ब्याज का भुगतान तिमाही आधार पर किया जाता है। ब्याज भुगतान की तारीखें आम तौर पर 1 अप्रैल, 1 जुलाई, 1 अक्टूबर और 1 जनवरी होती हैं।
इस वजह से नियमित आय चाहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह योजना एक विकल्प बनती है। हालांकि, ब्याज दर में बदलाव होने पर नए निवेश और आगे की आय की गणना प्रभावित हो सकती है।


टैक्स का भी रखें ध्यान
SCSS में किए गए निवेश पर पुराने टैक्स रिजीम के तहत Section 80C के अंतर्गत निर्धारित सीमा तक टैक्स डिडक्शन का लाभ मिल सकता है। हालांकि, योजना से मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है।
वरिष्ठ नागरिकों के मामले में एक वित्त वर्ष में SCSS से मिलने वाला ब्याज ₹50,000 से अधिक होने पर लागू नियमों के अनुसार TDS काटा जा सकता है।
30 सितंबर को साफ होगी नई दर
अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों का ऐलान 30 सितंबर को होना है। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि SCSS की मौजूदा 8.2% ब्याज दर बरकरार रहती है या इसमें कोई बदलाव किया जाता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य वित्तीय जानकारी के उद्देश्य से है। छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें और टैक्स नियम समय के साथ बदल सकते हैं। निवेश या टैक्स से जुड़ा फैसला लेने से पहले आधिकारिक जानकारी और योग्य वित्तीय सलाहकार की सलाह जरूर लें।
 

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