रुपया ऑल टाइम लो पर आया, एक्सक्लुसीव फुटेज में जानें 1 डॉलर की कीमत 95 रुपए 50 पैसे हुई, इससे महंगाई बढ़ने का खतरा
भारतीय मुद्रा बाजार में आज यानी 12 मई को बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 95.50 पर पहुंच गया। यह लगातार कमजोरी का संकेत है, जिससे आर्थिक बाजारों में चिंता बढ़ गई है।
गिरावट की वजह क्या रही?
विदेशी मुद्रा बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये में यह गिरावट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के कारण आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयान के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। ट्रम्प ने ईरान के साथ संघर्ष विराम को कमजोर बताया, जिससे भू-राजनीतिक तनाव फिर से बढ़ने की आशंका पैदा हो गई। इस बयान का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा, जो तेजी से ऊपर चली गईं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए तेल की बढ़ती कीमतें रुपये पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं।
पिछले दिनों का ट्रेंड
रुपया इससे पहले सोमवार को 95.31 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं, पिछले हफ्ते भी यह 95.43 के निचले स्तर तक गिर चुका था। इस तरह लगातार कमजोर होते ट्रेंड ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये पर दबाव केवल एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि यह एक लगातार चल रही प्रवृत्ति का हिस्सा है।
2026 में लगातार दबाव में रुपया
साल 2026 की शुरुआत से ही भारतीय रुपया दबाव में बना हुआ है। डॉलर के मुकाबले इसकी कमजोरी लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर को पार कर गया था, जो उस समय एक बड़ा मनोवैज्ञानिक स्तर माना गया था। इसके बाद से ही रुपये में उतार-चढ़ाव और गिरावट का सिलसिला जारी है।
वैश्विक कारणों का असर
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपये की कमजोरी के पीछे घरेलू कारणों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कारक भी जिम्मेदार हैं। इनमें कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, वैश्विक राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलर की मजबूती प्रमुख हैं।

