Rice Price Hike: चावल की कीमतों में 10% तक उछाल, उत्पादन घटने से भारत के निर्यात पर पड़ सकता है असर
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और मौसम में बदलाव के बीच भारत में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है। दाल और चीनी के बाद अब चावल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। घरेलू बाजार में चावल के औसत खुदरा दाम एक साल में करीब 10% बढ़ गए हैं। वहीं, उत्पादन में संभावित गिरावट से भारत के चावल निर्यात पर भी असर पड़ सकता है।
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अनुमान के मुताबिक, 2026-27 में भारत का चावल निर्यात करीब 4% घटकर 2.4 करोड़ टन रह सकता है। इसकी प्रमुख वजह उत्पादन में कमी और घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों को माना जा रहा है। भारत से चावल खरीदने वाले देशों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
कमजोर मानसून से घट सकता है चावल का उत्पादन
‘द फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मानसून और धान की खेती के रकबे में संभावित कमी से चावल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। भारत ने फसल वर्ष 2025-26 में करीब 15.4 करोड़ टन चावल का उत्पादन किया था, जिससे वह दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बना रहा।
हालांकि, USDA के अनुमान के मुताबिक, 2026-27 में भारत का चावल उत्पादन 4.5% घटकर लगभग 14.7 करोड़ टन रह सकता है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो 2015-16 के बाद पहली बार देश के सालाना चावल उत्पादन में गिरावट दर्ज हो सकती है।
खुदरा बाजार में चावल के दाम 46.92 रुपये प्रति किलो
उत्पादन घटने की आशंकाओं के बीच घरेलू बाजार में भी चावल महंगा हो रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रविवार को चावल की औसत खुदरा कीमत 46.92 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। यह एक साल पहले की तुलना में करीब 10% अधिक है।
सोना मसूरी, पोन्नी और स्वर्णा जैसी प्रीमियम नॉन-बासमती किस्मों के दाम भी पिछले एक साल में 10% से 25% तक बढ़ चुके हैं। इन कीमतों में बढ़ोतरी का असर आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
तमिलनाडु में 10 दिन में महंगा हुआ चावल
तमिलनाडु में भी चावल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। यहां 26 किलो सुपरफाइन चावल की बोरी का दाम 10 दिनों में 1,720 रुपये से बढ़कर 1,950 रुपये हो गया। यानी इसकी कीमत में 230 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
वहीं, साधारण फाइन चावल की 26 किलो की बोरी 1,500 रुपये से बढ़कर 1,640 रुपये की हो गई। इसमें 140 रुपये का इजाफा दर्ज किया गया।
निर्यात में कमी से दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है असर
भारत वैश्विक चावल व्यापार में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में अगर उत्पादन घटता है और घरेलू मांग के कारण बाजार में कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो निर्यात की मात्रा प्रभावित हो सकती है। इससे भारतीय चावल पर निर्भर आयातक देशों को भी वैकल्पिक आपूर्ति के इंतजाम करने पड़ सकते हैं।
हालांकि, निर्यात में वास्तविक गिरावट कितनी होगी और घरेलू बाजार में कीमतों का रुख क्या रहेगा, यह आने वाले समय में उत्पादन, मौसम और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

