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Retirement Planning: ₹1 करोड़ का फंड कितने साल चलेगा? खर्च और महंगाई के हिसाब से समझें पूरा हिसाब
 

Retirement Planning: ₹1 करोड़ का फंड कितने साल चलेगा? खर्च और महंगाई के हिसाब से समझें पूरा हिसाब

रिटायरमेंट के समय 1 करोड़ रुपये का फंड सुनने में काफी बड़ा अमाउंट लगता है। लेकिन नौकरी खत्म होने के बाद यही रकम कितने वर्षों तक आपका खर्च उठा पाएगी, इसका कोई तय जवाब नहीं है। रिटायरमेंट के बाद आपका मासिक खर्च, महंगाई और निवेश से मिलने वाला रिटर्न यह तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं कि फंड कितने समय तक चलेगा।
इसलिए रिटायरमेंट प्लान बनाते समय केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि आपके पास कितनी रकम जमा है। यह भी देखना जरूरी है कि आने वाले वर्षों में आपके खर्च कितने बढ़ सकते हैं।
30 हजार के खर्च पर 40 साल तक चल सकता है फंड
इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए रिटायरमेंट के समय आपके पास 1 करोड़ रुपये हैं और शुरुआती मासिक खर्च 30,000 रुपये है। अगर निवेश से औसतन 8% सालाना रिटर्न मिलता है और महंगाई करीब 6% रहती है, तो दिए गए अनुमान के मुताबिक यह फंड लगभग 40 साल तक चल सकता है।
वहीं अगर शुरुआती मासिक खर्च 40,000 रुपये हो जाता है तो यही फंड करीब 27 साल तक चल सकता है। 50,000 रुपये मासिक खर्च की स्थिति में फंड की अवधि करीब 20 साल रह सकती है।
ये केवल उदाहरण आधारित अनुमान हैं। वास्तविक अवधि निवेश के प्रदर्शन, निकासी की राशि और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर अलग हो सकती है।


महंगाई बदल सकती है पूरा गणित
रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे बड़ी चुनौती महंगाई भी हो सकती है। आज जो चीजें 40,000 रुपये महीने के खर्च में मिल रही हैं, जरूरी नहीं कि 10 साल बाद भी उतने ही पैसे में मिल जाएं।
अगर महंगाई दर औसतन 6% मानें तो आज का 40,000 रुपये का मासिक खर्च करीब 10 साल बाद बढ़कर लगभग 71,600 रुपये हो सकता है। इसलिए रिटायरमेंट फंड बनाते समय मौजूदा खर्च के साथ भविष्य के खर्च का अनुमान लगाना जरूरी है।
पूरा पैसा FD में रखना कितना सही?
रिटायरमेंट की रकम को केवल एक ही निवेश विकल्प में रखने से जोखिम पैदा हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर पूरा 1 करोड़ रुपये FD में रखा जाता है तो नियमित ब्याज आय मिल सकती है, लेकिन समय के साथ महंगाई बढ़ने पर उस ब्याज की वास्तविक क्रय शक्ति कम हो सकती है।
दूसरी ओर, पूरी रकम इक्विटी या शेयर बाजार जैसे बाजार-आधारित निवेशों में रखना भी जोखिम वाला हो सकता है। बाजार में गिरावट के दौरान अगर नियमित खर्च के लिए निवेश बेचने की जरूरत पड़ जाए तो नुकसान हो सकता है।
इसी वजह से रिटायरमेंट प्लानिंग में निवेश और निकासी की रणनीति को व्यक्ति की जरूरत, जोखिम क्षमता और समयावधि के हिसाब से तय करना जरूरी होता है।


4% निकासी नियम क्या है?
रिटायरमेंट प्लानिंग में 4% निकासी नियम का अक्सर उदाहरण दिया जाता है। इसके तहत पहले साल रिटायरमेंट कॉर्पस का करीब 4% निकालने का अनुमान लगाया जाता है और बाद के वर्षों में निकासी को महंगाई के हिसाब से बढ़ाया जाता है।
अगर आपके पास 1 करोड़ रुपये हैं तो इसका 4% यानी 4 लाख रुपये सालाना होता है। यह रकम करीब 33,300 रुपये प्रति माह के बराबर बैठती है।
हालांकि, इसे गारंटीड फॉर्मूला नहीं समझना चाहिए। वास्तविक रिटायरमेंट अवधि, बाजार का रिटर्न, महंगाई, टैक्स और व्यक्ति की जरूरतों के कारण परिणाम अलग हो सकते हैं।
तो क्या ₹1 करोड़ पूरी जिंदगी के लिए काफी है?
इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए अलग होगा। किसी व्यक्ति के लिए 1 करोड़ रुपये कई दशकों तक पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि अधिक मासिक खर्च वाले व्यक्ति के लिए यही रकम काफी कम समय में खत्म हो सकती है।
इसलिए रिटायरमेंट फंड तय करते समय तीन चीजों पर खास ध्यान देना चाहिए—मासिक खर्च, भविष्य की महंगाई और निवेश से संभावित रिटर्न। इसके अलावा मेडिकल खर्च, टैक्स, बड़े आकस्मिक खर्च और जीवन प्रत्याशा जैसे पहलुओं को भी योजना में शामिल करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य वित्तीय जागरूकता के उद्देश्य से है। वास्तविक रिटायरमेंट प्लानिंग व्यक्ति की आय, खर्च, निवेश, जोखिम क्षमता और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करती है। निवेश से जुड़े निर्णय लेने से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना उचित है।
 

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