Power Crisis: रिकॉर्ड बिजली डिमांड से बढ़ी परेशानी, महंगी बिजली के बीच कोयले का स्टॉक भी घटा
देश में बिजली की बढ़ती मांग के बीच पावर सेक्टर पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। बिजली की खपत बढ़ने से स्पॉट मार्केट में दरें तेजी से ऊपर गई हैं, वहीं दूसरी तरफ थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक भी चिंताजनक स्तर तक पहुंच गया है। ऐसे हालात में बिजली वितरण कंपनियों के लिए बढ़ी हुई कीमतों पर बिजली खरीदना चुनौती बन गया है।
IEX पर 7.3 रुपये प्रति यूनिट पहुंची बिजली की कीमत
सितंबर में इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) के डे-अहेड मार्केट में बिजली की औसत कीमत बढ़कर 7.3 रुपये प्रति यूनिट हो गई। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 105 फीसदी ज्यादा है।
इसी अवधि में डे-अहेड मार्केट में बिजली खरीदने के लिए लगाई गई बोलियों में करीब 281 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों पर बढ़ती मांग को पूरा करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
महंगी बिजली से डिस्कॉम की मुश्किल बढ़ी
देश की कई बिजली वितरण कंपनियां पहले से ही वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं। ऐसे में एक्सचेंज से महंगी दर पर अतिरिक्त बिजली खरीदने से उनके खर्च में और बढ़ोतरी हो सकती है।
वहीं, जिन राज्यों के पास ऊंची कीमत पर बिजली खरीदने के लिए पर्याप्त बजट नहीं है, वहां बढ़ी हुई मांग को संभालने के लिए कुछ इलाकों में लोड शेडिंग का सहारा लिया जा रहा है। इसका असर खासतौर पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पर पड़ सकता है।
आधे के करीब थर्मल प्लांट क्रिटिकल स्टॉक पर
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के आंकड़ों के मुताबिक, देश के थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक भी दबाव में है। सोमवार तक करीब 190 में से 90 पावर प्लांट क्रिटिकल स्टॉक की स्थिति में पहुंच चुके थे।
नियमों के अनुसार, थर्मल पावर प्लांट्स के पास आमतौर पर 15 से 20 दिनों की जरूरत के बराबर कोयला उपलब्ध होना चाहिए। लेकिन मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक कुल कोयला स्टॉक करीब 20.5 मिलियन टन रह गया है, जो जरूरी स्टॉक का लगभग 33 फीसदी बताया जा रहा है।
इस स्तर पर उपलब्ध कोयला औसतन करीब 6 से 7 दिनों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है। ऐसे में बिजली उत्पादन और ग्रिड की स्थिरता को लेकर दबाव बढ़ गया है।
रिकॉर्ड पीक डिमांड ने बढ़ाई चिंता
बिजली की बढ़ती खपत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 10 सितंबर को देश में पीक पावर डिमांड 269 गीगावाट तक पहुंच गई थी। वहीं IEX पर सालाना आधार पर ट्रेड होने वाली बिजली की मात्रा करीब 10.4 फीसदी बढ़कर 12.22 बिलियन यूनिट हो गई।
देश की कुल बिजली खपत में भी करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह लगभग 162 बिलियन यूनिट तक पहुंच गई।
जब बिजली की मांग के मुकाबले उपलब्ध सप्लाई पर दबाव बढ़ता है, तो एक्सचेंज पर कीमतों में भी तेजी देखने को मिलती है। इसका असर पहले बिजली वितरण कंपनियों के खर्च पर और फिर अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ताओं तथा उद्योगों पर पड़ सकता है।
NTPC के स्टॉक में भी बड़ी गिरावट
देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनियों में शामिल NTPC भी कोयले की कमी के दबाव से अछूती नहीं है। कंपनी के पास कोयले का स्टॉक घटकर करीब 5.2 मिलियन टन रह गया है।
यह स्टॉक उसके ज्यादातर पावर प्लांट्स के लिए लगभग सात दिनों तक की सप्लाई के बराबर बताया जा रहा है। अप्रैल में NTPC के पास करीब 18.7 मिलियन टन कोयला था, जो लगभग 25 दिनों की जरूरत के बराबर था।
NTPC देशभर में 50 पावर प्लांट्स संचालित करती है। ऐसे में कोयले के स्टॉक में आई यह कमी कंपनी के बिजली उत्पादन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गई है।

