Petrol Prices today: क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? छह हफ्ते बाद 100 डॉलर के पार पहुंचा भारत का कच्चा तेल
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारत के लिए कच्चे तेल का औसत आयात मूल्य छह हफ्ते बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। बढ़ती कीमतों का दबाव अब तेल कंपनियों के मार्जिन पर पड़ने लगा है, जिससे आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली हर बड़ी हलचल का असर घरेलू ईंधन बाजार पर पड़ता है। भारत का क्रूड ऑयल बास्केट शुक्रवार को बढ़कर 101.07 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो जुलाई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है।
क्यों बढ़ रहे हैं कच्चे तेल के दाम?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों में व्यवधान की आशंका ने वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। इसका सीधा असर तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ेगा।
तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से देश की सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डीजल की औसत कीमत 156.88 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 149.35 डॉलर प्रति बैरल थी। वहीं पेट्रोल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
तेल कंपनियां लंबे समय तक बढ़ी हुई लागत को खुद वहन नहीं कर सकतीं। अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो कंपनियों को पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में बदलाव करने का फैसला लेना पड़ सकता है।
क्या आम लोगों की जेब पर पड़ेगा असर?
फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है तो इसका असर आने वाले समय में दिखाई दे सकता है। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि माल ढुलाई, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ता है। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है।
सरकार और बाजार की नजर वैश्विक हालात पर
फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भारत तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदने की रणनीति अपना रहा है। रूस अभी भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है, जबकि अन्य स्रोतों से भी आयात बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों का रुख और डॉलर-रुपये की चाल यह तय करेगी कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कितना दबाव पड़ेगा। फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता का इंतजार करना होगा।

