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Petrol Prices today: पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बढ़ा खतरा, कच्चा तेल 100 डॉलर के करीब; जानें आज के रेट

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बढ़ा खतरा, कच्चा तेल 100 डॉलर के करीब; जानें आज के रेट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के बेहद करीब पहुंच गई है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड करीब 99 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। इससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

कच्चा तेल महंगा होने की बड़ी वजह क्या है?

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव बढ़ने के साथ ही तेल की सप्लाई को लेकर आशंकाएं गहरा गई हैं। खासकर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चिंता बढ़ी है, क्योंकि दुनिया के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग है। बाजार में आशंका है कि अगर क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है या तेल की आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। इसी डर के कारण तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर तुरंत पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम पर पड़ना जरूरी नहीं है। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, टैक्स, रिफाइनिंग और परिवहन लागत जैसे पहलू शामिल हैं।फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी लंबे समय तक जारी रहती है तो तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।

तेल कंपनियों पर बढ़ रहा दबाव

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने सरकारी तेल विपण कंपनियों यानी OMCs की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। महंगा कच्चा तेल खरीदने और उसे भारत तक पहुंचाने की लागत बढ़ रही है। इसके अलावा युद्ध के कारण फ्रेट और इंश्योरेंस लागत भी बढ़ी है।रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल की मार्केटिंग मार्जिन पर भीदबाव बढ़ा है। इसके बावजूद घरेलू पेट्रोल-डीजल के दाम में तत्काल बढ़ोतरी नहीं की गई है। इससे तेल कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है।

आम लोगों पर क्या होगा असर?

अगर कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। महंगे ईंधन से परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर माल ढुलाई, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।इसके साथ ही महंगा तेल भारत के आयात बिल को बढ़ा सकता है और रुपये पर दबाव डाल सकता है। बुधवार को कच्चे तेल की तेजी के बीच भारतीय रुपया भी 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से नीचे कमजोर हुआ।

फिलहाल राहत, लेकिन आगे बढ़ सकती है मुश्किल

फिलहाल घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है। लेकिन अगर अमेरिका-ईरान तनाव और मिडिल ईस्ट में अस्थिरता जारी रहती है और कच्चा तेल लगातार 100 डॉलर के आसपास या उससे ऊपर बना रहता है, तो भारत में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखना तेल कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।यानी वाहन चालकों को फिलहाल राहत जरूर है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा बढ़ा दिया है।

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