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Petrol-Diesel Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल का बेंचमार्क 50 महीने के हाई पर, OMCs पर बढ़ा दबाव
 

Petrol-Diesel Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल का बेंचमार्क 50 महीने के हाई पर, OMCs पर बढ़ा दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी का असर भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर दिखाई देने लगा है। सितंबर में भारत के पेट्रोल के इंटरनेशनल बेंचमार्क की कीमत बढ़कर 133.05 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। यह करीब 50 महीनों का उच्च स्तर है। 1 से 18 सितंबर के बीच पेट्रोल का औसत दैनिक बेंचमार्क अगस्त के औसत 110.87 डॉलर प्रति बैरल से करीब 20% ज्यादा रहा।
 
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की वजह क्या है?
अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हालिया तेजी के पीछे पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंताएं प्रमुख वजहों में शामिल हैं। सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन में व्यवधान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरने वाली तेल आपूर्ति को लेकर भी बाजार में चिंता बनी हुई है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक Brent क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर चुका है। 
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने पर देश के आयात बिल और घरेलू ईंधन बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

पेट्रोल का बेंचमार्क पिछले हाई से भी ऊपर
सितंबर में पेट्रोल का 133.05 डॉलर प्रति बैरल वाला बेंचमार्क मई में दर्ज 129.63 डॉलर के पिछले उच्च स्तर से भी ऊपर निकल गया है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि घरेलू पंप कीमतों में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय लागत के बीच अंतर बढ़ने पर मार्केटिंग मार्जिन पर दबाव पड़ता है। 

पेट्रोल के साथ डीजल के इंटरनेशनल बेंचमार्क में भी तेजी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार डीजल का औसत दैनिक बेंचमार्क 167.08 डॉलर प्रति बैरल के करीब चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। PPAC अंतरराष्ट्रीय पेट्रोल और डीजल कीमतों के आंकड़े जारी करता है। 
OMCs के मार्जिन पर बढ़ा दबाव
अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी का असर सरकारी तेल विपणन कंपनियों की रिटेल बिक्री के मार्जिन पर पड़ रहा है। सितंबर की शुरुआत में उद्योग विश्लेषकों ने अनुमान लगाया था कि कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर करीब 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 20 रुपये से ज्यादा प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। अलग-अलग रिपोर्टों में डीजल के नुकसान का अनुमान करीब 23 रुपये प्रति लीटर तक लगाया गया था। 
हालांकि कंपनियों की कुल वित्तीय स्थिति केवल रिटेल मार्केटिंग मार्जिन से तय नहीं होती। रिफाइनिंग मार्जिन और पिछली अवधि की कमाई जैसे दूसरे कारक भी उनके तिमाही प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं। 
क्या बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
फिलहाल घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो घरेलू ईंधन कीमतों और तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़ने का पूरा असर तुरंत घरेलू पंप कीमतों में पहुंचे, यह जरूरी नहीं है। सरकार की टैक्स नीति, तेल कंपनियों की कीमत निर्धारण नीति और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति घरेलू कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं। RBI के 2019 के एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया था कि 10 डॉलर प्रति बैरल की कच्चे तेल की बढ़ोतरी से परिस्थितियों के आधार पर भारत की headline inflation पर करीब 49 बेसिस पॉइंट का असर पड़ सकता है। 
वहीं, RBI के 2025 के एक नए अध्ययन में पाया गया कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमत में 10% वृद्धि से भारत की headline inflation में तत्काल प्रभाव के तौर पर करीब 20 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। अध्ययन ने यह भी रेखांकित किया कि सरकारी नीतियां और ईंधन कीमतों का पास-थ्रू इस प्रभाव को सीमित कर सकते हैं। 
आम लोगों पर कैसे पड़ सकता है असर?
अगर महंगा कच्चा तेल लंबे समय तक बना रहता है और उसका असर घरेलू ईंधन लागत पर पड़ता है, तो परिवहन लागत बढ़ने के जरिए अर्थव्यवस्था के दूसरे हिस्सों पर भी दबाव आ सकता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर कई रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ने की संभावना रहती है।
 

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