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Onion Price: बाजार में 60-70 रुपये किलो तक पहुंचा प्याज, सरकार बेच रही ₹35 में, जानें क्यों बढ़ रहे दाम
 

Onion Price: बाजार में 60-70 रुपये किलो तक पहुंचा प्याज, सरकार बेच रही ₹35 में, जानें क्यों बढ़ रहे दाम

रसोई के बजट पर एक बार फिर प्याज की कीमतों का असर दिखाई देने लगा है. देश के कुछ हिस्सों में खुदरा बाजार में प्याज के दाम काफी बढ़ गए हैं, जबकि केंद्र सरकार अपने बफर स्टॉक से इसे ₹35 प्रति किलो की दर पर उपलब्ध करा रही है. सरकार का कहना है कि इसका मकसद बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना और मौसमी कीमतों पर दबाव को कम करना है.
सरकार ने 24 अगस्त 2026 से बफर स्टॉक के प्याज को बाजार में उतारना शुरू किया है. इसके लिए NCCF, NAFED, केंद्रीय भंडार और मोबाइल वैन जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है. साथ ही उत्पादन वाले क्षेत्रों से बड़े खपत केंद्रों तक प्याज पहुंचाने के लिए रेल और सड़क परिवहन का इस्तेमाल किया जा रहा है.
₹35 किलो में प्याज बेच रही सरकार
सरकार के बफर स्टॉक से प्याज की खुदरा बिक्री ₹35 प्रति किलो की दर पर की जा रही है. दिल्ली-NCR के अलावा अन्य प्रमुख खपत केंद्रों तक भी इसकी सप्लाई बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.
सरकारी व्यवस्था के तहत NCCF और NAFED के रिटेल आउटलेट्स तथा मोबाइल वैन के जरिए प्याज उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है. केंद्रीय भंडार के आउटलेट्स को भी इस वितरण व्यवस्था में शामिल किया गया है.


कांदा एक्सप्रेस से बड़े शहरों तक पहुंच रहा प्याज
बफर स्टॉक का प्याज उत्पादन वाले इलाकों से बड़े शहरों तक पहुंचाना इस पूरी व्यवस्था की अहम कड़ी है. इसके लिए 'कांदा एक्सप्रेस' के जरिए रेलवे रेक चलाए जा रहे हैं.
सरकार के मुताबिक, 27 अगस्त को नासिक से भेजी गई पहली खेप में 450 मीट्रिक टन प्याज दिल्ली पहुंचा था. इसके बाद दूसरी खेप 840 मीट्रिक टन प्याज लेकर चेन्नई पहुंची. इसके अलावा सड़क मार्ग से भी प्याज की सप्लाई की जा रही है.
प्याज महंगा होने की क्या वजह है?
प्याज की कीमतों में मौसमी उतार-चढ़ाव आम बात है. रबी और खरीफ फसल के बीच के समय में बाजार में उपलब्ध स्टॉक और नई फसल की आवक के बीच अंतर पैदा हो सकता है. इसी दौरान अगर किसी इलाके में सप्लाई कम होती है या मांग बढ़ती है तो खुदरा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.
सरकार ने भी मौजूदा स्थिति को मौसमी कीमतों के दबाव से जोड़ते हुए बफर स्टॉक जारी करने का फैसला किया है. विभाग देशभर के 579 केंद्रों पर जरूरी वस्तुओं की कीमतों की निगरानी कर रहा है.


क्या देश में प्याज की कमी है?
सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल प्याज उत्पादन को लेकर फिलहाल बड़ी कमी की स्थिति नहीं बताई गई है. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार 2025-26 में प्याज का उत्पादन करीब 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 307.67 लाख मीट्रिक टन था. यानी दोनों वर्षों का उत्पादन लगभग समान स्तर पर है.
सरकार का मानना है कि मजबूत उत्पादन और बफर स्टॉक की उपलब्धता के कारण देश में कुल आपूर्ति को लेकर बड़ी चिंता नहीं है. हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय सप्लाई और मांग के कारण कीमतों में अंतर बना रह सकता है.
बफर स्टॉक के लिए कितने प्याज की खरीद?
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड के तहत 2 लाख मीट्रिक टन रबी प्याज खरीदने का लक्ष्य तय किया था. सरकारी जानकारी के अनुसार 15 मई 2026 से खरीद शुरू हुई और करीब 1.21 लाख मीट्रिक टन प्याज बफर स्टॉक के लिए खरीदा जा चुका था.
किसानों से खरीद को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने प्याज का खरीद मूल्य भी बढ़ाया है. 4 जुलाई 2026 से यह ₹1,875 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर ₹2,125 प्रति क्विंटल यानी ₹21.25 प्रति किलो किया गया.
सरकार की कोशिश क्या है?
सरकार की रणनीति दो स्तरों पर काम कर रही है. एक तरफ बफर स्टॉक से प्याज निकालकर उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ रेलवे और सड़क नेटवर्क के जरिए उत्पादन वाले क्षेत्रों से ज्यादा खपत वाले शहरों तक सप्लाई पहुंचाई जा रही है.
सरकार के अनुसार 1 सितंबर तक बफर स्टॉक से करीब 669 मीट्रिक टन प्याज बेचा जा चुका था. इसमें लगभग 446 मीट्रिक टन खुदरा चैनलों और 223 मीट्रिक टन थोक माध्यमों से बेचा गया.
बाजार में राहत कब तक मिलेगी?
प्याज की कीमतों में राहत काफी हद तक स्थानीय आवक, मांग और वितरण व्यवस्था पर निर्भर करेगी. जिन शहरों में बफर स्टॉक की सप्लाई पहुंची है, वहां सरकार ने कीमतों में नरमी देखने की बात कही है. आगे बफर स्टॉक की मात्रा और वितरण का दायरा बाजार की स्थिति के आधार पर बढ़ाया जा सकता है.
फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार की ओर से ₹35 प्रति किलो वाला प्याज हर बाजार में सामान्य दुकानों पर उपलब्ध होना जरूरी नहीं है. यह निर्धारित सरकारी रिटेल चैनलों, मोबाइल वैन और संबंधित वितरण व्यवस्था के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा है.

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