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NSE IPO Listing: आज BSE पर लिस्ट होंगे NSE के शेयर, GMP से ₹1,857 तक पहुंचने के संकेत; जानें पूरी डिटेल
 

NSE IPO Listing: आज BSE पर लिस्ट होंगे NSE के शेयर, GMP से ₹1,857 तक पहुंचने के संकेत; जानें पूरी डिटेल

NSE IPO Listing: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए आज यानी 24 सितंबर अहम दिन है। NSE के शेयरों की आज BSE पर लिस्टिंग होने वाली है। लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में शेयर IPO के अपर प्राइस बैंड के मुकाबले करीब ₹72 के प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है। यह प्रीमियम करीब 4.03% बैठता है।

ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP को आधार मानें तो NSE के शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत करीब ₹1,857 हो सकती है। हालांकि, GMP अनौपचारिक बाजार का संकेतक है और वास्तविक लिस्टिंग कीमत इससे अलग हो सकती है।
5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ था IPO
NSE ने IPO के लिए ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। इस इश्यू के जरिए करीब ₹22,562 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया था।
17 सितंबर से 21 सितंबर तक खुले IPO को कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले निवेशकों ने करीब 50.28 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई।
सबसे ज्यादा डिमांड क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) की तरफ से आई। QIB का हिस्सा 12.68 गुना, NII का हिस्सा 6.55 गुना और रिटेल निवेशकों का हिस्सा 1.39 गुना सब्सक्राइब हुआ।
Retail Investors ने कितना लगाया था पैसा?
रिटेल निवेशकों के लिए एक लॉट में 8 शेयर रखे गए थे। अपर प्राइस बैंड ₹1,785 के हिसाब से एक लॉट के लिए निवेश राशि ₹14,280 थी।
वहीं रिटेल निवेशक अधिकतम 14 लॉट यानी 112 शेयरों के लिए आवेदन कर सकते थे। इस हिसाब से अधिकतम निवेश करीब ₹1,99,920 था।
IPO में किस कैटेगरी के लिए कितना हिस्सा?
NSE IPO में करीब 50% हिस्सा QIB के लिए रिजर्व रखा गया था। रिटेल निवेशकों के लिए करीब 35.35% और NII के लिए लगभग 15% हिस्सा निर्धारित था।
IPO का अपर प्राइस बैंड ₹1,785 रहने पर NSE की अनुमानित वैल्यूएशन करीब ₹4.42 लाख करोड़ बैठती है।
पूरी तरह OFS था IPO
NSE का यह IPO Offer for Sale यानी OFS था। इसका मतलब कंपनी ने नए शेयर जारी करके पूंजी नहीं जुटाई, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों ने अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचा।
RHP के अनुसार, IPO में कुल 12.64 करोड़ शेयर ऑफर किए गए थे। शुरुआती प्रस्ताव में 14.89 करोड़ शेयरों की बिक्री की योजना थी, जिसे बाद में घटाया गया।
OFS से मिलने वाली रकम कंपनी को नहीं, बल्कि अपने शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को मिलती है।

SBI समेत इन शेयरधारकों ने बेची हिस्सेदारी
IPO में State Bank of India (SBI) सबसे बड़े सेलिंग शेयरहोल्डर्स में रहा। SBI ने करीब 1.59 करोड़ शेयर OFS के जरिए बेचने का प्रस्ताव रखा।
इसके अलावा Canada Pension Plan Investment Board ने करीब 1.18 करोड़, Aranda Investments ने 1.12 करोड़, MS Strategic ने 1.10 करोड़ और New India Assurance Company ने लगभग 1.05 करोड़ शेयर बेचे।
इस OFS में SBI Capital Markets को भी सेलिंग शेयरहोल्डर्स की सूची में शामिल किया गया था, जिसने करीब 87.8 लाख शेयर बेचे।
20 मर्चेंट बैंकर संभाल रहे थे इश्यू
NSE IPO के लिए कुल 20 मर्चेंट बैंकरों को नियुक्त किया गया था। इनमें Kotak Mahindra Capital, JM Financial, Morgan Stanley, Citigroup, SBI Capital Markets और HDFC Bank जैसे नाम शामिल हैं।
वहीं MUFG Intime India को IPO का रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है।
FY26 में NSE का मुनाफा घटा
वित्त वर्ष 2026 में NSE का नेट प्रॉफिट करीब 15.5% घटकर ₹10,302.1 करोड़ रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष में यह ₹12,187.7 करोड़ था। इसी अवधि में कंपनी की कुल आय 3.1% घटकर ₹16,601.3 करोड़ रही।
हालांकि, जून 2026 में समाप्त पहली तिमाही में कंपनी के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला। इस दौरान NSE का मुनाफा 6.7% बढ़कर ₹3,120.1 करोड़ और रेवेन्यू 13.1% बढ़कर ₹4,560.4 करोड़ रहा।
क्या होता है OFS?
Offer for Sale (OFS) में कंपनी नए शेयर जारी नहीं करती। इसमें कंपनी के मौजूदा निवेशक, प्रमोटर या बड़े शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बाजार में बेचते हैं।
इस प्रक्रिया से मिलने वाला पैसा कंपनी के पास जाने के बजाय उन मौजूदा शेयरधारकों को मिलता है, जो अपने शेयर बेच रहे होते हैं। इसलिए NSE का यह IPO कंपनी के लिए नया फंड जुटाने के बजाय मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी की बिक्री से जुड़ा था।
नोट: GMP अनौपचारिक और बाजार-आधारित संकेतक है, इसलिए इसे वास्तविक लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।
 

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