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महंगाई का नया झटका: खाने-पीने की चीजें और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स होंगे महंगे, कंपनियों पर बढ़ा लागत का दबाव

महंगाई का नया झटका: खाने-पीने की चीजें और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स होंगे महंगे, कंपनियों पर बढ़ा लागत का दबाव

देश में आम लोगों को जल्द ही महंगाई का एक और बड़ा झटका लग सकता है। खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स तक की कीमतों में बढ़ोतरी होने के संकेत मिल रहे हैं। कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल और पैकेजिंग मटीरियल की लागत लगातार बढ़ रही है, जिसकी वजह से उत्पादों की कीमतें बढ़ाना मजबूरी बनती जा रही हैं।

उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक बीते कुछ महीनों में पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले कई मटीरियल की कीमतों में भारी उछाल आया है। खासतौर पर प्लास्टिक, पेपर, एल्युमिनियम और अन्य पैकेजिंग सामग्री की लागत में 56 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका सीधा असर एफएमसीजी कंपनियों की उत्पादन लागत पर पड़ रहा है।

कंपनियों का कहना है कि साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, बिस्किट, स्नैक्स, तेल, मसाले और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स खर्च भी पहले की तुलना में काफी बढ़ चुका है। ऐसे में कंपनियों के सामने मुनाफा बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

एफएमसीजी सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि आने वाले महीनों में कुछ उत्पादों के दाम बढ़ाए जा सकते हैं। कुछ कंपनियां सीधे कीमत बढ़ाने के बजाय पैकेट का वजन कम करने की रणनीति भी अपना सकती हैं। यानी उपभोक्ताओं को पहले जितनी कीमत में कम मात्रा वाला उत्पाद मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक सप्लाई चेन की समस्याएं भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। पैकेजिंग इंडस्ट्री पर इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। प्लास्टिक रेजिन, कार्डबोर्ड और मेटल कंटेनर जैसे उत्पादों की लागत तेजी से बढ़ी है, जिससे कंपनियों का खर्च बढ़ गया है।

महंगाई का असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर साफ दिखाई दे सकता है। पहले से ही रसोई का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है और अब रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के महंगे होने से परिवारों की आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों पर इसका ज्यादा असर पड़ने की आशंका है।

आर्थिक जानकारों के अनुसार अगर कच्चे माल की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में बाजार में कई उत्पादों के दाम और बढ़ सकते हैं। हालांकि कुछ कंपनियां लागत कम करने के लिए वैकल्पिक पैकेजिंग और सप्लाई मैनेजमेंट पर भी काम कर रही हैं, लेकिन फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत मिलने के आसार कम नजर आ रहे हैं।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों के सीजन से पहले कीमतों में बढ़ोतरी का असर बिक्री पर भी पड़ सकता है। कंपनियां एक तरफ लागत के दबाव से जूझ रही हैं तो दूसरी तरफ ग्राहकों को बनाए रखने की चुनौती भी उनके सामने है। ऐसे में आने वाले महीनों में एफएमसीजी सेक्टर में कीमतों और पैकेजिंग को लेकर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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