Meta Muse AI Agent: अब AI सिर्फ जवाब नहीं देगा, वीडियो में जाने आपके लिए काम भी करेगा; ईमेल से लेकर ट्रैवल बुकिंग तक संभालेगा
Meta ने मंगलवार को अपना नया पर्सनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट ‘Muse’ लॉन्च कर दिया है। कंपनी के मुताबिक, यह सामान्य AI चैटबॉट से आगे बढ़कर यूजर्स की ओर से रोजमर्रा के डिजिटल काम खुद कर सकता है। Muse शेड्यूल मैनेज करने, खरीदारी करने, ईमेल भेजने और ट्रैवल बुक करने जैसे कामों में मदद करेगा। इतना ही नहीं, यूजर अगर कोई बड़ा लक्ष्य बताता है तो Muse उसे छोटे-छोटे एक्शन प्लान में बदलकर उस पर काम भी कर सकता है।
अभी सिर्फ अमेरिका में उपलब्ध
Meta ने फिलहाल Muse को अमेरिका में 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के यूजर्स के लिए लॉन्च किया है। इसे अलग Muse ऐप के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा यूजर्स WhatsApp के जरिए भी Muse से बातचीत कर सकते हैं। कंपनी के अनुसार, इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसके इस्तेमाल के लिए किसी तकनीकी जानकारी की जरूरत न पड़े।
Muse को Meta के AI मॉडल Muse Spark से संचालित किया गया है। यह सिर्फ सवालों का जवाब देने के बजाय यूजर की जरूरत समझकर खुद कार्रवाई करने के लिए तैयार किया गया है। उदाहरण के लिए, यूजर किसी यात्रा की योजना बनाने को कहता है तो Muse समय और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए प्लान तैयार कर सकता है और आगे की प्रक्रिया में मदद कर सकता है।
ईमेल से शॉपिंग और ट्रैवल तक करेगा काम
Muse को कई डिजिटल सेवाओं से जोड़ा जा सकता है। यह ईमेल भेजने, फॉर्म भरने, ऑनलाइन खरीदारी करने और यात्रा बुक करने जैसे काम कर सकता है। जरूरत पड़ने पर यह ब्राउजर खोलकर वेबसाइट पर खुद जरूरी प्रक्रिया पूरी कर सकता है।
Meta के मुताबिक, Muse लंबे समय तक चलने वाले लक्ष्यों पर भी काम कर सकता है। जैसे कोई व्यक्ति पूरे साल का एक्सरसाइज प्लान बनाना चाहता है या नया बिजनेस शुरू करने की तैयारी कर रहा है, तो Muse लक्ष्य को एक व्यक्तिगत प्लान में बदलने और उसे आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। यह यूजर की प्राथमिकताओं को याद रखकर भविष्य में सुझाव भी दे सकता है।
सुरक्षा और प्राइवेसी पर खास जोर
Meta ने Muse की लॉन्चिंग के दौरान सुरक्षा और प्राइवेसी को खास तौर पर रेखांकित किया है। कंपनी के अनुसार, Muse Secure VM यानी सिक्योर वर्चुअल मशीन पर चलता है। इसमें प्रत्येक यूजर के लिए अलग सुरक्षित कंप्यूटिंग वातावरण होता है, जहां उसका डेटा और कनेक्टेड सेवाओं से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखी जाती है।
Muse के साथ एक अलग Sentinel सिस्टम भी काम करता है, जो एजेंट की इंटरनेट गतिविधियों की निगरानी करता है। संवेदनशील काम, जैसे ईमेल भेजना या खरीदारी करना, करने से पहले यूजर की अनुमति ली जा सकती है। यूजर यह भी तय कर सकता है कि Muse को किन ऐप्स और सेवाओं तक कितनी पहुंच मिले।
लंबे समय तक बैकग्राउंड में भी कर सकता है काम
Muse की खासियत यह भी है कि किसी लंबे काम के लिए यूजर ऐप बंद कर दे, तब भी एजेंट बैकग्राउंड में काम जारी रख सकता है। किसी बदलाव या यूजर की मंजूरी की जरूरत होने पर वह वापस संपर्क कर सकता है। Meta का कहना है कि यूजर अपने कनेक्टेड अकाउंट की अनुमति कभी भी बदल या खत्म कर सकता है।
Meta ने कहा है कि Muse को आगे और ज्यादा सेवाओं से जोड़ा जाएगा। कंपनी इस तकनीक को अपने ‘personal superintelligence’ विजन की दिशा में एक अहम कदम मान रही है। फिलहाल यह अमेरिका तक सीमित है, लेकिन भविष्य में इसे अन्य देशों और Meta के स्मार्ट ग्लासेज जैसे डिवाइस तक भी विस्तार देने की योजना है।

