₹1 करोड़ का फंड तैयार करने का मास्टरप्लान: जानिए पोर्टफोलियो में कितना हो सोना, कितना शेयर बाजार
अगर आपका निवेश पोर्टफोलियो बढ़कर ₹1 करोड़ तक पहुंच गया है, तो सिर्फ ज्यादा रिटर्न कमाने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। इस स्तर पर बाजार का उतार-चढ़ाव, आपकी जोखिम लेने की क्षमता और आने वाले समय में पैसों की जरूरत जैसे फैक्टर भी काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।ऐसे में सवाल उठता है कि ₹1 करोड़ के पोर्टफोलियो को इक्विटी, डेट और गोल्ड में किस तरह बांटा जाए? प्रूडेंट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के CEO प्रशस्त सेठ के मुताबिक, एक संतुलित पोर्टफोलियो में अलग-अलग एसेट क्लास को उनकी भूमिका के हिसाब से जगह दी जा सकती है।
₹1 करोड़ को कैसे बांटा जा सकता है?
प्रशस्त सेठ के अनुसार, निवेशक अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए पोर्टफोलियो को तीन प्रमुख हिस्सों में बांट सकते हैं।
इक्विटी: 65% से 75%
₹1 करोड़ के पोर्टफोलियो में करीब ₹65 लाख से ₹75 लाख इक्विटी में रखे जा सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाना है।
डेट: 15% से 25%
करीब ₹15 लाख से ₹25 लाख डेट में रखे जा सकते हैं। इसका मकसद पोर्टफोलियो में स्थिरता और जरूरत के समय लिक्विडिटी बनाए रखना है।
गोल्ड: 5% से 10%
करीब ₹5 लाख से ₹10 लाख गोल्ड में रखा जा सकता है। इसका उद्देश्य पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन बढ़ाना और जोखिम को संतुलित करना है।
क्या 70% इक्विटी में निवेश करना ठीक है?
लंबी अवधि में संपत्ति बनाने के लिए इक्विटी को पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा माना जाता है। हालांकि, सिर्फ बाजार में तेजी देखकर ज्यादा पैसा इक्विटी में लगाना उचित नहीं माना जाता।स्रोत में दिए एक्सपर्ट के अनुसार, निवेश के दौरान कंपनियों की संभावित ग्रोथ और उनकी वैल्यूएशन पर ध्यान देना जरूरी है।अगर ₹70 लाख इक्विटी में लगाए जाते हैं, तो इसका करीब 60% से 70% हिस्सा यानी लगभग ₹42 लाख से ₹49 लाख मजबूत लार्ज-कैप कंपनियों में रखा जा सकता है। बाकी रकम को मिड-कैप और स्मॉल-कैप में उनकी वैल्यूएशन और निवेशक की जोखिम क्षमता के हिसाब से बांटा जा सकता है।
डेट का पोर्टफोलियो में क्या काम है?
डेट का उद्देश्य सिर्फ रिटर्न कमाना नहीं होता। यह पोर्टफोलियो को बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव के दौरान स्थिरता देने में मदद कर सकता है।
अगर अगले 1 से 3 साल में आपको किसी बड़े खर्च के लिए पैसे की जरूरत है, तो उस रकम को पूरी तरह शेयर बाजार के जोखिम में रखना उचित नहीं होगा। ऐसे में ₹15 लाख से ₹25 लाख का डेट हिस्सा लिक्विडिटी और अपेक्षाकृत स्थिरता के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
गोल्ड में कितना पैसा रखें?
हाल के समय में गोल्ड ने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन केवल पिछले रिटर्न को देखकर गोल्ड में निवेश का हिस्सा बढ़ाने की जरूरत नहीं है।गोल्ड का इस्तेमाल पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन के लिए किया जा सकता है। बाजार में इक्विटी पर दबाव आने की स्थिति में गोल्ड अलग तरह से प्रदर्शन कर सकता है, जिससे पूरे पोर्टफोलियो के जोखिम को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।स्रोत में दिए सुझाव के अनुसार, ₹1 करोड़ के पोर्टफोलियो में 5% से 10%, यानी ₹5 लाख से ₹10 लाख तक गोल्ड का हिस्सा रखा जा सकता है।
पोर्टफोलियो बनाकर भूल न जाएं
₹1 करोड़ का पोर्टफोलियो तैयार करने के बाद उसे हमेशा के लिए उसी अनुपात में छोड़ देना जरूरी नहीं है। समय के साथ आपकी उम्र, वित्तीय लक्ष्य, पैसों की जरूरत और बाजार की स्थिति बदल सकती है।इसलिए समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करना और जरूरत के अनुसार एसेट एलोकेशन में बदलाव करना महत्वपूर्ण हो सकता है।

