Kitchen Budget: दाल, प्याज और खाने के तेल ने बढ़ाई चिंता, जानें क्यों महंगा हो रहा रसोई का सामान
रसोई के बजट पर एक बार फिर महंगाई का असर दिखाई देने लगा है. पिछले कुछ दिनों में कई जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. दाल, प्याज, खाने के तेल और कुछ सब्जियों के दाम बढ़ने से घरेलू खर्च का हिसाब बिगड़ रहा है.
उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कई खाद्य वस्तुओं की औसत खुदरा कीमतें पिछले साल की तुलना में ऊपर हैं. हालांकि, अलग-अलग शहरों और बाजारों में इनके दाम अलग हो सकते हैं.
अरहर दाल की कीमत में बढ़ोतरी
अरहर दाल की औसत खुदरा कीमत बढ़कर करीब 124.23 रुपये प्रति किलो हो गई है. पिछले साल इसी अवधि में इसका भाव लगभग 113.66 रुपये प्रति किलो था. यानी एक साल के दौरान इसकी कीमत में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
अरहर के अलावा चना, उड़द, मूंग और मसूर जैसी दूसरी दालों की कीमतों में भी पिछले वर्ष की तुलना में बदलाव देखने को मिला है. दालें रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा हैं, इसलिए इनके दाम बढ़ने का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ता है.
प्याज की कीमत में बड़ा बदलाव
सब्जियों की बात करें तो प्याज की कीमत में सबसे ज्यादा अंतर दिखाई दे रहा है. आंकड़ों के मुताबिक प्याज की औसत खुदरा कीमत करीब 54.23 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है. पिछले साल इसी समय यह लगभग 25.97 रुपये प्रति किलो थी.
टमाटर का औसत भाव भी करीब 39.16 रुपये प्रति किलो बताया गया है, जबकि पिछले साल यह लगभग 36.48 रुपये प्रति किलो था. वहीं आलू का भाव करीब 22 रुपये प्रति किलो के आसपास है.
हरी सब्जियों के साथ अदरक और लहसुन जैसी रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है.
खाने के तेल पर भी बढ़ा खर्च
खाद्य तेलों की कीमतों में भी पिछले एक साल में उल्लेखनीय बदलाव हुआ है. सनफ्लावर ऑयल की कीमत करीब 161.40 रुपये से बढ़कर 192.56 रुपये प्रति किलो बताई गई है.
इसी तरह मूंगफली तेल का भाव 186.93 रुपये से बढ़कर करीब 208.44 रुपये प्रति किलो और सरसों तेल का भाव 188.80 रुपये से बढ़कर करीब 201.02 रुपये प्रति किलो हो गया है.
पाम ऑयल की कीमत भी करीब 132.98 रुपये से बढ़कर 151.40 रुपये प्रति किलो बताई गई है. खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाले तेल की कीमत बढ़ने से इसका असर मासिक घरेलू खर्च पर पड़ सकता है.
क्यों बढ़ रहे हैं खाने-पीने की चीजों के दाम?
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बदलाव के पीछे एक से ज्यादा कारण हो सकते हैं. मौसम, फसल उत्पादन, सप्लाई और मांग के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का असर भी घरेलू बाजार पर पड़ता है.
कम बारिश या मौसम में बदलाव से कुछ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहती है. इसका प्रभाव सब्जियों और तिलहन जैसी फसलों की आपूर्ति पर पड़ सकता है.
भारत खाद्य तेल की अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम और दूसरे खाद्य तेलों की कीमतों में बदलाव का असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दे सकता है.
इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध और काला सागर क्षेत्र में परिवहन से जुड़ी बाधाओं ने भी वैश्विक कृषि और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है. इन परिस्थितियों में आयात लागत बढ़ने पर घरेलू कीमतों पर भी दबाव आ सकता है.
आगे कैसी रह सकती हैं कीमतें?
दाल, सब्जी और खाद्य तेलों की कीमतें आगे किस दिशा में जाएंगी, यह मुख्य रूप से उत्पादन, मौसम, आयात लागत और बाजार में उपलब्धता पर निर्भर करेगा. इसलिए अलग-अलग खाद्य वस्तुओं के दामों में आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.
फिलहाल बढ़ती कीमतों का सबसे सीधा असर उन परिवारों के मासिक बजट पर पड़ रहा है, जिनके खर्च में खाद्य सामग्री का हिस्सा अधिक है.

