जन्माष्टमी पर व्यापार का महा-उत्सव: माखन-मिश्री, मोर-मुकुट और सजावट के बाजार से 40 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक क्रांति
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर देशभर के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। माखन-मिश्री, दूध-दही, मिठाइयां, फल, सूखे मेवे और पूजा सामग्री से लेकर मोर-मुकुट, बांसुरी, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले और सजावटी सामान तक की जमकर खरीदारी हो रही है। शुक्रवार को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा, ऐसे में बाजारों में खरीदारी के लिए अब बेहद कम समय बचा है।
लॉन्ग वीकेंड के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु मथुरा-वृंदावन, द्वारका और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े दूसरे धार्मिक स्थलों की ओर भी रुख कर रहे हैं। इससे धार्मिक पर्यटन, होटल, परिवहन और स्थानीय कारोबार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
जन्माष्टमी पर 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार!
देश के प्रमुख व्यापारिक संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुमान के मुताबिक, इस साल जन्माष्टमी के मौके पर देशभर में 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार हो सकता है।
CAIT का कहना है कि जन्माष्टमी अब सिर्फ धार्मिक आस्था का पर्व नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की बड़ी आर्थिक गतिविधियों से भी जुड़ चुका है। पूजा-पाठ, खरीदारी, धार्मिक पर्यटन और विभिन्न आयोजनों के जरिए इस त्योहार से बड़ी संख्या में कारोबारी और छोटे उद्यमी जुड़े हुए हैं।
इन सामानों की सबसे ज्यादा मांग
जन्माष्टमी से पहले बाजारों में कई तरह के सामानों की मांग तेजी से बढ़ी है। इनमें माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और दूसरे डेयरी उत्पाद, मिठाइयां, फल, सूखे मेवे, पूजा सामग्री, फूल-मालाएं, बंदनवार, झूले, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, मोर-मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, आभूषण और भगवान कृष्ण के विशेष परिधान शामिल हैं।
CAIT के आकलन के अनुसार जन्माष्टमी से जुड़े खर्च में अलग-अलग सामान और सेवाओं की हिस्सेदारी भी महत्वपूर्ण रहेगी।
- मिठाई, माखन-मिश्री और डेयरी उत्पाद: करीब 20%
- पूजा सामग्री, धूप-अगरबत्ती, पंचामृत और पूजन किट: करीब 10%
- फूल, मालाएं और सजावट का सामान: करीब 12%
- पारंपरिक कपड़े और वस्त्र: करीब 10%
- फल, सूखे मेवे और प्रसाद: करीब 10%
- लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले और श्रृंगार सामग्री: करीब 8%
- उपहार, खिलौने और घरेलू सजावटी सामान: करीब 5%
- धार्मिक पर्यटन, होटल और परिवहन: करीब 15%
- अन्य उपभोक्ता सामान: करीब 10%
'वोकल फॉर लोकल' को भी मिलेगा बढ़ावा
CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक, जन्माष्टमी आस्था और भक्ति के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपरा और व्यापार का भी बड़ा पर्व है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' अभियान का असर त्योहारों की खरीदारी में भी देखने को मिल रहा है। लोग भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे स्थानीय दुकानदारों, कारीगरों, कुटीर उद्योगों और छोटे कारोबारियों को फायदा मिल रहा है।
किसान से लेकर होटल कारोबारी तक को फायदा
जन्माष्टमी के दौरान होने वाली खरीदारी का असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहता। दूध उत्पादक, किसान, फल और फूल विक्रेता, मिठाई कारोबारी, मूर्तिकार, कारीगर, वस्त्र विक्रेता, ट्रांसपोर्टर, होटल संचालक और रेस्तरां कारोबारियों तक इसकी आर्थिक गतिविधियां पहुंचती हैं।
यानी जन्माष्टमी से जुड़े कारोबार की एक लंबी चेन है, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लाखों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ उठाते हैं।
2024 में 25 हजार करोड़, 2025 में 30 हजार करोड़ का कारोबार
CAIT के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में जन्माष्टमी के दौरान करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 30,000 करोड़ रुपये पहुंच गया।
इस साल उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी, धार्मिक पर्यटन के विस्तार, वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव और ऑनलाइन व आधुनिक रिटेल के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए कारोबार में करीब 30 फीसदी वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। इसी आधार पर इस साल कुल व्यापार 40,000 करोड़ रुपये से अधिक रहने की उम्मीद है।
मथुरा-वृंदावन से द्वारका तक बढ़ेगी रौनक
जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा-वृंदावन, द्वारका, नाथद्वारा, दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद और इंदौर समेत देश के कई प्रमुख कृष्ण मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में जन्माष्टमी बड़े स्तर पर मनाई जा रही है। श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से होटल, परिवहन, रेस्तरां, प्रसाद, फूल और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े कारोबार में भी तेजी आने की उम्मीद है।
'भक्ति से बाजार और परंपरा से रोजगार'
CAIT का कहना है कि भारत के त्योहारों को केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। जन्माष्टमी जैसे पर्व देश के छोटे व्यापारियों, कारीगरों, किसानों, महिलाओं, स्वरोजगारियों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए बड़े आर्थिक अवसर भी पैदा करते हैं।
प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक, जन्माष्टमी 'भक्ति से बाजार, परंपरा से रोजगार और स्थानीय उत्पादन से राष्ट्रीय विकास' की भावना को मजबूत करने का अवसर है। मंदिर से बाजार तक और किसान से व्यापारी व कारीगर से उपभोक्ता तक, पूरा आर्थिक तंत्र इस पर्व के दौरान एक-दूसरे से जुड़ता है।

