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रूस का साथ छोड अब अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा भारत, फुटेज में जानें दावा सरकारी कंपनियों को अमेरिकी क्रूड लेने को कहा

रूस का साथ छोड अब अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा भारत, फुटेज में जानें दावा सरकारी कंपनियों को अमेरिकी क्रूड लेने को कहा

भारत सरकार ने देश की सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों से कहा है कि वे अब अमेरिका और वेनेजुएला से अधिक कच्चा तेल खरीदने पर विचार करें। यह जानकारी अमेरिकी मीडिया एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम हाल ही में अमेरिका के साथ हुए ट्रेड डील के बाद आया है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रेड डील के ऐलान के दौरान भारत पर जोर दिया था कि उसने रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद करने का वादा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि भारत ने व्यापार समझौते के हिस्से के रूप में रूसी कच्चा तेल लेना बंद करने पर सहमति जताई है। हालांकि, भारत ने अभी तक इस दावे पर सार्वजनिक रूप से कोई सीधा जवाब नहीं दिया है।

भारत सरकार की ओर से कहा गया है कि देश अपने तेल के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रहा है और उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है ऊर्जा सुरक्षा। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के लिए यह कदम जरूरी है क्योंकि वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता और विविध स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करना राष्ट्रीय हित में है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की ऊर्जा नीति हमेशा दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर आधारित रही है। तेल की आपूर्ति में विविधता लाने का मतलब केवल अंतरराष्ट्रीय दबाव को संतुलित करना नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा को भी सुनिश्चित करना है। इस दिशा में अमेरिका और वेनेजुएला जैसे देशों से तेल खरीदने की संभावना को देखना एक रणनीतिक कदम हो सकता है।

हालांकि, रूस से तेल का आयात बंद करने के संबंध में अभी तक भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह कदम वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक दबावों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास माना जा रहा है। ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने हमेशा विभिन्न स्रोतों से कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करके घरेलू बाजार और अंतरराष्ट्रीय मांग को संतुलित किया है।

विदेश मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत किसी भी निर्णय में राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोपरि रखता है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार समझौतों के तहत आने वाले दबावों को देखते हुए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि देश की तेल आपूर्ति में कोई कमी या व्यवधान न आए।

इस दिशा में भारत ने पहले भी मध्य पूर्व, अफ्रीका, और अमेरिका जैसे देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति को संतुलित करने के लिए कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला से तेल खरीदने की संभावना इस रणनीति का हिस्सा हो सकती है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में भारत की भूमिका मजबूत बने।

आर्थिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत कर सकता है। इसके अलावा, यह वैश्विक व्यापारिक साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच भारत की स्वतंत्र और संतुलित नीति को दर्शाता है।

भारत की इस नीति का मकसद स्पष्ट है: किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम करना और देश में ऊर्जा की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में भारत की तेल खरीद रणनीति पर वैश्विक निगाहें बनी रहेंगी।

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