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Income Tax Return Alert: सावधान! 31 अगस्त तक फाइल करें ITR-3 या ITR-4

Income Tax Return Alert: सावधान! 31 अगस्त तक फाइल करें ITR-3 या ITR-4

अगर आपकी कमाई सिर्फ नौकरी या पेंशन से नहीं, बल्कि बिजनेस, फ्रीलांसिंग, प्रोफेशनल सर्विस या ट्रेडिंग से भी होती है, तो इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय सही ITR फॉर्म चुनना बेहद जरूरी है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर भविष्य में आयकर विभाग की ओर से नोटिस या स्पष्टीकरण की परेशानी हो सकती है।

बिजनेस या प्रोफेशन से आय वाले कई करदाताओं के लिए ITR-3 और ITR-4 मुख्य विकल्प होते हैं। हालांकि, दोनों फॉर्म सभी टैक्सपेयर्स के लिए नहीं हैं। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी आय और परिस्थितियों के हिसाब से कौन-सा फॉर्म लागू होता है।

31 अगस्त की तारीख क्यों है महत्वपूर्ण?

आयकर विभाग के मुताबिक, 31 जुलाई की अंतिम तारीख तक 6.5 करोड़ से ज्यादा ITR दाखिल किए जा चुके थे। इनमें नौकरीपेशा, पेंशनर्स, छात्रों की आय वाले करदाता और अलग-अलग स्रोतों से कमाई करने वाले लोग शामिल थे।

बिजनेस और प्रोफेशन से आय प्राप्त करने वाले करदाताओं की भी बड़ी संख्या इसमें शामिल रही। वहीं, जिन कारोबारियों या प्रोफेशनल्स पर टैक्स ऑडिट लागू नहीं है और जिन्होंने अभी तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं किया है, उनके लिए 31 अगस्त की तारीख अहम है।

ITR-3 या ITR-4, कौन-सा फॉर्म भरें?

बिजनेस या प्रोफेशन से कमाई करने वाले टैक्सपेयर्स को आमतौर पर ITR-3 या ITR-4 में से किसी एक फॉर्म का इस्तेमाल करना पड़ता है। सही फॉर्म का चुनाव आपकी आय, कारोबार या प्रोफेशन की प्रकृति और टैक्सेशन स्कीम पर निर्भर करता है।

ITR-3 किन लोगों के लिए है?

ITR-3 उन Individuals और Hindu Undivided Family (HUF) के लिए होता है, जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन यानी अनुमानित कर व्यवस्था के तहत रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे हैं।

अगर कोई टैक्सपेयर नियमित रूप से अपनी अकाउंट बुक्स मेंटेन करता है, उसकी आय और कारोबार की स्थिति ITR-4 की पात्रता में नहीं आती या वह Futures & Options (F&O) ट्रेडिंग करता है, तो कई परिस्थितियों में ITR-3 की जरूरत पड़ सकती है।

इस फॉर्म के जरिए वेतन या पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस या प्रोफेशन, कैपिटल गेन्स और अन्य स्रोतों से होने वाली आय की जानकारी दी जा सकती है।

आम तौर पर ITR-3 का इस्तेमाल उन Individuals या HUF द्वारा किया जाता है, जो ITR-1, ITR-2 या ITR-4 के तहत रिटर्न दाखिल करने के पात्र नहीं होते।

ITR-4 यानी Sugam किसके लिए है?

ITR-4 को Sugam भी कहा जाता है। यह Individuals, HUF और पात्र Firms के लिए होता है, जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत बिजनेस या प्रोफेशन से अपनी आय घोषित करते हैं।

सामान्य तौर पर निर्धारित शर्तों के तहत 50 लाख रुपये तक की कुल आय वाले पात्र टैक्सपेयर्स इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

इसमें बिजनेस या प्रोफेशन से आय के अलावा वेतन या पेंशन, अधिकतम दो हाउस प्रॉपर्टी से आय और ब्याज, फैमिली पेंशन तथा डिविडेंड जैसे अन्य स्रोतों से होने वाली आय भी शामिल की जा सकती है।

निर्धारित शर्तों के तहत 5,000 रुपये तक की कृषि आय और सेक्शन 112A के तहत आने वाले कुछ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स को भी रिपोर्ट किया जा सकता है।

हर कोई ITR-4 नहीं भर सकता

हालांकि, ITR-4 की पात्रता काफी सीमित है। कुछ परिस्थितियों में टैक्सपेयर इसका इस्तेमाल नहीं कर सकता।

अगर किसी व्यक्ति के पास अनलिस्टेड इक्विटी शेयर, विदेशी संपत्ति या विदेश से आय है, कुछ विशेष प्रकार के कैपिटल गेन्स हैं, नुकसान को आगे Carry Forward करना है या ऐसी आय है जिस पर विशेष दर से टैक्स लगता है, तो ITR-4 लागू नहीं हो सकता।

इसके अलावा, कंपनी के डायरेक्टर भी इस फॉर्म के जरिए अपना ITR दाखिल नहीं कर सकते।

ITR भरने से पहले इन दस्तावेजों को जरूर जांचें

इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले टैक्सपेयर्स को अपनी सभी आय और टैक्स से जुड़ी जानकारी का मिलान कर लेना चाहिए। खास तौर पर इन दस्तावेजों को जरूर चेक करें:

  • Form 26AS
  • Annual Information Statement (AIS)
  • Taxpayer Information Summary (TIS)
  • Form 16 और Form 16A
  • बैंक स्टेटमेंट
  • टैक्स पेमेंट और चालान
  • निवेश से जुड़े दस्तावेज

बिजनेस करने वाले लोगों को बिक्री और खरीद का रिकॉर्ड, Profit & Loss Account, Balance Sheet, बिल और चालान, GST Return और अन्य भुगतान रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रखने चाहिए।

शेयर बाजार में ट्रेडिंग करते हैं तो इनका रखें रिकॉर्ड

अगर आपने शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग की है, तो ब्रोकरेज स्टेटमेंट, कॉन्ट्रैक्ट नोट, डीमैट स्टेटमेंट और कैपिटल गेन्स की रिपोर्ट संभालकर रखें।

इन जानकारियों का मिलान AIS और बैंक रिकॉर्ड के साथ करना जरूरी है। खासकर ट्रेडिंग करने वाले टैक्सपेयर्स को यह देखना चाहिए कि सभी लेनदेन और कैपिटल गेन्स सही तरीके से रिपोर्ट हो रहे हैं।

वहीं, किराये से आय प्राप्त करने वाले लोगों को Rent Agreement, नगर निगम टैक्स की रसीद, प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज और Home Loan Interest Certificate जैसे रिकॉर्ड भी तैयार रखने चाहिए।

रिटर्न दाखिल करते समय जल्दबाजी न करें

टैक्सपेयर्स को जहां लागू हो, वहां Tax Audit Report, Form 10-IEA की Acknowledgement और विभिन्न Tax Deductions के दावों से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी तैयार रखने चाहिए।

ई-फाइलिंग पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई दिखाई देती हैं, लेकिन उन्हें बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए। AIS, TIS, Form 26AS, बैंक स्टेटमेंट और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड से सभी आंकड़ों का मिलान करने के बाद ही ITR सबमिट करना बेहतर है।

रिटर्न दाखिल करने के बाद उसका e-Verification पूरा करना भी जरूरी है।

सही ITR फॉर्म चुनना सबसे जरूरी

ITR दाखिल करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण कदम सही फॉर्म का चुनाव है। आपकी आय के स्रोत, बिजनेस या प्रोफेशन की प्रकृति, कैपिटल गेन्स, शेयर बाजार की ट्रेडिंग, विदेशी संपत्ति और लागू टैक्स व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही ITR-3 या ITR-4 का चयन करें।

अगर आपकी कमाई कई स्रोतों से होती है या आपकी टैक्स स्थिति जटिल है, तो रिटर्न दाखिल करने से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या योग्य टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर हो सकता है। इससे गलत फॉर्म या गलत जानकारी के कारण भविष्य में होने वाली टैक्स संबंधी परेशानियों से बचने में मदद मिल सकती है।

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