यूएस-ईरान तनाव का असर: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, भारत में ईंधन के नए रेट लागू
यूएस-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर दुनियाभर के ईंधन बाजारों पर देखा जा रहा है। भारत भी इस वैश्विक उछाल से अछूता नहीं रहा और 15 मई (शुक्रवार) से पेट्रोल और डीजल के नए रेट लागू कर दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे ब्रेंट क्रूड और अन्य अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क की कीमतों में उछाल आया है। इसी वजह से भारतीय तेल कंपनियों ने भी घरेलू ईंधन कीमतों में संशोधन किया है।
नई कीमतों के लागू होने के बाद देश के कई शहरों में पेट्रोल-डीजल के दामों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि यह बढ़ोतरी अलग-अलग राज्यों में टैक्स संरचना और परिवहन लागत के आधार पर भिन्न-भिन्न है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर जल्दी दिखाई देता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में वैश्विक तनाव की स्थिति में घरेलू कीमतें प्रभावित होना स्वाभाविक है।
तेल कंपनियों के अनुसार, मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बाजार आधारित ऑटोमैटिक प्राइस मैकेनिज्म लागू किया जाता है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय क्रूड प्राइस और मुद्रा विनिमय दरों को ध्यान में रखा जाता है।
इधर, ईंधन की कीमतों में बदलाव को लेकर आम उपभोक्ताओं में चिंता देखने को मिल रही है। परिवहन, लॉजिस्टिक्स और दैनिक आवागमन पर निर्भर लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतें उनके बजट पर दबाव डाल रही हैं।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव लंबा चलता है तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है। इसका असर महंगाई दर और परिवहन लागत पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल, बाजार की नजर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक घटनाक्रम और तेल उत्पादन से जुड़े फैसलों पर टिकी हुई है, क्योंकि यही आने वाले दिनों में ईंधन कीमतों की दिशा तय करेंगे।

