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अगर अमीर बनना है तो तुरंत छोड़ें ये 10 आदतें! जानिए कैसे आपकी जेब खाली कर रही हैं छोटी-छोटी गलतियां

अगर अमीर बनना है तो तुरंत छोड़ें ये 10 आदतें! जानिए कैसे आपकी जेब खाली कर रही हैं छोटी-छोटी गलतियां

वेल्थ बनाने के लिए सिर्फ ज्यादा कमाई करना ही काफी नहीं है। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि आप अपनी कमाई को किस तरह मैनेज करते हैं। कई बार अच्छी सैलरी होने के बावजूद लोग आर्थिक रूप से मजबूत नहीं बन पाते, क्योंकि उनकी कुछ ऐसी वित्तीय आदतें होती हैं जो धीरे-धीरे उनकी बचत और निवेश दोनों को कमजोर कर देती हैं।कुछ गलतियां तो आसानी से नजर आ जाती हैं, जैसे क्रेडिट कार्ड से जरूरत से ज्यादा खर्च करना। लेकिन कुछ आदतें ऐसी होती हैं जिनका नुकसान लंबे समय बाद समझ आता है। उदाहरण के लिए, हर महीने बचत करना लेकिन उसे सही जगह निवेश न करना या सैलरी बढ़ने के साथ निवेश की रकम न बढ़ाना।

अगर आप लंबे समय में मजबूत आर्थिक स्थिति बनाना चाहते हैं, तो इन 10 गलतियों से बचना बेहद जरूरी है।

1. जितनी कमाई, उतना ही खर्च

अगर आपकी पूरी सैलरी हर महीने खर्च हो जाती है, तो कमाई बढ़ने के बावजूद आपकी आर्थिक स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं होगा। सैलरी बढ़ने के साथ खर्च बढ़ाने के बजाय बचत और निवेश की रकम भी बढ़ानी चाहिए। इसके लिए हर महीने बजट बनाना और खर्चों पर नजर रखना जरूरी है।

2. निवेश शुरू करने के लिए सही समय का इंतजार

कई लोग यह सोचकर निवेश टालते रहते हैं कि जब ज्यादा पैसा होगा या बाजार सही स्थिति में आएगा, तब शुरुआत करेंगे। लेकिन निवेश में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। छोटी रकम से शुरुआत करके भी लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा लिया जा सकता है।

3. महंगा कर्ज लेकर चलना

क्रेडिट कार्ड का बकाया या ज्यादा ब्याज वाला पर्सनल लोन आपकी कमाई का बड़ा हिस्सा ब्याज में खत्म कर सकता है। ऐसे कर्ज को लंबे समय तक खींचने के बजाय उसे जल्द चुकाने की रणनीति बनानी चाहिए। कर्ज कम होने के बाद वही पैसा निवेश में लगाया जा सकता है।

4. इमरजेंसी फंड न बनाना

अचानक नौकरी जाने, मेडिकल खर्च, वाहन खराब होने या किसी अन्य आपात स्थिति में अगर आपके पास पर्याप्त बचत नहीं है, तो आपको कर्ज लेना पड़ सकता है या अपने निवेश को समय से पहले निकालना पड़ सकता है।

इसलिए अपनी जरूरत के हिसाब से कम से कम कुछ महीनों के जरूरी खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड रखना समझदारी है।

5. अपना पूरा पैसा सिर्फ सेविंग्स अकाउंट में रखना

सेविंग्स अकाउंट में पैसा रखना गलत नहीं है। रोजमर्रा के खर्च और इमरजेंसी के लिए कुछ रकम आसानी से उपलब्ध होना जरूरी है। लेकिन लंबे समय के लक्ष्यों के लिए पूरा पैसा सिर्फ बैंक खाते में रखना सही रणनीति नहीं हो सकती।

महंगाई समय के साथ पैसे की वास्तविक खरीद क्षमता को कम करती है। इसलिए लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए अपनी जोखिम क्षमता और लक्ष्य के अनुसार अलग-अलग निवेश विकल्पों पर विचार करना चाहिए।

6. बिना लक्ष्य के निवेश करना

सिर्फ इसलिए किसी निवेश योजना में पैसा नहीं लगाना चाहिए क्योंकि वह लोकप्रिय है या दूसरे लोग उसमें निवेश कर रहे हैं। निवेश करने से पहले यह तय करें कि पैसा किस उद्देश्य के लिए है।

घर खरीदना, बच्चों की पढ़ाई, शादी या रिटायरमेंट जैसे अलग-अलग लक्ष्यों के लिए अलग समयसीमा और अलग निवेश रणनीति की जरूरत हो सकती है।

7. ट्रेंड देखकर निवेश के पीछे भागना

किसी शेयर, म्यूचुअल फंड या दूसरे निवेश ने पिछले साल शानदार रिटर्न दिया है, इसका मतलब यह नहीं कि आगे भी वही प्रदर्शन जारी रहेगा।

सिर्फ पुराने रिटर्न देखकर किसी निवेश के पीछे भागने से निवेशक अक्सर ऊंची कीमत पर खरीदारी कर बैठते हैं। इसलिए निवेश करते समय रिस्क, समयसीमा और अपने पूरे पोर्टफोलियो को ध्यान में रखना जरूरी है।

8. सैलरी बढ़ते ही लाइफस्टाइल महंगी कर लेना

सैलरी बढ़ते ही महंगी कार, बड़ा घर, ज्यादा शॉपिंग और महंगे गैजेट्स पर खर्च बढ़ा देना लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन का उदाहरण है।

कमाई बढ़ने पर जीवनशैली में सुधार करना गलत नहीं है, लेकिन हर बढ़ोतरी का पूरा फायदा खर्च में बदल देना भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को कमजोर कर सकता है। बेहतर तरीका यह है कि हर सैलरी इंक्रीमेंट के साथ SIP या निवेश की रकम भी बढ़ाई जाए।

9. रिटायरमेंट प्लानिंग को टालते रहना

रिटायरमेंट भले ही आज से कई साल दूर हो, लेकिन इसकी तैयारी जितनी जल्दी शुरू की जाए उतना बेहतर है। कम उम्र में शुरुआत करने से छोटी-छोटी रकम भी लंबे समय में बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद कर सकती है।अगर आप रिटायरमेंट प्लानिंग को लगातार टालते रहते हैं, तो बाद में उसी लक्ष्य के लिए ज्यादा रकम निवेश करनी पड़ सकती है।

10. अपने फाइनेंशियल प्लान की समीक्षा न करना

वित्तीय योजना एक बार बनाकर हमेशा के लिए छोड़ देने वाली चीज नहीं है। समय के साथ आपकी आय, खर्च, कर्ज और जीवन के लक्ष्य बदल सकते हैं।

इसलिए समय-समय पर अपने खर्च, बचत, इमरजेंसी फंड, इंश्योरेंस और निवेश पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए। शादी, नौकरी बदलने, बच्चे के जन्म या घर खरीदने जैसे बड़े बदलावों के बाद फाइनेंशियल प्लान को दोबारा देखना और भी जरूरी हो जाता है।

क्या ज्यादा सैलरी होना ही अमीर बनने की गारंटी है?

नहीं। ज्यादा सैलरी से बचत और निवेश करना आसान हो सकता है, लेकिन असली फर्क आपकी वित्तीय आदतें पैदा करती हैं। अगर कमाई बढ़ने के साथ खर्च भी उसी रफ्तार से बढ़ते रहें, तो ज्यादा कमाने के बावजूद संपत्ति नहीं बन पाएगी।

क्या निवेश से पहले पूरा कर्ज खत्म करना जरूरी है?

यह कर्ज की ब्याज दर और उसकी प्रकृति पर निर्भर करता है। क्रेडिट कार्ड जैसे महंगे कर्ज को प्राथमिकता से चुकाना आमतौर पर बेहतर होता है। कम ब्याज वाले कर्ज की स्थिति अलग हो सकती है और उसमें निवेश तथा कर्ज चुकाने के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

इमरजेंसी फंड में कितना पैसा होना चाहिए?

इसकी जरूरत हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है। नौकरी की स्थिरता, मासिक खर्च और परिवार की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखना चाहिए। आम तौर पर 3 से 6 महीने के जरूरी खर्च के बराबर रकम का इमरजेंसी फंड रखने की सलाह दी जाती है।

क्या सेविंग्स अकाउंट में पैसा रखना गलत है?

बिल्कुल नहीं। रोजमर्रा के खर्च और अचानक जरूरत के लिए सेविंग्स अकाउंट में पैसा रखना जरूरी है। समस्या तब होती है जब लंबे समय के लक्ष्यों के लिए रखा पूरा पैसा भी वहीं पड़ा रहे और उसकी ग्रोथ महंगाई की रफ्तार से पीछे रह जाए।

लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन क्या है?

जब आपकी आय बढ़ने के साथ आपके खर्च भी लगातार बढ़ते जाते हैं, तो इसे लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन कहा जाता है। इससे बचने का एक तरीका यह है कि सैलरी बढ़ते ही पहले अपनी बचत और निवेश की रकम बढ़ाएं और उसके बाद बाकी रकम खर्च करें।

निवेश की समीक्षा कितनी बार करनी चाहिए?

हर दिन पोर्टफोलियो देखने की जरूरत नहीं है। आम तौर पर साल में एक या दो बार अपने निवेश की समीक्षा की जा सकती है। इसके अलावा शादी, नौकरी बदलने, बच्चे का जन्म या घर खरीदने जैसे बड़े बदलाव होने पर भी अपनी वित्तीय योजना को दोबारा देखना चाहिए।

निष्कर्ष

अमीर बनने के लिए सिर्फ ज्यादा कमाना जरूरी नहीं है, बल्कि कमाए हुए पैसे को सही तरीके से बचाना, निवेश करना और समय के साथ अपनी वित्तीय रणनीति को बदलना भी उतना ही जरूरी है। छोटी-छोटी गलत वित्तीय आदतें लंबे समय में बड़ा नुकसान कर सकती हैं। वहीं, नियमित बचत, समझदारी से निवेश, कर्ज पर नियंत्रण और अनुशासन आपको धीरे-धीरे मजबूत आर्थिक स्थिति की ओर ले जा सकते हैं।

वेल्थ बनाने के लिए सिर्फ ज्यादा कमाई करना ही काफी नहीं है। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि आप अपनी कमाई को किस तरह मैनेज करते हैं। कई बार अच्छी सैलरी होने के बावजूद लोग आर्थिक रूप से मजबूत नहीं बन पाते, क्योंकि उनकी कुछ ऐसी वित्तीय आदतें होती हैं जो धीरे-धीरे उनकी बचत और निवेश दोनों को कमजोर कर देती हैं।

कुछ गलतियां तो आसानी से नजर आ जाती हैं, जैसे क्रेडिट कार्ड से जरूरत से ज्यादा खर्च करना। लेकिन कुछ आदतें ऐसी होती हैं जिनका नुकसान लंबे समय बाद समझ आता है। उदाहरण के लिए, हर महीने बचत करना लेकिन उसे सही जगह निवेश न करना या सैलरी बढ़ने के साथ निवेश की रकम न बढ़ाना।

अगर आप लंबे समय में मजबूत आर्थिक स्थिति बनाना चाहते हैं, तो इन 10 गलतियों से बचना बेहद जरूरी है।

1. जितनी कमाई, उतना ही खर्च

अगर आपकी पूरी सैलरी हर महीने खर्च हो जाती है, तो कमाई बढ़ने के बावजूद आपकी आर्थिक स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं होगा। सैलरी बढ़ने के साथ खर्च बढ़ाने के बजाय बचत और निवेश की रकम भी बढ़ानी चाहिए। इसके लिए हर महीने बजट बनाना और खर्चों पर नजर रखना जरूरी है।

2. निवेश शुरू करने के लिए सही समय का इंतजार

कई लोग यह सोचकर निवेश टालते रहते हैं कि जब ज्यादा पैसा होगा या बाजार सही स्थिति में आएगा, तब शुरुआत करेंगे। लेकिन निवेश में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। छोटी रकम से शुरुआत करके भी लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा लिया जा सकता है।

3. महंगा कर्ज लेकर चलना

क्रेडिट कार्ड का बकाया या ज्यादा ब्याज वाला पर्सनल लोन आपकी कमाई का बड़ा हिस्सा ब्याज में खत्म कर सकता है। ऐसे कर्ज को लंबे समय तक खींचने के बजाय उसे जल्द चुकाने की रणनीति बनानी चाहिए। कर्ज कम होने के बाद वही पैसा निवेश में लगाया जा सकता है।

4. इमरजेंसी फंड न बनाना

अचानक नौकरी जाने, मेडिकल खर्च, वाहन खराब होने या किसी अन्य आपात स्थिति में अगर आपके पास पर्याप्त बचत नहीं है, तो आपको कर्ज लेना पड़ सकता है या अपने निवेश को समय से पहले निकालना पड़ सकता है।

इसलिए अपनी जरूरत के हिसाब से कम से कम कुछ महीनों के जरूरी खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड रखना समझदारी है।

5. अपना पूरा पैसा सिर्फ सेविंग्स अकाउंट में रखना

सेविंग्स अकाउंट में पैसा रखना गलत नहीं है। रोजमर्रा के खर्च और इमरजेंसी के लिए कुछ रकम आसानी से उपलब्ध होना जरूरी है। लेकिन लंबे समय के लक्ष्यों के लिए पूरा पैसा सिर्फ बैंक खाते में रखना सही रणनीति नहीं हो सकती।

महंगाई समय के साथ पैसे की वास्तविक खरीद क्षमता को कम करती है। इसलिए लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए अपनी जोखिम क्षमता और लक्ष्य के अनुसार अलग-अलग निवेश विकल्पों पर विचार करना चाहिए।

6. बिना लक्ष्य के निवेश करना

सिर्फ इसलिए किसी निवेश योजना में पैसा नहीं लगाना चाहिए क्योंकि वह लोकप्रिय है या दूसरे लोग उसमें निवेश कर रहे हैं। निवेश करने से पहले यह तय करें कि पैसा किस उद्देश्य के लिए है।

घर खरीदना, बच्चों की पढ़ाई, शादी या रिटायरमेंट जैसे अलग-अलग लक्ष्यों के लिए अलग समयसीमा और अलग निवेश रणनीति की जरूरत हो सकती है।

7. ट्रेंड देखकर निवेश के पीछे भागना

किसी शेयर, म्यूचुअल फंड या दूसरे निवेश ने पिछले साल शानदार रिटर्न दिया है, इसका मतलब यह नहीं कि आगे भी वही प्रदर्शन जारी रहेगा।

सिर्फ पुराने रिटर्न देखकर किसी निवेश के पीछे भागने से निवेशक अक्सर ऊंची कीमत पर खरीदारी कर बैठते हैं। इसलिए निवेश करते समय रिस्क, समयसीमा और अपने पूरे पोर्टफोलियो को ध्यान में रखना जरूरी है।

8. सैलरी बढ़ते ही लाइफस्टाइल महंगी कर लेना

सैलरी बढ़ते ही महंगी कार, बड़ा घर, ज्यादा शॉपिंग और महंगे गैजेट्स पर खर्च बढ़ा देना लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन का उदाहरण है।

कमाई बढ़ने पर जीवनशैली में सुधार करना गलत नहीं है, लेकिन हर बढ़ोतरी का पूरा फायदा खर्च में बदल देना भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को कमजोर कर सकता है। बेहतर तरीका यह है कि हर सैलरी इंक्रीमेंट के साथ SIP या निवेश की रकम भी बढ़ाई जाए।

9. रिटायरमेंट प्लानिंग को टालते रहना

रिटायरमेंट भले ही आज से कई साल दूर हो, लेकिन इसकी तैयारी जितनी जल्दी शुरू की जाए उतना बेहतर है। कम उम्र में शुरुआत करने से छोटी-छोटी रकम भी लंबे समय में बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद कर सकती है।

अगर आप रिटायरमेंट प्लानिंग को लगातार टालते रहते हैं, तो बाद में उसी लक्ष्य के लिए ज्यादा रकम निवेश करनी पड़ सकती है।

10. अपने फाइनेंशियल प्लान की समीक्षा न करना

वित्तीय योजना एक बार बनाकर हमेशा के लिए छोड़ देने वाली चीज नहीं है। समय के साथ आपकी आय, खर्च, कर्ज और जीवन के लक्ष्य बदल सकते हैं।

इसलिए समय-समय पर अपने खर्च, बचत, इमरजेंसी फंड, इंश्योरेंस और निवेश पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए। शादी, नौकरी बदलने, बच्चे के जन्म या घर खरीदने जैसे बड़े बदलावों के बाद फाइनेंशियल प्लान को दोबारा देखना और भी जरूरी हो जाता है।

क्या ज्यादा सैलरी होना ही अमीर बनने की गारंटी है?

नहीं। ज्यादा सैलरी से बचत और निवेश करना आसान हो सकता है, लेकिन असली फर्क आपकी वित्तीय आदतें पैदा करती हैं। अगर कमाई बढ़ने के साथ खर्च भी उसी रफ्तार से बढ़ते रहें, तो ज्यादा कमाने के बावजूद संपत्ति नहीं बन पाएगी।

क्या निवेश से पहले पूरा कर्ज खत्म करना जरूरी है?

यह कर्ज की ब्याज दर और उसकी प्रकृति पर निर्भर करता है। क्रेडिट कार्ड जैसे महंगे कर्ज को प्राथमिकता से चुकाना आमतौर पर बेहतर होता है। कम ब्याज वाले कर्ज की स्थिति अलग हो सकती है और उसमें निवेश तथा कर्ज चुकाने के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

इमरजेंसी फंड में कितना पैसा होना चाहिए?

इसकी जरूरत हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है। नौकरी की स्थिरता, मासिक खर्च और परिवार की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखना चाहिए। आम तौर पर 3 से 6 महीने के जरूरी खर्च के बराबर रकम का इमरजेंसी फंड रखने की सलाह दी जाती है।

क्या सेविंग्स अकाउंट में पैसा रखना गलत है?

बिल्कुल नहीं। रोजमर्रा के खर्च और अचानक जरूरत के लिए सेविंग्स अकाउंट में पैसा रखना जरूरी है। समस्या तब होती है जब लंबे समय के लक्ष्यों के लिए रखा पूरा पैसा भी वहीं पड़ा रहे और उसकी ग्रोथ महंगाई की रफ्तार से पीछे रह जाए।

लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन क्या है?

जब आपकी आय बढ़ने के साथ आपके खर्च भी लगातार बढ़ते जाते हैं, तो इसे लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन कहा जाता है। इससे बचने का एक तरीका यह है कि सैलरी बढ़ते ही पहले अपनी बचत और निवेश की रकम बढ़ाएं और उसके बाद बाकी रकम खर्च करें।

निवेश की समीक्षा कितनी बार करनी चाहिए?

हर दिन पोर्टफोलियो देखने की जरूरत नहीं है। आम तौर पर साल में एक या दो बार अपने निवेश की समीक्षा की जा सकती है। इसके अलावा शादी, नौकरी बदलने, बच्चे का जन्म या घर खरीदने जैसे बड़े बदलाव होने पर भी अपनी वित्तीय योजना को दोबारा देखना चाहिए।

निष्कर्ष

अमीर बनने के लिए सिर्फ ज्यादा कमाना जरूरी नहीं है, बल्कि कमाए हुए पैसे को सही तरीके से बचाना, निवेश करना और समय के साथ अपनी वित्तीय रणनीति को बदलना भी उतना ही जरूरी है। छोटी-छोटी गलत वित्तीय आदतें लंबे समय में बड़ा नुकसान कर सकती हैं। वहीं, नियमित बचत, समझदारी से निवेश, कर्ज पर नियंत्रण और अनुशासन आपको धीरे-धीरे मजबूत आर्थिक स्थिति की ओर ले जा सकते हैं।

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