IDBI Bank Deal: ₹52,878 करोड़ में बिकेगा IDBI बैंक? सरकार ने बताया ₹3,917 करोड़ कैसे बढ़ी बोली की कीमत
IDBI बैंक की बिक्री को लेकर उठ रहे सवालों पर केंद्र सरकार ने सफाई दी है। बैंक की वैल्यूएशन, बोली की कीमत और दूसरे राउंड की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। इस पर निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने स्पष्ट किया है कि विनिवेश की पूरी प्रक्रिया तय सरकारी नियमों के अनुसार पूरी की गई है। सरकार के मुताबिक, दूसरे राउंड की बोली में बैंक के लिए पेश की गई कीमत में 3,917 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
इस सौदे में कनाडा की कंपनी Fairfax ने 81 रुपये प्रति शेयर की दर से बोली लगाई है। वहीं, दो स्वतंत्र एजेंसियों ने बैंक की उचित कीमत यानी फेयर वैल्यू 75.99 रुपये प्रति शेयर आंकी थी। सरकार ने कहा है कि बैंक की बिक्री के लिए तय न्यूनतम कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया।
क्या सरकार ने कम कीमत पर बेचा IDBI बैंक?
IDBI बैंक के विनिवेश को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा था कि क्या बैंक को उसकी वास्तविक कीमत से कम दाम पर बेचा जा रहा है। DIPAM के अनुसार, बिक्री के लिए तय रिजर्व प्राइस को न तो घटाया गया और न ही बढ़ाया गया।
सरकार ने बताया कि पहले दौर में मिली बोलियों को मंजूरी नहीं दी गई थी, जिसके बाद उस चरण की प्रक्रिया समाप्त कर दी गई। इसके बाद दूसरे दौर में बेहतर प्रस्ताव हासिल करने के लिए नई प्रक्रिया अपनाई गई।
इस प्रक्रिया को कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) से मिले अधिकारों के तहत कोर ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज ऑन डिसइन्वेस्टमेंट (CGD) ने मंजूरी दी थी। सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई है।
कैसे तय हुई IDBI बैंक की कीमत?
DIPAM के मुताबिक, बैंक की बिक्री के लिए बोली लगाने वाली कंपनियों को अपनी ओर से कीमत तय करके गोपनीय तरीके से प्रस्ताव देना था। इसके साथ ही दो स्वतंत्र एजेंसियों से बैंक की फेयर वैल्यू का आकलन कराया गया।
इस प्रक्रिया को डबल-ब्लाइंड रखा गया था। इसका मतलब है कि बोली लगाने वाली कंपनियों को स्वतंत्र एजेंसियों की वैल्यूएशन की जानकारी नहीं थी। वहीं, वैल्यूएशन करने वाली एजेंसियों को कंपनियों की ओर से लगाई गई बोलियों की कीमतों के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी। दोनों तरह की जानकारी CGD के पास थी।
बैंक की कीमत का आकलन करते समय सूचीबद्ध सरकारी बैंकों की तुलना की गई। इसके अलावा IDBI बैंक की संपत्तियों और संभावित विवादित टैक्स मांगों को भी ध्यान में रखा गया। सरकार के अनुसार, बैंक के शेयर में उतार-चढ़ाव और सीमित कारोबार के कारण उसके बाजार भाव को वैल्यूएशन का मुख्य आधार नहीं बनाया गया।
₹627 करोड़ की संभावित टैक्स देनदारी पर भी सफाई
IDBI बैंक की बिक्री को लेकर संभावित टैक्स देनदारी का मुद्दा भी चर्चा में रहा है। DIPAM ने बताया कि इसके लिए 627 करोड़ रुपये की इंडेम्निटी का प्रावधान रखा गया है।
यह राशि तभी देनी होगी, जब अतिरिक्त टैक्स मांग सामने आने पर उसका भुगतान करना पड़ेगा। सरकार ने इस संभावित देनदारी की तुलना दूसरे दौर में बोली की कीमत में हुई 3,917 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी से की है। हालांकि, वास्तविक वित्तीय असर इस बात पर निर्भर करेगा कि भविष्य में कोई अतिरिक्त टैक्स देनदारी बनती है या नहीं।
₹52,878 करोड़ में बिकेगी 60.72% हिस्सेदारी
IDBI बैंक के विनिवेश के तहत सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपनी कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना पर आगे बढ़ रहे हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, इस हिस्सेदारी का मूल्य लगभग 52,878 करोड़ रुपये है।
इसमें केंद्र सरकार की 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी की कीमत करीब 26,620 करोड़ रुपये और LIC की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी की कीमत लगभग 26,440 करोड़ रुपये बताई गई है। इस सौदे के लिए कनाडा की Fairfax कंपनी का नाम सामने आया है।
सौदा पूरा होने के बाद भी सरकार और LIC के पास बैंक की कुछ हिस्सेदारी बनी रहेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, सरकार की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत और LIC की हिस्सेदारी लगभग 19 प्रतिशत रहने की बात कही गई है।
कब पूरा होगा IDBI बैंक का सौदा?
IDBI बैंक की बिक्री का सौदा चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की जरूरी मंजूरी सहित अन्य नियामकीय औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
इस बीच, बैंक कर्मचारियों ने नौकरी की शर्तों, पेंशन और अन्य सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। सरकार की ओर से कर्मचारियों को आश्वस्त करने की बात कही गई है।
फिलहाल, इस सौदे की अंतिम स्थिति जरूरी मंजूरियों और प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगी।

