LIC पर IRDAI के नए नियमों का कितना होगा असर? CEO ने बताया एजेंटों और बीमा कंपनियों के लिए क्या बदलेगा, 22.3% पर पहुंचा VNB मार्जिन
बीमा सेक्टर में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। बीमा नियामक IRDAI कमीशन की सीमा और बीमा पॉलिसियों के डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े नए नियम लाने की तैयारी कर रहा है। इन प्रस्तावित नियमों को लेकर देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (LIC) के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर आर. दोराईस्वामी (R. Doraiswamy) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
ANI को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि IRDAI के प्रस्तावित नियमों का LIC पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि कंपनी पहले से ही कमीशन और डिस्ट्रीब्यूशन पर होने वाले खर्च को निर्धारित सीमाओं के भीतर रखती आई है। हालांकि, जिन बीमा कंपनियों का डिस्ट्रीब्यूशन खर्च ज्यादा है, उन्हें नए नियम लागू होने के बाद अधिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
LIC पर IRDAI के नए नियमों का कम असर क्यों होगा?
LIC के CEO आर. दोराईस्वामी के मुताबिक, कंपनी ने कभी भी डिस्ट्रीब्यूशन पर जरूरत से ज्यादा खर्च नहीं किया है। कमीशन और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े दूसरे खर्चों को लेकर LIC की अपनी आंतरिक सीमाएं रही हैं।
उन्होंने बताया कि IRDAI ने अपने कंसल्टेशन पेपर में जिन खर्चों और कमीशन से जुड़ी सीमाओं का प्रस्ताव रखा है, LIC पहले से ही काफी हद तक उनका पालन कर रही है। हालांकि, कुछ प्रोडक्ट कैटेगरी और रेगुलर प्रीमियम पॉलिसियों की कुछ प्रीमियम भुगतान अवधियों में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।
LIC एजेंटों के कमीशन और कमाई पर क्या पड़ेगा असर?
IRDAI के नए प्रस्तावों को लेकर LIC एजेंटों के मन में भी कई सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नए नियमों से एजेंटों को मिलने वाले कमीशन पर असर पड़ेगा और उनकी कमाई कम हो सकती है?
इस पर दोराईस्वामी ने कहा कि LIC को कुछ प्रोडक्ट्स में बदलाव करना पड़ सकता है। जरूरत पड़ने पर कंपनी को कुछ पॉलिसियों को वापस लेना या दोबारा रेगुलेटर के पास फाइल करना पड़ सकता है।
हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि LIC पर इसका असर सीमित रहेगा। उन्होंने एजेंटों को कंपनी की तरक्की का महत्वपूर्ण भागीदार बताया और कहा कि उनके लॉन्ग टर्म हितों की सुरक्षा भी कंपनी की प्राथमिकता है।
LIC ने प्रस्तावित नियमों को लेकर IRDAI को अपना फीडबैक भी भेज दिया है। कंपनी को उम्मीद है कि अंतिम नियम तैयार करते समय बीमा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स की चिंताओं को ध्यान में रखा जाएगा।
IRDAI क्यों बदलना चाहता है कमीशन और डिस्ट्रीब्यूशन के नियम?
बीमा नियामक IRDAI का मुख्य उद्देश्य बीमा कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूशन खर्च को नियंत्रित करना और ग्राहकों के हितों को मजबूत करना है।
दरअसल, कमीशन पर पहले लागू अलग-अलग सीमाओं में बदलाव और एक्सपेंसेज ऑफ मैनेजमेंट (EOM) आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ने के बाद बीमा कंपनियों के खर्च में बढ़ोतरी देखने को मिली है। ऐसे में नियामक चाहता है कि कंपनियां अपने खर्चों को बेहतर तरीके से नियंत्रित करें।
दोराईस्वामी का मानना है कि लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर के आर्थिक ढांचे को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया कोई भी कदम लंबे समय में पूरी इंडस्ट्री और ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
LIC का VNB मार्जिन बढ़कर 22.3% पर पहुंचा
LIC के कारोबार के लिहाज से एक और अहम बात सामने आई है। कंपनी का वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस (VNB) मार्जिन बढ़कर 22.3 फीसदी हो गया है। VNB मार्जिन से यह समझने में मदद मिलती है कि नई बेची गई बीमा पॉलिसियों से कंपनी कितना अनुमानित मुनाफा कमा सकती है।
CEO के मुताबिक, VNB मार्जिन में सुधार के पीछे बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, नॉन-पार्टिसिपेटिंग यानी नॉन-पार प्रोडक्ट्स में बड़ी पॉलिसियों और प्रोटेक्शन व सेविंग्स प्रोडक्ट्स पर बढ़ता फोकस अहम वजह रहा है।
कंपनी अब अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में पार और नॉन-पार पॉलिसियों का अनुपात लगभग एक-तिहाई और दो-तिहाई रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
FY27 में इन इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर रहेगा LIC का फोकस
वित्त वर्ष 2026-27 में LIC अपनी पॉलिसियों की रेंज और मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी का फोकस मुख्य रूप से इन प्रोडक्ट्स पर रहेगा:
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टर्म इंश्योरेंस: ग्राहकों को कम प्रीमियम में ज्यादा जीवन बीमा सुरक्षा देने वाले प्लान।
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सेविंग्स प्लान: लंबी अवधि में बचत और वित्तीय सुरक्षा से जुड़े प्रोडक्ट्स।
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एन्युटी प्लान: रिटायरमेंट के बाद नियमित आय उपलब्ध कराने वाली योजनाएं।
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ULIP: बीमा और बाजार आधारित निवेश का विकल्प देने वाले प्लान।
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हेल्थ इंश्योरेंस: स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े प्रोडक्ट्स को मजबूत करना।
दोराईस्वामी ने LIC के हेल्थ शील्ड, न्यू कैंसर कवर और जीवन रक्षा जैसे प्रोडक्ट्स का भी जिक्र किया। जीवन रक्षा एक प्योर टर्म इंश्योरेंस प्रोडक्ट है, जिसे ऐसे मध्यम वर्ग के लोगों की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर पेश किया गया है, जो अभी तक पर्याप्त बीमा कवर से दूर हैं।
प्राइवेट बीमा कंपनियों से मुकाबले के लिए LIC की क्या तैयारी?
प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों से लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच LIC अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को और मजबूत करना चाहती है। इसके लिए कंपनी एजेंटों की उत्पादकता बढ़ाने और ग्राहकों को ज्यादा विकल्प देने पर काम कर रही है।
LIC का लक्ष्य देश की हर पंचायत में कम से कम एक बीमा सखी की मौजूदगी सुनिश्चित करना है। दोराईस्वामी के अनुसार, अब तक करीब 66 फीसदी पंचायतें इस पहल के दायरे में आ चुकी हैं।
इस योजना के जरिए कंपनी ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों तक बीमा सेवाओं की पहुंच बढ़ाना चाहती है।
शेयर बाजार में गिरावट के दौरान निवेश करती है LIC
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव को लेकर दोराईस्वामी ने कहा कि LIC एक लॉन्ग टर्म निवेशक है। कंपनी ऐसे सेक्टर और कंपनियों की पहचान करती है, जहां लंबे समय में बेहतर वैल्यू बनाने की संभावना होती है।
उन्होंने बताया कि बाजार में गिरावट के दौरान LIC निवेश के अवसर तलाशती है। वहीं, बाजार में तेजी आने पर जरूरत के मुताबिक मुनाफा भी बुक करती है, ताकि पॉलिसीधारकों को समय पर भुगतान किया जा सके।
2047 तक हर व्यक्ति तक बीमा पहुंचाने का लक्ष्य
भारत में बीमा की पहुंच अभी भी कई विकसित देशों के मुकाबले कम है। ऐसे में LIC को आने वाले वर्षों में ग्रोथ की बड़ी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
दोराईस्वामी के मुताबिक, 2047 तक सभी लोगों को बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराने के लक्ष्य में LIC महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे शहरों और अब तक बीमा से दूर रहे लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
Q2 FY27 में LIC का मुनाफा 20.12% बढ़ा
LIC ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। सितंबर तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 20.12 फीसदी बढ़कर 12,076.02 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 10,053.39 करोड़ रुपये था।
कंपनी की नेट प्रीमियम इनकम में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
LIC के Q2 FY27 के प्रमुख आंकड़े:
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नेट प्रॉफिट: 20.12% बढ़कर 12,076.02 करोड़ रुपये।
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पिछले साल का मुनाफा: 10,053.39 करोड़ रुपये।
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नेट प्रीमियम इनकम: 16.24% बढ़कर 1,47,018.18 करोड़ रुपये।
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सिंगल प्रीमियम इनकम: 50,802.84 करोड़ रुपये से बढ़कर 68,402.86 करोड़ रुपये।
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VNB मार्जिन: बढ़कर 22.3 फीसदी।
कुल मिलाकर LIC नए रेगुलेटरी नियमों को लेकर ज्यादा चिंतित नजर नहीं आ रही है। कंपनी का मानना है कि उसका मौजूदा खर्च ढांचा उसे दूसरे बीमा कंपनियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में रखता है। अब देखना होगा कि IRDAI अंतिम नियमों में कमीशन और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च को लेकर क्या बदलाव करता है और इसका बीमा एजेंटों, कंपनियों तथा ग्राहकों पर कितना असर पड़ता है।

