Home Loan Tax Benefit: पति-पत्नी मिलकर होम लोन लें तो ऐसे बचा सकते हैं टैक्स, इन शर्तों का रखना होगा ध्यान
घर खरीदने के लिए पति-पत्नी का मिलकर होम लोन लेना सिर्फ EMI का बोझ कम करने का तरीका नहीं है। अगर प्रॉपर्टी की ओनरशिप, लोन में हिस्सेदारी और EMI भुगतान सही तरीके से तय किया जाए, तो दोनों अलग-अलग अपनी पात्रता के अनुसार होम लोन के ब्याज पर टैक्स डिडक्शन का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, केवल घर के कागजों में दोनों के नाम होना टैक्स छूट पाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
Home Loan में दोनों का को-ओनर होना जरूरी
पति-पत्नी दोनों अगर होम लोन पर टैक्स लाभ लेना चाहते हैं तो उन्हें प्रॉपर्टी का सह-मालिक यानी को-ओनर होना चाहिए। इसके साथ दोनों का लोन में को-बोरोअर होना और EMI भुगतान में वास्तविक योगदान भी महत्वपूर्ण है।
सिर्फ लोन एग्रीमेंट में नाम दर्ज होने या प्रॉपर्टी में नाम होने से अपने आप टैक्स डिडक्शन का अधिकार नहीं मिल जाता। टैक्स लाभ के लिए भुगतान और स्वामित्व से जुड़ी स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।
ब्याज पर मिल सकता है 4 लाख रुपये तक का लाभ
खुद रहने वाले घर के मामले में पात्रता पूरी होने पर प्रत्येक व्यक्ति होम लोन के ब्याज पर सालाना 2 लाख रुपये तक की कटौती का दावा कर सकता है। इस तरह पति-पत्नी दोनों पात्र होने पर कुल मिलाकर 4 लाख रुपये तक के ब्याज पर डिडक्शन संभव हो सकता है।
हालांकि, यह अधिकतम सीमा है। वास्तविक टैक्स लाभ प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी, लोन की व्यवस्था और प्रत्येक व्यक्ति द्वारा वास्तव में चुकाए गए ब्याज पर निर्भर करेगा।
50-50 हिस्सेदारी होने पर कैसे मिलेगा फायदा?
मान लीजिए पति और पत्नी दोनों की घर में 50-50 फीसदी हिस्सेदारी है और दोनों होम लोन की EMI में योगदान कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में दोनों अपनी पात्र हिस्सेदारी के अनुसार ब्याज पर टैक्स डिडक्शन का दावा कर सकते हैं।
वहीं, अगर प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी 20-80 फीसदी है तो केवल इसलिए 20 फीसदी हिस्सेदार 2 लाख रुपये तक का पूरा ब्याज डिडक्शन क्लेम नहीं कर सकता कि दूसरे पार्टनर की आय अधिक है या वह ज्यादा EMI चुका रहा है।
पूरी EMI एक व्यक्ति भरता है तो क्या होगा?
अगर पति-पत्नी दोनों घर के मालिक और लोन के बोरोअर हैं, लेकिन EMI का पूरा भुगतान केवल एक व्यक्ति करता है, तो ब्याज पर टैक्स लाभ का दावा भुगतान और लागू स्वामित्व हिस्सेदारी के आधार पर होगा।
सिर्फ सह-मालिक या को-बोरोअर होने के आधार पर दूसरा व्यक्ति टैक्स डिडक्शन नहीं ले सकता, अगर उसने ब्याज के भुगतान में वास्तविक योगदान नहीं किया है। दूसरी ओर, EMI का पूरा भुगतान करने वाला व्यक्ति भी अपनी पात्र ओनरशिप से अधिक लाभ का दावा नहीं कर सकता।
निर्माण के दौरान चुकाए ब्याज का भी है नियम
अगर घर निर्माणाधीन है, तो निर्माण अवधि के दौरान भुगतान किए गए ब्याज का क्लेम सामान्य तरीके से उसी समय नहीं किया जाता। पात्र मामलों में इस ब्याज को निर्माण पूरा होने या घर का कब्जा मिलने के बाद पांच बराबर वार्षिक किस्तों में क्लेम किया जा सकता है।
इसलिए होम लोन लेते समय पति-पत्नी को सिर्फ EMI की रकम पर ध्यान नहीं देना चाहिए। प्रॉपर्टी की हिस्सेदारी, लोन में दोनों की भूमिका और EMI के वास्तविक भुगतान का रिकॉर्ड भी सही रखना जरूरी है।
टैक्स बचत के लिए रिकॉर्ड रखें मजबूत
पति-पत्नी के लिए संयुक्त होम लोन टैक्स प्लानिंग का एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसका लाभ तभी प्रभावी तरीके से लिया जा सकता है जब स्वामित्व और भुगतान की व्यवस्था स्पष्ट हो। प्रॉपर्टी के दस्तावेज, लोन रिकॉर्ड, EMI भुगतान और ब्याज प्रमाणपत्र जैसे रिकॉर्ड संभालकर रखना आगे टैक्स डिडक्शन का दावा करते समय उपयोगी रहेगा।

