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अप्रैल में भारत के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में मजबूत वृद्धि दर्ज : एचएसबीसी रिपोर्ट

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। एचएसबीसी के आंकड़ों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट और सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी में तेजी के कारण अप्रैल में भारत के कम्पोजिट फ्लैश परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।
अप्रैल में भारत के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में मजबूत वृद्धि दर्ज : एचएसबीसी रिपोर्ट

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। एचएसबीसी के आंकड़ों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट और सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी में तेजी के कारण अप्रैल में भारत के कम्पोजिट फ्लैश परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया कि अप्रैल में यह 60 अंक पर रहा, जो व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं के बावजूद मार्च के मुकाबले अधिक है।

पीएमआई पर 50 का आंकड़ा विस्तार और संकुचन को अलग करता है।

इस महीने के दौरान नए निर्यात ऑर्डर में तेजी से वृद्धि हुई, जो कि अमेरिकी टैरिफ को लेकर '90-डे ब्रेक' से जुड़ी थी।

जबकि, निर्माताओं के लिए विस्तार की गति थोड़ी तेज थी, सेवाओं के नए निर्यात व्यवसाय में वृद्धि भी उतनी ही प्रभावशाली रही।

समग्र स्तर पर, नए निर्यात ऑर्डर सीरीज की शुरुआत के बाद से सबसे तेज गति से बढ़े।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ पैनलिस्टों ने इसका श्रेय अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए के मूल्यह्रास के कारण 'बेहतर प्रतिस्पर्धा' को दिया।

महीने के दौरान मार्जिन में भी सुधार हुआ क्योंकि लागत मुद्रास्फीति मार्च के स्तर के अनुरूप थी, लेकिन कीमतें कुछ तेजी से बढ़ीं।

एचएसबीसी की रिपोर्ट में कहा गया, "विकास के 100 संकेतकों के हमारे फ्रेमवर्क से पता चलता है कि मार्च तिमाही पिछली दो तिमाहियों की तुलना में बेहतर है, लेकिन जून 2024 से काफी नीचे है।"

फसल कटाई के बाद ग्रामीण मांग और मौद्रिक नीति में ढील से विकास को समर्थन मिलने की संभावना है।

हालांकि, रिपोर्ट में बताया गया है कि एक बार जब रिस्टॉकिंग डिमांड कम हो जाएगी, तो माल निर्यात में कमी आएगी।

इसमें यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 'ट्रंप टैरिफ' के कारण 0.5 प्रतिशत अंक तक प्रभावित हो सकती है।

एचएसबीसी की रिपोर्ट में कहा गया, "आरबीआई ने पहले ही ब्याज दरों में कटौती का चक्र शुरू कर दिया है। इसने 50 आधार अंकों की कटौती की है और हमें उम्मीद है कि अगली तीन तिमाहियों में से प्रत्येक में 25 आधार अंकों की कटौती होगी, जिससे 2025 के अंत तक रेपो दर 5.25 प्रतिशत हो जाएगी। इसके अलावा, हमें उम्मीद है कि आसान लिक्विडिटी की स्थिति बनी रहेगी और ब्याज दरों में कटौती का लाभ लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।"

--आईएएनएस

एसकेटी/एबीएम

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