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डीबीटी स्कीम से सीधे आम जनता के खाते में अब तक पहुंचे 43.3 लाख करोड़ रुपये

नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) स्कीम के जरिए अब तक केंद्र सरकार ने 43.3 लाख करोड़ रुपये की राशि सीधे आम जनता के खाते में ट्रांसफर की है।
डीबीटी स्कीम से सीधे आम जनता के खाते में अब तक पहुंचे 43.3 लाख करोड़ रुपये

नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) स्कीम के जरिए अब तक केंद्र सरकार ने 43.3 लाख करोड़ रुपये की राशि सीधे आम जनता के खाते में ट्रांसफर की है।

इससे पारदर्शिता में सुधार में आया है। साथ ही लीकेज रोकने में सफलता मिली और सरकारी फंड भी सीधे लाभार्थी तक पहुंच रहा है।

सरकारी डेटा के मुताबिक, सरकार ने 21 अप्रैल तक 43,35,808 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के जरिए सीधे आम जनता को ट्रांसफर की है।

अकेले वित्त वर्ष 25 में डीबीटी के माध्यम से केंद्र ने 6.60 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी ट्रांसफर की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी में 9.8 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 19वीं किस्त जारी की। इसमें बिना किसी बिचौलियों के डीबीटी के माध्यम से 22,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों को ट्रांसफर की गई।

ताजा रिपोर्ट के अनुसार, डीबीटी सिस्टम के आने से लीकेज रोकने में मदद मिली है और इससे 3.48 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है।

पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा शुरू किए गए इस सिस्टम के शुभारंभ के बाद से लाभार्थी कवरेज में 11 करोड़ से 176 करोड़ तक 16 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है।

डीबीटी सिस्टम के माध्यम से पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जाता है। इस कारण धन की चोरी पर रोक लग गई है, जिसके परिणामस्वरूप कुल खर्च में सब्सिडी आवंटन की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से घटकर 9 प्रतिशत रह गई है।

स्टडी में कहा गया, "डीबीटी ने लीकेज पर अंकुश लगाने और ट्रांसपेरेंसी को बढ़ावा देने के साथ फंड वितरण को लेकर सटीकता सुनिश्चित की है। इसी के साथ डीबीटी के साथ कल्याणकारी वितरण को दोबारा परिभाषित किया गया है।"

2009-10 में कल्याण बजट में 2.1 लाख करोड़ रुपये से 2023-24 में 8.5 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि के बावजूद सब्सिडी आवंटन में गिरावट दर्ज की गई है, जो कि डीबीटी की सफलता को दर्शाता है।

आधार-लिंक्ड ऑथेंटिकेशन ने फर्जी लाभार्थियों को कम करने में मदद की, जिससे राजकोषीय व्यय के बिना कवरेज का विस्तार हो पाया।

--आईएएनएस

एबीएस/सीबीटी

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