HDFC बैंक का बड़ा धमाका! दूसरी तिमाही में मुनाफा बढ़कर ₹19,510 करोड़ पार, जानिए नतीजों की 5 बड़ी बातें
देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल HDFC बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर 2026 के नतीजे जारी किए हैं। बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.7% बढ़कर ₹19,510 करोड़ हो गया। वहीं, बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई और यह 9.7% बढ़कर ₹34,619 करोड़ पर पहुंच गई।
बैंक के नतीजे बाजार के अनुमानों के करीब रहे। इसके साथ ही बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार देखने को मिला और कुल लोन तथा डिपॉजिट में भी सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, दूसरी ओर बैंक के शेयर में साल 2026 के दौरान अब तक लगभग 26.5% की गिरावट बताई गई है।
HDFC बैंक का मुनाफा कितना बढ़ा?
HDFC बैंक के तिमाही नतीजों के मुताबिक, जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹19,510 करोड़ रहा। पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले इसमें 4.7% की बढ़ोतरी हुई।
बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम यानी ब्याज से होने वाली शुद्ध कमाई 9.7% बढ़कर ₹34,619 करोड़ पर पहुंच गई। नतीजे जारी होने से पहले CNBC-TV18 के पोल में बैंक के नेट प्रॉफिट का अनुमान ₹19,567 करोड़ और नेट इंटरेस्ट इनकम का अनुमान ₹34,861 करोड़ लगाया गया था। इस लिहाज से बैंक के वास्तविक नतीजे बाजार के अनुमान के काफी करीब रहे।
नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.16% पर रहा
बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) कुल एसेट्स के आधार पर 3.16% और ब्याज कमाने वाली संपत्तियों के आधार पर 3.32% रहा।
तिमाही के दौरान बैंक ने प्रोविजन्स और कंटीजेंसीज के लिए ₹3,570 करोड़ रखे। वहीं, कुल क्रेडिट कॉस्ट रेशियो 0.44% दर्ज किया गया।
नेट इंटरेस्ट मार्जिन बैंक की ब्याज से कमाई की क्षमता को समझने में मदद करता है। इसमें सुधार या गिरावट का असर बैंक की कमाई पर पड़ सकता है।
बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार
HDFC बैंक के नतीजों में एक अहम बात यह रही कि उसके खराब कर्ज यानी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) के अनुपात में सुधार हुआ।
30 सितंबर 2026 तक बैंक का ग्रॉस NPA (GNPA) रेशियो घटकर 1.11% पर आ गया। जून 2026 में यह 1.17% और सितंबर 2025 में 1.24% था।
अगर कृषि क्षेत्र से जुड़े NPA को अलग कर दिया जाए, तो बैंक का GNPA रेशियो 0.87% रहा। जून 2026 में यह 0.91% और सितंबर 2025 में 0.99% था। वहीं, सितंबर तिमाही के अंत में नेट NPA (NNPA) रेशियो 0.37% दर्ज किया गया।
आमतौर पर NPA अनुपात में गिरावट को बैंक की एसेट क्वालिटी के लिए सकारात्मक माना जाता है। हालांकि, बैंक की पूरी वित्तीय स्थिति समझने के लिए मुनाफे, कर्ज वृद्धि, जमा, पूंजी और अन्य वित्तीय संकेतकों को भी देखना जरूरी है।
लोन बांटने में 16.3% की सालाना बढ़ोतरी
HDFC बैंक के ग्रॉस एडवांसेज यानी कुल कर्ज में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। 30 सितंबर 2026 तक ग्रॉस एडवांसेज सालाना आधार पर 16.3% बढ़कर ₹32,19,500 करोड़ हो गए।
विभिन्न क्षेत्रों में कर्ज की वृद्धि इस प्रकार रही:
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रिटेल लोन: सालाना आधार पर 11.7% की बढ़ोतरी।
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स्मॉल और मिड-मार्केट एंटरप्राइज लोन: 23.5% की बढ़त।
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कॉर्पोरेट और अन्य होलसेल लोन: 16.4% की बढ़ोतरी।
बैंक का औसत एडवांसेज अंडर मैनेजमेंट ₹31,87,200 करोड़ रहा। इसमें सालाना आधार पर 14.1% और तिमाही आधार पर 4.9% की बढ़ोतरी हुई।
कर्ज में बढ़ोतरी बैंक के कारोबार के विस्तार का संकेत देती है। हालांकि, इसके साथ यह देखना भी जरूरी है कि बैंक कर्ज की गुणवत्ता बनाए रखने और जोखिम को नियंत्रित करने में कितना सफल रहता है।
कुल डिपॉजिट 18.8% बढ़कर ₹33.27 लाख करोड़
सितंबर 2026 के अंत तक HDFC बैंक का कुल डिपॉजिट सालाना आधार पर 18.8% बढ़कर ₹33,27,400 करोड़ हो गया।
बैंक के औसत डिपॉजिट में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली। यह सालाना आधार पर 16.8% बढ़कर ₹31,66,400 करोड़ रहा। तिमाही आधार पर इसमें 5.1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
करंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट यानी CASA डिपॉजिट सालाना आधार पर 10.8% बढ़े। कुल डिपॉजिट में CASA की हिस्सेदारी 31.6% रही। वहीं, टाइम डिपॉजिट में 22.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
डिपॉजिट में वृद्धि बैंक के लिए अहम है, क्योंकि इसी जमा राशि के आधार पर बैंक अपने ग्राहकों को लोन देने सहित अन्य बैंकिंग गतिविधियां संचालित करता है।
बैंक का नेट रेवेन्यू ₹48,450 करोड़
HDFC बैंक का नेट रेवेन्यू जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में ₹48,450 करोड़ रहा। पिछले साल की समान अवधि में यह ₹45,900 करोड़ था।
बैंक की अन्य आय ₹13,830 करोड़ रही, जिसमें ₹9,690 करोड़ फीस और कमीशन से प्राप्त हुए। हालांकि, ट्रेजरी ट्रेडिंग से होने वाला लाभ घटकर ₹780 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹2,390 करोड़ था।
इस दौरान बैंक के ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस भी बढ़े। ये पिछले साल के ₹17,980 करोड़ से बढ़कर ₹18,970 करोड़ हो गए। बैंक का कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो 39.1% रहा।
बैंक के मुताबिक, अगर ट्रेजरी ट्रेडिंग से होने वाले लाभ को अलग रखा जाए, तो उसका नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर लगभग 12.6% बढ़ा। इससे पता चलता है कि ट्रेजरी आय में गिरावट का कुल मुनाफे की वृद्धि पर असर पड़ा।
कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 18.9%
30 सितंबर 2026 तक HDFC बैंक का बेसल III के तहत कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 18.9% रहा। यह बताई गई 11.9% की नियामकीय आवश्यकता से अधिक था। एक साल पहले बैंक का यह अनुपात 20% था।
बैंक का टियर-1 कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 17.2% और कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET1) रेशियो 17.1% रहा।
कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो यह समझने में मदद करता है कि बैंक के पास संभावित वित्तीय जोखिमों का सामना करने के लिए पर्याप्त पूंजी है या नहीं। इस अनुपात को बैंक की वित्तीय मजबूती का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
HDFC बैंक का शेयर इस साल 26.5% गिरा
तिमाही नतीजों से पहले शुक्रवार को HDFC बैंक का शेयर 0.28% की बढ़त के साथ ₹728.85 पर बंद हुआ था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, साल 2026 में अब तक शेयर में लगभग 26.5% की गिरावट आई है। बैंक का बाजार पूंजीकरण करीब ₹11.24 लाख करोड़ बताया गया।
बैंक का मुनाफा बढ़ने और NPA अनुपात में सुधार के बावजूद शेयर में गिरावट यह दिखाती है कि शेयर बाजार केवल तिमाही मुनाफे के आधार पर प्रतिक्रिया नहीं करता। निवेशक भविष्य की कमाई, ब्याज दरों, कर्ज और जमा की वृद्धि, बैंक की लागत तथा पूरे बाजार के रुझान को भी ध्यान में रखते हैं।
यह जरूरी नहीं है कि अच्छे तिमाही नतीजों के बाद शेयर की कीमत तुरंत बढ़े। निवेश का फैसला लेने से पहले कंपनी के नतीजों, मूल्यांकन और अपने जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करना चाहिए।
नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) क्या होती है?
बैंक ग्राहकों से जमा राशि स्वीकार करता है और उस पैसे का एक हिस्सा लोन के रूप में देता है। लोन पर मिलने वाले ब्याज में से जमा पर ग्राहकों को दिए जाने वाले ब्याज को घटाने के बाद जो रकम बचती है, उसे नेट इंटरेस्ट इनकम कहते हैं।
यह बैंक की मुख्य कमाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है। NII में बढ़ोतरी से पता चल सकता है कि बैंक की ब्याज से होने वाली शुद्ध कमाई बढ़ रही है।
नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) का क्या मतलब है?
नेट इंटरेस्ट मार्जिन यानी NIM बैंक की ब्याज से कमाई की दक्षता का एक पैमाना है। इसे आमतौर पर ब्याज से होने वाली शुद्ध आय और ब्याज कमाने वाली औसत संपत्तियों के अनुपात के रूप में व्यक्त किया जाता है।
साधारण भाषा में कहें तो यह बताता है कि बैंक अपनी ब्याज कमाने वाली संपत्तियों से शुद्ध रूप में कितना कमा रहा है। NIM पर जमा की लागत, लोन पर ब्याज दर और बैंक की संपत्तियों के प्रकार का असर पड़ सकता है।
NPA, GNPA और NNPA क्या हैं?
NPA यानी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट: जब किसी लोन पर निर्धारित समय तक मूलधन या ब्याज का भुगतान नहीं होता और वह नियामकीय मानकों के अनुसार खराब कर्ज की श्रेणी में आ जाता है, तो उसे NPA कहा जाता है। सामान्य बैंकिंग नियमों के तहत टर्म लोन में ब्याज या मूलधन की किस्त 90 दिनों से अधिक समय तक बकाया रहने पर खाता NPA घोषित किया जा सकता है। अन्य प्रकार की सुविधाओं के लिए नियम अलग हो सकते हैं।
GNPA यानी ग्रॉस NPA: बैंक के कुल खराब कर्ज का अनुपात, जिसमें प्रोविजन घटाने से पहले की राशि शामिल होती है।
NNPA यानी नेट NPA: ग्रॉस NPA में से संबंधित प्रावधानों और नियमानुसार समायोजित रकम घटाने के बाद बचने वाले खराब कर्ज का माप।
आमतौर पर कम NPA अनुपात को सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि यह कर्ज की बेहतर गुणवत्ता का संकेत हो सकता है। हालांकि, इसके साथ रिकवरी, नए खराब कर्ज और बैंक के प्रोविजन्स को भी देखना चाहिए।
HDFC बैंक के बारे में
HDFC बैंक की स्थापना 1994 में हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में है। बैंक रिटेल बैंकिंग, कॉर्पोरेट बैंकिंग, लोन, जमा और अन्य वित्तीय सेवाएं प्रदान करता है। उपलब्ध विवरण में बैंक के देशभर में 9,694 से अधिक ब्रांच और 20,958 से अधिक ATM होने की जानकारी दी गई है।

